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सूर्यदेव को दूसरा अर्घ्य देकर खोला व्रत
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Sun, 10 Nov 2013 11:46 AM IST
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सूर्य उपासना के महापर्व पर शनिवार सुबह श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे का निर्जला व्रत पूरा किया। घग्गर नदी सहित शहर के कई हिस्सों में हजारों श्रद्धालु छठ मनाने के लिए अलसुबह तीन बजे से ही पहुंचने लगे थे।
सूर्य की किरण निकलने से एक-दो घंटे पहले ही व्रती जल में घुसे और स्नान करने के बाद हाथ में प्रसाद लेकर सूर्य उगने तक वहीं खड़े रहे। इस तरह दो-तीन घंटे के इंतजार के बाद सूर्य के दर्शन हुए और व्रतियों ने उन्हें प्रसाद, अर्घ्य अर्पित कर अपना व्रत खोला।
ठंड पर भारी पड़ी आस्था
जल में पड़ती सूर्य की पहली किरण की लालिमा और लाइटों से जगमगाते घाट से नजारा देखने ही लायक थी। ठंड थी, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था उससे शक्तिशाली थी।
तभी व्रती तो ठंडे जल में खड़े थे और उनके परिजन नदी के तट पर।
सिंदूर लगाने का चलन भी है खास
सूर्य की पहली किरण निकलते ही घग्गर तट पर हर तरफ से ऊं आदित्याय नम:, ऊं भास्कराय नम:, ऊं दिवाकराय नम: जैसे मंत्र सुनाई देने लगे।
अर्घ्य देने के बाद सुहागिन महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और आंचल में प्रसाद लेकर आशीर्वाद प्राप्त किया। खास बात यह है कि छठ पर्व पर नाक से ऊपर लंबी रेखा की तरह सिंदूर लगाया जाता है।
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सूर्यदेव को सिंदूर पसंद है। इसलिए अर्घ्य देने के बाद सभी सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर एक-दूसरे की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
यहां हुई पूजा
- घग्गर नदी सेक्टर 21
- इंदिरा कालोनी
- राजीव कालोनी
- सेक्टर 19 रेलवे फाटक के पास
-प्राचीन शिव मंदिर के पास
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सूर्य की किरण निकलने से एक-दो घंटे पहले ही व्रती जल में घुसे और स्नान करने के बाद हाथ में प्रसाद लेकर सूर्य उगने तक वहीं खड़े रहे। इस तरह दो-तीन घंटे के इंतजार के बाद सूर्य के दर्शन हुए और व्रतियों ने उन्हें प्रसाद, अर्घ्य अर्पित कर अपना व्रत खोला।
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ठंड पर भारी पड़ी आस्था
जल में पड़ती सूर्य की पहली किरण की लालिमा और लाइटों से जगमगाते घाट से नजारा देखने ही लायक थी। ठंड थी, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था उससे शक्तिशाली थी।
तभी व्रती तो ठंडे जल में खड़े थे और उनके परिजन नदी के तट पर।
सिंदूर लगाने का चलन भी है खास
सूर्य की पहली किरण निकलते ही घग्गर तट पर हर तरफ से ऊं आदित्याय नम:, ऊं भास्कराय नम:, ऊं दिवाकराय नम: जैसे मंत्र सुनाई देने लगे।
अर्घ्य देने के बाद सुहागिन महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और आंचल में प्रसाद लेकर आशीर्वाद प्राप्त किया। खास बात यह है कि छठ पर्व पर नाक से ऊपर लंबी रेखा की तरह सिंदूर लगाया जाता है।
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सूर्यदेव को सिंदूर पसंद है। इसलिए अर्घ्य देने के बाद सभी सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर एक-दूसरे की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
यहां हुई पूजा
- घग्गर नदी सेक्टर 21
- इंदिरा कालोनी
- राजीव कालोनी
- सेक्टर 19 रेलवे फाटक के पास
-प्राचीन शिव मंदिर के पास