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पंजाब विस में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पास, नहीं बनने देंगे एसवाईएल
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 18 Mar 2016 06:50 PM IST
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मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल
- फोटो : फाइल फोटो
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पानी केमुद्दे पर पंजाब और हरियाणा में बढ़ते विवाद और सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टेटस-को के आदेश के बाद पंजाब विधानसभा ने एक अहम प्रस्ताव पास किया। जिसमें कहा गया है कि किसी भी कीमत पर एसवाईएल नहीं बनने देंगे। सीएम प्रकाश सिंह बादल ने प्रस्ताव सदन में पेश किया, जिसका विपक्ष ने समर्थन किया।
बादल ने कहा कि नदी जल पर पहरा देने के संबंध में इस सदन में पिछल ेकुछ दिनों से संजीदा विचार-विमर्श हुए हैं। वह एक प्रस्ताव भी लाए, जिसमें कहा गया कि राइपेरियन सिद्धांत का उल्लंघन करके रावी-ब्यास का पानी पंजाब से लेने के लिए एसवाईएल के निर्माण का फैसला जबरन पंजाबियों पर थोपने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सदन ने वह प्रस्ताव सर्व-सम्मति से पास किया था। उसके बाद एसवाईएल की जमीन किसानों को वापस करने को लाया बिल भी सदन ने पास कर दिया। हरियाणा सरकार को एसवाईएल के संबंध में प्राप्त हुई 191.75 करोड़ की राशि भी लौटाई जा चुकी है। वहीं, पंजाब विधानसभा द्वारा बिल पास करने की खबर सुन कर मालिकों ने जमीन का कब्जा भी ले लिया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने स्टेटस-को के आदेश जारी किए हैं।
बादल ने कहा कि इस बात पर सारे सहमत हैं कि पंजाब केपास किसी को देने के लिए एक बूंद अतिरिक्त पानी नहीं है। पंजाब खुद पानी के गंभीर संकट से घिरा है। इसकेमद्देनजर मैं इस सदन में ऐलान करता हऊं कि नदी जल पर पंजाब केहकों पर डट केपहरा दिया जाएगा। राइपेरियन सिद्धांत को दरकिनार कर पंजाब को उसके हक से महरूम करने को किसी भी पक्ष द्वारा किए जाने वाला कोई भी फैसला मंजूर नहीं होगा। इस बारे में पंजाबियों और अकालियों ने बेशुमार कुर्बानियां दी हैं।
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मैं ऐलान करता हूं कि पंजाब के हितों पर डाका मारने वाला किसी भी द्वारा किया कोई फैसला मुझे या अकाली-भाजपा सरकार को मंजूर नहीं होगा। एसवाईएल बनाने की न कोई जरूरत थी, न है, न ही बनानी संभव है और न ही बनने देंगे। पंजाब के हितों की रखवाली के इस मार्ग पर चलते हुए, जो भी सख्त कदम उठाने पड़े, उठाएंगे। सभी पंजाबियों को विश्वास दिलाता हूं कि पानी की रखवाली के लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानी दूंगा। साथ ही पंजाबियों के विनती करता हूं कि गुटबाजी से ऊपर उठ कर पानी की रखवाली के लिए कमर कस लें।
पानी के मसले पर कांग्रेस साथ
सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी ने कहा कि पानी के मसले पर कांग्रेस सरकार के साथ है। यह मसला तब उठा जब केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब के खिलाफ स्टैंड लिया। कांग्रेस ने एसवाईएल की जमीन वापसी का संशोधन किया, सरकार बिल लाई, कांग्रेस ने हिमायत की। पर यह बात माननी पड़ेगी कि उसी दिन बिल पर राज्यपाल की मंजूरी नहीं ली जा सकी। चन्नी ने कहा कि कांग्रेस का स्टैंड साफ है, पानी की एक-एक बूंद बचाएंगे। कांग्रेस साथ चलेगी, सत्ताधारी पीएम नरेंद्र मोदी के घर पर धरना दें।
मदन मोहन मित्तल ने इस पर ऐतराज जताया। साथ ही प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 1982 में हरियाणा का चुनाव जीतने केलिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने पंजाब पर कुल्हाड़ी चलाई थी। इस बीच बादल ने टोका कि बड़ा फैसला लिया गया है, नुक्ताचीनी न करें कि हमने नहर नहीं बनने देनी। इसके बाद प्रस्ताव सर्व-सम्मति से पास कर दिया गया।
क्या है प्रस्ताव
