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शर्मनाक! अपने ही विषय में फेल हो गए टीचर, नहीं बता पाए स्पेलिंग
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 15 Jul 2016 11:35 AM IST
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अपने ही विषय में फेल हुए पंजाब के सरकारी टीचर्स
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देश में स्कूली एजूकेशन के हालात कितने बदतर हैं, इसका अंदाजा इस खबर को पढ़कर आप बखूबी लगा सकते हैं। मामला पंजाब का है। यहां के सरकारी स्कूलों में कार्यरत टीचर अपने ही विषय में फेल हो गए। उनका शैक्षणिक ज्ञान देखिए कि न तो स्पेलिंग बता पाए और न ही ग्रामर सही तरीके से लिख पाए। पंजाबी टीचर्स ने पांच लाइनें लिखी और उसमें भी 15 गलतियां।
प्रदेश के शिक्षामंत्री डॉ. दलजीत चीमा ने पूरे पंजाब में दसवीं में खराब नतीजे वाले टीचरों की क्लास ली। जिसमें दोनों सब्जेक्ट के टीचर अपने विषय की चंद लाइनें ठीक से नहीं लिख सके। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ऑडिटोरियम में सभी जिलों से सभी विषयों के सबसे कम पास प्रतिशत वाले पांच-पांच टीचरों को बुलाया गया था। उनके साथ प्रिंसिपल और डीईओ को भी बुलाया गया था। टीचरों को एक पेपर दिया गया।
जिसमें उन्हें प्रश्नपत्र के बारे में विचार, क्या कुछ आउट ऑफ सिलेबस था, टेक्स्ट बुक में कोई कमी है, पिछले तीन सालों का नतीजा क्या था और खराब नतीजे की वजह पूछी गई थी। हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी के टीचरों को अपने विषय में और बाकी टीचरों को किसी भी भाषा में जवाब देने को कहा गया था। टीचर इन पांच प्रश्नों में ही उलझ कर रह गए। बड़ी स्क्रीन पर उनका पेपर चेक करने के बाद डिस्प्ले करने के बाद डॉ. चीमा ने उनसे सवाल किए।
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प्रदेश के शिक्षामंत्री डॉ. दलजीत चीमा ने पूरे पंजाब में दसवीं में खराब नतीजे वाले टीचरों की क्लास ली। जिसमें दोनों सब्जेक्ट के टीचर अपने विषय की चंद लाइनें ठीक से नहीं लिख सके। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ऑडिटोरियम में सभी जिलों से सभी विषयों के सबसे कम पास प्रतिशत वाले पांच-पांच टीचरों को बुलाया गया था। उनके साथ प्रिंसिपल और डीईओ को भी बुलाया गया था। टीचरों को एक पेपर दिया गया।
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जिसमें उन्हें प्रश्नपत्र के बारे में विचार, क्या कुछ आउट ऑफ सिलेबस था, टेक्स्ट बुक में कोई कमी है, पिछले तीन सालों का नतीजा क्या था और खराब नतीजे की वजह पूछी गई थी। हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी के टीचरों को अपने विषय में और बाकी टीचरों को किसी भी भाषा में जवाब देने को कहा गया था। टीचर इन पांच प्रश्नों में ही उलझ कर रह गए। बड़ी स्क्रीन पर उनका पेपर चेक करने के बाद डिस्प्ले करने के बाद डॉ. चीमा ने उनसे सवाल किए।
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स्पेलिंग और ग्रामर सही नहीं लिख पाए अंग्रेजी के टीचर
शिक्षक भर्ती
- फोटो : pti
ढिलवां की एक महिला टीचर के अंग्रेजी में 39 में से 39 बच्चे फेल हो गए थे। जालंधर की एक अन्य महिला टीचर के 32 में से सिर्फ आठ बच्चे पास हुए थे। टीचर इंग्लिश में डिफिकल्ट और सिलेबस तक नहीं ठीक लिख सकीं। उनकी ग्रामर में भी काफी गलतियां थीं।
