फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Survey on Chandigarh School Students Health

स्कूली बच्चों पर सर्वे में हुआ ये सनसनीखेज खुलासा

Tue, 15 Apr 2014 01:49 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 15 Apr 2014 01:49 PM IST
विज्ञापन
Survey on Chandigarh School Students Health
मोटापा सिर्फ बड़ों में नहीं, बल्कि बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है। चंडीगढ़ के स्कूलों में जाने वाले करीब 10 प्रतिशत बच्चे मोटापा के शिकार हैं। यह खुलासा पीजीआई की इंडोक्रिनोलॉजी डिपार्टमेंट की ओर से हाल में 13 स्कूलों में करवाई गई एक स्टडी में हुआ है।
विज्ञापन


स्टडी में चंडीगढ़ के सरकारी व प्राइवेट दोनों ही स्कूलों को शामिल किया गया था। इंडोक्रिनोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख प्रोफेसर अनिल भंसाली ने बताया कि  दस प्रतिशत बच्चे अपने अपनी लंबाई के मुतबिक ओवरवेट पाए गए हैं। उनके मुताबिक सर्वे में करीब साढ़े पांच हजार बच्चों को शामिल किया गया।
विज्ञापन


इनमें 8.3 प्रतिशत ऐसे बच्चे थे, जिनके पेट पर चर्बी थी, जबकि 6.7 प्रतिशत जनरल बच्चों में मोटापा पाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि जिन बच्चों में पेट पर चर्बी थी, उनमें कई डायबिटीज व अन्य बीमारियों का रिस्क फैक्टर ज्यादा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


गेम्स में भाग नहीं लेना भी वजह
डिपार्टमेंट मानता है कि जंक फूड खाने व कोला पीने और आउटडोर गेम्स में भाग नहीं लेने से बच्चों में मोटापा बढ़ा है। बच्चों में मोटापा कम करने के लिए संस्थान की ओर से कुछ एडवाइजरी भी जारी की गई है। इसका खुलासा डा. भंसाली ने रविवार को पीजीआई के भार्गव आडिटोरियम में आयोजित एक सिंपोजियम में किया।

उन्होंने बताया कि स्टडी के दौरान देखा गया कि गेम्स पीरियड में बच्चे हिस्सा नहीं लेते थे। गिनती के ही बच्चे एक्टिव रहते थे। बाकी भिन्न-भिन्न ग्रुप में अपनी अलग तरह की एक्टीविटीज करते रहते थे। उन्होंने स्टडी के दौरान सुझाव भी दिया कि यदि स्कूल टीचर बच्चों को रेगुलर गेम्स में हिस्सा लेने के प्रेरित करे तो काफी हद तक समस्या सुलझ सकती है।

गेस्ट्रोरेंट्रोलॉजी ने साल 2010 में किया था सर्वे
पीजीआई के गेस्ट्रोरेंट्रोलॉजी विभाग ने साल 2010 में स्कूली बच्चों में मोटापा को लेकर सर्वे किया था। सर्वे में बताया गया था कि करीब 15 प्रतिशत बच्चों में मोटापा पाया गया था। गेस्ट्रो विभाग का सैंपल साइज बड़ा था, इसलिए रिजल्ट थोड़े अलग आए थे। यह सर्वे उन्होंने 15000 गर्वमेंट स्कूली बच्चों में किया था। इनका एज ग्रुप पांच साल से 15 साल था।


सर्वे में पता चला कि बच्चों में सबसे ज्यादा मोटापा टीवी देखते वक्त खाना से बढ़ रहा है। इसके अलावा बच्चों के आउटडोर गेम्स के बजाए इनडोर में एक्टिविटीज बढ़ गई है। कार्टून चैनल व कंप्यूटर में उनकी दिलचस्पी बढ़ गई है। इस सर्वे में यह भी पता चला था कि मोटे बच्चों में 40 प्रतिशत बच्चे लीवर की बीमारी से भी ग्रसित थे।

बच्चों को ऐसे बचाएं मोटापा से
1.कोला, कुकीस, केक, कैंडी और चाकलेट से दूर रखे
2. फिजिकल एक्टीविटीज में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करें
3.स्कूल टीचर भी गेम्स पीरियड में सभी बच्चों को खेलने के लिए कहें।
4. स्कूल की कैंटीन में जंक फूड की बजाए हेल्दी फूड रखें
5. स्कूल के टीचर इस बार पर ध्यान दें कि बच्चे टिफिन में क्या ला रहे हैं
6. खाना खाने की अच्छी आदत उनमें डेवलप करे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed