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कश्मीरियों को मौत का डर दिखाकर सेना से दूर रखना चाहते हैं आतंकी, कई वारदात को दे चुके हैं अंजाम

Sat, 30 Mar 2019 04:38 PM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 30 Mar 2019 04:38 PM IST
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Terrorists want Kashmir youth are not join army
सांकेतिक तस्वीर

घाटी में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन आतंक की जड़ें जमाने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के जहन में भारतीय सेना में भर्ती न होने का खौफ भी बिठा रहे हैं। आतंकी युवकों को देश और सेना के खिलाफ भड़काने की मुहिम भी जारी रखे हुए हैं। उधर, सेना भी कश्मीरी युवाओं को सेना ज्वाइन करने के लिए प्रेरित कर उनमें देश प्रेम की भावना पैदा कर रही है। 

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सेना के इस प्रयास का ही नतीजा है कि कश्मीरी युवा भी सेना की खुली भर्ती में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और पूरे जज्बे के साथ फौज भी ज्वाइन कर रहे हैं। सेना के एक आला अफसर ने बताया कि आतंकी नहीं चाहते कि कश्मीरी युवक फौज में भर्ती हों। वे युवाओं को जिहादी बनाकर उनके हाथों में बंदूक और पत्थर थमाना चाहते हैं। इसके लिए किशोरों व युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हे भड़काया जा रहा है।
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सैन्य अफसर ने बताया कि सेना भी लगातार विभिन्न अभियानों के जरिए स्थानीय युवकों और कश्मीरी परिवारों को खुद से जोड़ने के लिए प्रयासरत है। वर्ष 2018 में लेह, पुलवामा, सांबा, शोपियां, श्रीनगर, उधमपुर, बड़गाम, बारामूला, बांदीपोरा व अनंतनाग में सेना की खुली भर्ती का आयोजन किया गया था, जिसमें हजारों कश्मीरी युवाओं ने भाग लिया था। जबकि आगामी समय में सेना जम्मू, पूंछ, उधमपुर, राजौरी, सांबा, रामबन, डोडा, रियासी, कठुआ और किश्तवाड़ में भर्ती रैली आयोजित करेगी।

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गांव में नहीं बताते कि बेटा फौज में है

घाटी में रिमोट एरिया के कई गांव ऐसे हैं, जहां आतंकियों की दहशत इतनी ज्यादा है कि परिवार के लोग गांव तक में इस बात का जिक्र नहीं करते कि उनका बेटा फौज में है। गांववालों व पड़ोसियों को सिर्फ यही बताया जाता है कि उनका बेटा बाहर काम करता है।

यदि इस बारे में मालूम चल जाए तो आतंकी न केवल परिवार पर उनके बेटे को सेना छुड़वाने के लिए दबाव बनाते हैं, बल्कि संबंधित जवान को भी निशाने पर ले लेते हैं। इन मसलों पर शोधकर्ता लेखिका भावना अरोड़ा ने बताया कि आतंकी जवानों को भी धमकाते हैं। कुछ केसों में तो ऐसे जवानों को अगवा कर उनकी हत्या भी की गई है।

- आतंकियों ने 27 सितंबर 2017 को बीएसएफ के कांस्टेबल रमजान पारे को घर में घुसकर मार दिया था।
- 22 जून 2017 को श्रीनगर के डीएसपी मोहम्मद आयूब पंडित को 22 जून 2017 को मार दिया गया गया था।
- टेरिटोरियल आमी के राइफल मैन इरफान अहमद की 25 नवंबर 2017 को शोपियां में अगवा कर हत्या कर दी गई।
- 9 मई 2018 को दो राजपूताना राइफल के लेफ्टिनेंट उमर फैयाज को पैतृक गांव बीहीबाग से अगवा कर हत्या कर दी गई।
- 14 जून 2018 को 44 आरआर के राइफलमैन औरंगजेब को पुलवामा से अगवा कर हत्या कर दी गई।
- 5 जुलाई 2018 को कुलगाम से कांस्टेबल जाविद अहमद डार को अगवा कर हत्या कर दी गई, इसके अलावा भी 2 अन्य घटना भी इसी तरह हो चुकी है।

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