Chandigarh: देश के खिलाफ साजिश रचने के मामले में आतंकी जगतार सिंह हवारा बरी, चंडीगढ़ अदालत का बड़ा फैसला
सुरक्षा कारणों से हवारा को दिल्ली गई जेल में रखा गया है और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसके इस आपराधिक मामले की सुनवाई चंडीगढ़ में चली। इससे पहले जिला अदालत 22 नवंबर को हवारा को ऐसे ही एक आपराधिक मामले में बरी कर चुकी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में आजीवन उम्रकैद की सजा काट रहे आतंकी जगतार सिंह हवारा को जिला अदालत ने शुक्रवार को देशद्रोह के दूसरे मामले में भी बरी कर दिया। इससे पहले 22 नवंबर को भी हवारा को चंडीगढ़ की जिला अदालत ने देशद्रोह के एक मामले में बरी किया था।
आतंकी जगतार सिंह हवारा के खिलाफ 18 साल पहले सेक्टर-17 पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया था। इसमें उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत न मिल पाने के चलते अदालत ने उसे बरी कर दिया। इससे पहले हवारा को 22 नवंबर को वर्ष 2005 में ही सेक्टर-36 पुलिस थाने में इन्हीं धाराओं में दर्ज केस में बरी किया गया था।
आतंकी हवारा इस समय दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। हवारा और उसके साथियों ने वर्ष 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की बम धमाका कर हत्या कर दी थी। चंडीगढ़ में हवारा के खिलाफ 18 साल पहले देश के खिलाफ षडयंत्र रचने, सेना बनाने व हथियार इकट्ठा करने के दो केस दर्ज किए गए थे। इन दोनों मामलों को पुलिस अदालत में साबित नहीं कर सकी। इस केस में हवारा के अलावा दो और आरोपी थे जिनको कोर्ट ने पहले ही बरी कर दिया था जबकि हवारा के खिलाफ कई साल तक केस का ट्रायल ही नहीं चल सका था।
हवारा के वकील ने कहा- पुलिस ने दर्ज किया था झूठा केस
हवारा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एडवोकेट अमर सिंह चहल ने बहस के दौरान कहा कि हवारा पर पुलिस ने झूठे केस दर्ज किए थे। इस केस में शामिल बाकी आरोपियों को तो वह जानता भी नहीं था। उनसे कभी हवारा की मुलाकात भी नहीं हुई थी। फिर भी पुलिस ने उसे इन केसों में साजिश रचने का आरोपी बना दिया। एडवोकेट चहल ने कहा कि इस केस में पुलिस का जो अहम गवाह था उसकी मौत हो चुकी है।