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मानसिक रूप से कमजोर बच्चों और व्यस्कों की पीड़ा बताते अभिभावकों के छलक पड़े आंसू

Fri, 25 Mar 2022 02:45 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 25 Mar 2022 02:45 AM IST
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Tears spilled by parents telling the suffering of mentally weak children and adults
चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान मानसिक विकलांगता से पीड़ित व्यस्कों की माताएं भावु - फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। मानसिक रूप से कमजोर, बीमार बच्चों और व्यस्कों के अभिभावक उनके लिए काफी समय से प्रशासन से स्पेशल होम की मांग कर रहे हैं। इनका कहना है जब शहर में अनाथालय और वृद्धाश्रम हैं तो स्पेशल होम क्यों नहीं बन सकते। अभिभावक जब अपने मानसिक रूप से कमजोर बच्चों और चाहने वालों की पीड़ा बात रहे थे तो उनकी आंखों में आंसू झलक गए। वह चाह कर भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। उनका कहना है कि जब हम नहीं रहेंगे तो इनका क्या होगा, प्रशासन को इस पर जल्द निर्णय लेना चाहिए। सेक्टर- 27 स्थित प्रेस क्लब में सिटीजंस फॉर इनक्लूसिव लिविंग ने वीरवार को एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इनमें ट्राइसिटी के मानसिक रूप से कमजोर बच्चों व व्यस्कों के अभिभावकों के साथ मनोचिकित्सक भी मौजूद रहे।
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मेघा सूद बोलीं- कल अगर मुझे कुछ हो गया तो इनकी देखभाल कौन करेगा
प्रेसवार्ता में मेघा सूद अपनी पीड़ा बताते हुए आंसुओं को रोक नहीं पाईं। इनके साथ ही मंच पर बैठी अन्य महिला अभिभावकों के आंखों में भी आंसू आ गए। मेघा ने बताया कि उनके घर में उनकी मां और बहन मानसिक रूप से कमजोर हैं, जिनकी पीड़ा वह ही जान सकती हैं। उन्होंने कहा कि जब तक वह हैं इनकी देखभाल कर रही हैं, लेकिन कल को अगर उन्हें कुछ हो गया तो इनकी देखभाल कौन करेगा। उन्होंने बताया कि प्रशासन से बात हुई थी, इसके बाद उन्होंने एक कमेटी बनाने के लिए कहा था। उन्होंने कमेटी तो बना ली, लेकिन इसमें अभिभावकों और मनोचिकित्सकों को शामिल नहीं किया। इस बारे में हम अधिकारियों से मिलना चाहते हैं, लेकिन वह हमसे मिलना भी नहीं चाहते।
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प्रधान नीलू सरीन ने कहा- इंदिरा होली डे होम में की जाए व्यवस्था
सिटीजंस फॉर इनक्लूसिव लिविंग की प्रधान नीलू सरीन ने बताया कि ट्राइसिटी में मानसिक रूप से कमजोर बच्चे और व्यस्कों के लिए स्पेशल होम की मांग जायज है। ट्राइसिटी में 50 से अधिक ऐसे लोग हैं, जिनके अभिभावक मांग कर रहे हैं कि सेक्टर-24 स्थित इंदिरा होली डे होम में स्पेशल होम की व्यवस्था प्रशासन की ओर से की जाए। इसके लिए वह पैसे भी देना चाहते हैं जिससे मानसिक रूप से कमजोरों का कल संवर जाएं।
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