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परमजीत पंजवड़ की हत्या: गोलियों की बौछार ने खत्म किया आतंक का बड़ा नाम, अधूरे रहेंगे ISI के मंसूबे
Sat, 06 May 2023 05:32 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 06 May 2023 05:32 PM IST
सार
खालिस्तान कमांडो फोर्स में शामिल होने से पहले 1986 उसने केंद्रीय सहकारी बैंक में काम किया। 1986 में वह केसीएफ में शामिल हो गया। उसके चचेरे भाई लाभ सिंह का उस पर बड़ा प्रभाव था।
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परमजीत पंजवड़
- फोटो : फाइल
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विस्तार
57 साल के आतंकी परमजीत पंजवड़ शनिवार को लाहौर में गोलियों से भून दिया गया। उसकी हत्या के साथ ही पंजाब को दहलाने की साजिश कर रहे आईएसआई के मंसूबों पर पानी फिर गया। पंजवड़ खालिस्तान की आड़ में पंजाब में आतंकवाद को दोबारा जिंदा करने की कोशिशों में जुटा था।
उस पर देशद्रोह, हत्या, साजिश, हथियारों की तस्करी व आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के मामले दर्ज हैं। पंजवड़ पूर्व सेना प्रमुख जनरल एएस वैद्य की हत्या और लुधियाना में देश की सबसे बड़ी बैंक डकैती के मामले में भी वांछित रह चुका है।
यह भी पढ़ें : Punjab: खालिस्तान कमांडो फोर्स के चीफ परमजीत पंजवड़ की पाकिस्तान में हत्या, गोलियों से भूना गया
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केंद्रीय सहकारी बैंक में काम करता था पंजवड़
खालिस्तान कमांडो फोर्स में शामिल होने से पहले 1986 उसने केंद्रीय सहकारी बैंक में काम किया। 1986 में वह केसीएफ में शामिल हो गया। उसके चचेरे भाई लाभ सिंह का उस पर बड़ा प्रभाव था। 1990 के दशक में लाभ सिंह के खात्मे के बाद केसीएफ का कार्यभार संभालने के तुरंत बाद पंजवड़ पाकिस्तान भाग गया।
हेरोइन तस्करी से धन जुटाकर केसीएफ को रखे था जिंदा
पंजवड़ ने सीमा पार से हेरोइन की तस्करी के माध्यम से धन जुटाकर केसीएफ को जीवित रखा हुआ था। भोला और परगट सिंह नारली जैसे पंजाब के बड़े तस्करों की मदद से फंड लेकर आतंकवाद को जिंदा करने व हथियारों पर खर्च किया है। भारत की खुफिया एजेंसी के मुताबिक, उसकी पत्नी और बच्चों ने खुद को जर्मनी में स्थानांतरित कर लिया था। परमजीत पंजवड़ के खिलाफ 1989 से 1990 तक दस प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिनमें हत्या के सात मामले और टाडा के तहत दो मामले शामिल हैं।
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उस पर देशद्रोह, हत्या, साजिश, हथियारों की तस्करी व आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के मामले दर्ज हैं। पंजवड़ पूर्व सेना प्रमुख जनरल एएस वैद्य की हत्या और लुधियाना में देश की सबसे बड़ी बैंक डकैती के मामले में भी वांछित रह चुका है।
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यह भी पढ़ें : Punjab: खालिस्तान कमांडो फोर्स के चीफ परमजीत पंजवड़ की पाकिस्तान में हत्या, गोलियों से भूना गया
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केंद्रीय सहकारी बैंक में काम करता था पंजवड़
खालिस्तान कमांडो फोर्स में शामिल होने से पहले 1986 उसने केंद्रीय सहकारी बैंक में काम किया। 1986 में वह केसीएफ में शामिल हो गया। उसके चचेरे भाई लाभ सिंह का उस पर बड़ा प्रभाव था। 1990 के दशक में लाभ सिंह के खात्मे के बाद केसीएफ का कार्यभार संभालने के तुरंत बाद पंजवड़ पाकिस्तान भाग गया।
हेरोइन तस्करी से धन जुटाकर केसीएफ को रखे था जिंदा
पंजवड़ ने सीमा पार से हेरोइन की तस्करी के माध्यम से धन जुटाकर केसीएफ को जीवित रखा हुआ था। भोला और परगट सिंह नारली जैसे पंजाब के बड़े तस्करों की मदद से फंड लेकर आतंकवाद को जिंदा करने व हथियारों पर खर्च किया है। भारत की खुफिया एजेंसी के मुताबिक, उसकी पत्नी और बच्चों ने खुद को जर्मनी में स्थानांतरित कर लिया था। परमजीत पंजवड़ के खिलाफ 1989 से 1990 तक दस प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिनमें हत्या के सात मामले और टाडा के तहत दो मामले शामिल हैं।