डॉ. चीमा ने इस बारे में पूछा तो वह बोलीं कि मरे तबीयत ठीक नहीं है। डॉ. चीमा ने कहा कि एमए-बीएड करने के बाद अगर वह अंग्रेजी की चार लाइनें नहीं लिख सकतीं तो बच्चों को कैसे पढ़ाएंगी। बरनाला के एक टीचर के 32 में से 14 बच्चे पास हुए थे। उनकी भी स्पेलिंग और ग्रामर में काफी गलतियां मिलीं।
फरीदकोट की एक महिला टीचर ने एक जवाब में कहा कि पेपर का लेवल दसवीं के हिसाब से नहीं था। दूसरी तरफ कहा कि पेपर सिलेबस में से था। फिरोजपुर के एक टीचर ने दलील दी कि वह मास्टर रिसोर्स पर्सन के तौर पर कहीं और भेज दिए गए थे, इसलिए रिजल्ट खराब रहा।
डॉ. चीमा ने फौरन उन्हें एमआरपी से हटाने केनिर्देश दिए और कहा कि जब उनके पेपर में इतनी गलतियां हैं तो वह टीचरों को कैसे पढ़ाएंगे।
डॉ. चीमा ने इस बारे में पूछा तो वह बोलीं कि मरे तबीयत ठीक नहीं है। डॉ. चीमा ने कहा कि एमए-बीएड करने के बाद अगर वह अंग्रेजी की चार लाइनें नहीं लिख सकतीं तो बच्चों को कैसे पढ़ाएंगी। बरनाला के एक टीचर के 32 में से 14 बच्चे पास हुए थे। उनकी भी स्पेलिंग और ग्रामर में काफी गलतियां मिलीं।
फरीदकोट की एक महिला टीचर ने एक जवाब में कहा कि पेपर का लेवल दसवीं के हिसाब से नहीं था। दूसरी तरफ कहा कि पेपर सिलेबस में से था। फिरोजपुर के एक टीचर ने दलील दी कि वह मास्टर रिसोर्स पर्सन के तौर पर कहीं और भेज दिए गए थे, इसलिए रिजल्ट खराब रहा।
डॉ. चीमा ने फौरन उन्हें एमआरपी से हटाने केनिर्देश दिए और कहा कि जब उनके पेपर में इतनी गलतियां हैं तो वह टीचरों को कैसे पढ़ाएंगे।
पंजाबी टीचरों की पांच लाइन में मिलीं 15 गलतियां
शहरी इलाकों के स्कूलों में डटे सरप्लस शिक्षकों को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
- फोटो : Demo pic
होशियारपुर की एक टीचर की स्पेलिंग से लेकर वाक्य तक गलत मिले। पंजाबी की बारी आई तो पठानकोट की एक टीचर ने पूरे पेपर में कहीं भी बिंदी नहीं लगाई थी। डॉ. चीमा ने हैरान होकर कहा कि पंजाबी के टीचर से इतनी गलतियां कैसे हो सकती हैं। उनकी पांच लाइनों में 15 गलतियां मिलीं।
टीचर की दलील थी कि वहां डोगरी भी चलती है। डॉ. चीमा ने कहा कि भाषा में गलती नहीं हो सकती, चाहे कुछ भी बोलो। बठिंडा की पंजाबी टीचर की एक लाइन में पांच गलतियां मिलीं। फतेहगढ़ साहिब के हिंदी टीचर की भी व्याकरण में गलतियां थीं।
डॉ. चीमा ने एससीईआरटी के डायरेक्टर डॉ. सुखदेव सिंह को निर्देश दिए कि टीचरों की कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए विशेष ट्रेनिंग का खाका दस दिन में तैयार किया जाए। इस कवायद का मकसद किसी को अपमानित करना नहीं, बल्कि नतीजों में सुधार करना है। बैठक का संचालन डीपीआई सेकेंडरी बलबीर सिंह ढोल ने किया।
टीचर की दलील थी कि वहां डोगरी भी चलती है। डॉ. चीमा ने कहा कि भाषा में गलती नहीं हो सकती, चाहे कुछ भी बोलो। बठिंडा की पंजाबी टीचर की एक लाइन में पांच गलतियां मिलीं। फतेहगढ़ साहिब के हिंदी टीचर की भी व्याकरण में गलतियां थीं।
डॉ. चीमा ने एससीईआरटी के डायरेक्टर डॉ. सुखदेव सिंह को निर्देश दिए कि टीचरों की कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए विशेष ट्रेनिंग का खाका दस दिन में तैयार किया जाए। इस कवायद का मकसद किसी को अपमानित करना नहीं, बल्कि नतीजों में सुधार करना है। बैठक का संचालन डीपीआई सेकेंडरी बलबीर सिंह ढोल ने किया।