सदन द्वारा पास किए प्रस्ताव में लिखा है कि पंजाब इस समय पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहा है। सूबे केपास अपने दरियाई पानी में से किसी और को देने के लिए एक बूंद पानी नहीं है। इसकेमद्देनजर सतलुज-यमुना लिंक नहर बनाने की न कभी कोई जरूरत थी और न आज है। यह सदन सर्व-सम्मति से फैसला करता है कि एसवाईएल को किसी भी कीमत पर बनने नहीं देंगे।
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बादल ने कहा कि नदी जल पर पहरा देने के संबंध में इस सदन में पिछल ेकुछ दिनों से संजीदा विचार-विमर्श हुए हैं। वह एक प्रस्ताव भी लाए, जिसमें कहा गया कि राइपेरियन सिद्धांत का उल्लंघन करके रावी-ब्यास का पानी पंजाब से लेने के लिए एसवाईएल के निर्माण का फैसला जबरन पंजाबियों पर थोपने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सदन ने वह प्रस्ताव सर्व-सम्मति से पास किया था। उसके बाद एसवाईएल की जमीन किसानों को वापस करने को लाया बिल भी सदन ने पास कर दिया। हरियाणा सरकार को एसवाईएल के संबंध में प्राप्त हुई 191.75 करोड़ की राशि भी लौटाई जा चुकी है। वहीं, पंजाब विधानसभा द्वारा बिल पास करने की खबर सुन कर मालिकों ने जमीन का कब्जा भी ले लिया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने स्टेटस-को के आदेश जारी किए हैं।
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बादल ने कहा कि इस बात पर सारे सहमत हैं कि पंजाब केपास किसी को देने के लिए एक बूंद अतिरिक्त पानी नहीं है। पंजाब खुद पानी के गंभीर संकट से घिरा है। इसकेमद्देनजर मैं इस सदन में ऐलान करता हऊं कि नदी जल पर पंजाब केहकों पर डट केपहरा दिया जाएगा। राइपेरियन सिद्धांत को दरकिनार कर पंजाब को उसके हक से महरूम करने को किसी भी पक्ष द्वारा किए जाने वाला कोई भी फैसला मंजूर नहीं होगा। इस बारे में पंजाबियों और अकालियों ने बेशुमार कुर्बानियां दी हैं।
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मैं ऐलान करता हूं कि पंजाब के हितों पर डाका मारने वाला किसी भी द्वारा किया कोई फैसला मुझे या अकाली-भाजपा सरकार को मंजूर नहीं होगा। एसवाईएल बनाने की न कोई जरूरत थी, न है, न ही बनानी संभव है और न ही बनने देंगे। पंजाब के हितों की रखवाली के इस मार्ग पर चलते हुए, जो भी सख्त कदम उठाने पड़े, उठाएंगे। सभी पंजाबियों को विश्वास दिलाता हूं कि पानी की रखवाली के लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानी दूंगा। साथ ही पंजाबियों के विनती करता हूं कि गुटबाजी से ऊपर उठ कर पानी की रखवाली के लिए कमर कस लें।
पानी के मसले पर कांग्रेस साथ
सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी ने कहा कि पानी के मसले पर कांग्रेस सरकार के साथ है। यह मसला तब उठा जब केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब के खिलाफ स्टैंड लिया। कांग्रेस ने एसवाईएल की जमीन वापसी का संशोधन किया, सरकार बिल लाई, कांग्रेस ने हिमायत की। पर यह बात माननी पड़ेगी कि उसी दिन बिल पर राज्यपाल की मंजूरी नहीं ली जा सकी। चन्नी ने कहा कि कांग्रेस का स्टैंड साफ है, पानी की एक-एक बूंद बचाएंगे। कांग्रेस साथ चलेगी, सत्ताधारी पीएम नरेंद्र मोदी के घर पर धरना दें।
मदन मोहन मित्तल ने इस पर ऐतराज जताया। साथ ही प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 1982 में हरियाणा का चुनाव जीतने केलिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने पंजाब पर कुल्हाड़ी चलाई थी। इस बीच बादल ने टोका कि बड़ा फैसला लिया गया है, नुक्ताचीनी न करें कि हमने नहर नहीं बनने देनी। इसके बाद प्रस्ताव सर्व-सम्मति से पास कर दिया गया।
क्या है प्रस्ताव
सदन द्वारा पास किए प्रस्ताव में लिखा है कि पंजाब इस समय पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहा है। सूबे केपास अपने दरियाई पानी में से किसी और को देने के लिए एक बूंद पानी नहीं है। इसकेमद्देनजर सतलुज-यमुना लिंक नहर बनाने की न कभी कोई जरूरत थी और न आज है। यह सदन सर्व-सम्मति से फैसला करता है कि एसवाईएल को किसी भी कीमत पर बनने नहीं देंगे।