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स्वामी सत्यमित्रानंद ने बताया, आखिर क्यों छोड़ा शंकराचार्य का पद?
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
Updated Sun, 18 Sep 2016 11:49 AM IST
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स्वामी सत्यामित्रानंद का कुरुक्षेत्र दौरा और स्पेशल इंटरव्यू
- फोटो : फाइल फोटो
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शंकराचार्य का पद छोड़ने वाले स्वामी सत्यमित्रानंद बता रहे हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया? रामदेव और योग को लेकर भी काफी कुछ बोले। शंकराचार्य की उपाधि मिलने के बाद उसे छोड़ देने वाले देश के एकमात्र व्यक्ति हैं स्वामी सत्यमित्रा नंद गिरि। वह 1960 में भानपुरा उपपीठ के शंकराचार्य बने थे और 13 वर्षों तक बतौर शंकराचार्य काम किया।
कुरुक्षेत्र में पहली बार बड़े स्तर पर उनका 85वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। तीन दिनों के इस आयोजन में शामिल होने के लिए वे खुद भी कुरुक्षेत्र पहुंचे। यहां स्वामी सत्यमित्रानंद का कहना है कि निशुल्क या बिना श्रम किसी को कुछ भी नही देना चाहिए। यदि कोई दिव्यांग है तो उससे आधा ही सही लेकिन श्रम कराना चाहिए। बिना श्रम के किसी साधु को भी कुछ नहीं मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य होने के नाते सभी लोग उनके पैर छूते थे। लेकिन कुछ रूढ़िवादी लोग कोई दलितों को ऐसा करने से रोक देते थे। कई माएं भी पैर नहीं छू सकती थी। मेरा मानना है कि यदि हम दलितों के घर नहीं जा सकते, और यदि हम वहां नहीं गए तो वे लोग ईसाई हो जाएंगे। ऐसी कुछ बातें उस समय थी। इनके चलते मैंने शंकराचार्य का वह पद छोड़ दिया।
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कुरुक्षेत्र में पहली बार बड़े स्तर पर उनका 85वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। तीन दिनों के इस आयोजन में शामिल होने के लिए वे खुद भी कुरुक्षेत्र पहुंचे। यहां स्वामी सत्यमित्रानंद का कहना है कि निशुल्क या बिना श्रम किसी को कुछ भी नही देना चाहिए। यदि कोई दिव्यांग है तो उससे आधा ही सही लेकिन श्रम कराना चाहिए। बिना श्रम के किसी साधु को भी कुछ नहीं मिलना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि शंकराचार्य होने के नाते सभी लोग उनके पैर छूते थे। लेकिन कुछ रूढ़िवादी लोग कोई दलितों को ऐसा करने से रोक देते थे। कई माएं भी पैर नहीं छू सकती थी। मेरा मानना है कि यदि हम दलितों के घर नहीं जा सकते, और यदि हम वहां नहीं गए तो वे लोग ईसाई हो जाएंगे। ऐसी कुछ बातें उस समय थी। इनके चलते मैंने शंकराचार्य का वह पद छोड़ दिया।
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योग रामदेव का ट्रेडमार्क नहीं है, सभी को करना चाहिए
स्वामी सत्यामित्रानंद का कुरुक्षेत्र दौरा और स्पेशल इंटरव्यू
- फोटो : फाइल फोटो
शनिवार को पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने शंकराचार्य पद छोड़ने के कारण सहित अन्य मुद्दों और पहलुओं पर भी खुलकर बातें की। ब्रह्मसरोवर केपास स्थित जयराम धर्मशाला में शनिवार को दोपहर पत्रकारों से रूबरू पूर्व शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज ने कहा कि योग रामदेव का ट्रेडमार्क नहीं है। न ही किसी धर्म विशेष का है। इसे सभी को करना चाहिए।
कनार्टक और तमिलनाडु के बीच पानी विवाद पर स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज ने कहा कि नदी परमात्मा ने बनाई। इसका पानी न कर्नाटक का न तमिलनाडु का हो सकता है। नहर भी न पंजाब की न हरियाणा की। अपने सुख का थोड़ा त्याग करके दूसरों को भी खुशी देनी चाहिए। गांधी, सावरकर सहित अन्य लोगों ने उस वक्त सिर्फ भारत के लिए काम किया था।
लोगों को भी प्रांतों में नहीं बंटना चाहिए। ऐसा करेंगे तो स्वार्थी माने जाएंगे हम एक ही देश के हैं। स्वामी ने कहा कि कुरुक्षेत्र ऐसी भूमि है जिसे भगवत गीता के कारण पूरा संसार जानता है। गीता जातिगत नहीं है, वैश्विक है, सारे संसार के कल्याण के लिए काम करती है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचाने का काम विश्व में सबसे पहले भगवान कृष्ण ने किया था।
कनार्टक और तमिलनाडु के बीच पानी विवाद पर स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज ने कहा कि नदी परमात्मा ने बनाई। इसका पानी न कर्नाटक का न तमिलनाडु का हो सकता है। नहर भी न पंजाब की न हरियाणा की। अपने सुख का थोड़ा त्याग करके दूसरों को भी खुशी देनी चाहिए। गांधी, सावरकर सहित अन्य लोगों ने उस वक्त सिर्फ भारत के लिए काम किया था।
लोगों को भी प्रांतों में नहीं बंटना चाहिए। ऐसा करेंगे तो स्वार्थी माने जाएंगे हम एक ही देश के हैं। स्वामी ने कहा कि कुरुक्षेत्र ऐसी भूमि है जिसे भगवत गीता के कारण पूरा संसार जानता है। गीता जातिगत नहीं है, वैश्विक है, सारे संसार के कल्याण के लिए काम करती है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचाने का काम विश्व में सबसे पहले भगवान कृष्ण ने किया था।