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भारत-पाक में युद्ध हुआ तो न हो नुकसान, इस तैयारी में जुटे किसान
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
Updated Thu, 06 Oct 2016 09:49 AM IST
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पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बॉर्डर से सटे गांवों के हाल
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भारत-पाकिस्तान के बीच कब जंग लग जाए, इसी डर से किसानों ने तैयारी अभी से शुरू कर दी है, ताकि नुकसान न हो। सरहद से करीब एक किलोमीटर दूर बसे सीमांत गांव चांदीवाला में कई किसान कंबाइन के जरिये जल्दबाजी में आधी कच्ची-पक्की धान की फसल काटने में जुटे हैं। किसान भयभीत हैं कि बीएसएफ व सेना के हैवी वाहनों से खेत में लगी धान की फसल नष्ट हो रही है।
कुछ किसान कहते हैं कि पता नहीं कब सेना खेतों में बारूदी सुरंग बिछाने लग जाए। इससे पहले वो अपनी फसल काट लें ताकि आढ़ती से लिया कर्ज आसानी से उतार सकेंगे। कारगिल और सांसद पर हुए हमले के बाद सरहद पर बनी तनावपूर्ण स्थिति के दौरान सेना ने सीमांत गांव के अधिकांश खेतों में बारूदी सुरंग बिछा दी थी, जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था।
सीमांत गांव कमाले वाला, चांदी वाला, मोहर सिंह वाला, भाने वाला के किसानों ने बताया कि बीएसएफ वाले फेंसिंग पार खेतों में सिर्फ उन्हीं किसानों को जाने दे रहे हैं जिन्होंने धान की फसल की कटाई करनी है। कटाई के बाद दोबारा कोई फसल लगाने नहीं दी जा रही है। इसी भय से तार के इधर सटे गांव के किसान जल्दबाजी में अपनी कच्ची-पक्की धान की फसल काटने में लगे हैं ताकि उनके खेतों में सेना बारूदी सुरंग बिछाए तो उन्हें नुकसान न हो।
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कुछ किसान कहते हैं कि पता नहीं कब सेना खेतों में बारूदी सुरंग बिछाने लग जाए। इससे पहले वो अपनी फसल काट लें ताकि आढ़ती से लिया कर्ज आसानी से उतार सकेंगे। कारगिल और सांसद पर हुए हमले के बाद सरहद पर बनी तनावपूर्ण स्थिति के दौरान सेना ने सीमांत गांव के अधिकांश खेतों में बारूदी सुरंग बिछा दी थी, जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था।
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सीमांत गांव कमाले वाला, चांदी वाला, मोहर सिंह वाला, भाने वाला के किसानों ने बताया कि बीएसएफ वाले फेंसिंग पार खेतों में सिर्फ उन्हीं किसानों को जाने दे रहे हैं जिन्होंने धान की फसल की कटाई करनी है। कटाई के बाद दोबारा कोई फसल लगाने नहीं दी जा रही है। इसी भय से तार के इधर सटे गांव के किसान जल्दबाजी में अपनी कच्ची-पक्की धान की फसल काटने में लगे हैं ताकि उनके खेतों में सेना बारूदी सुरंग बिछाए तो उन्हें नुकसान न हो।
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पानी के अभाव में सूख गई गाजर की बिजाई
पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बॉर्डर से सटे गांवों के हाल
गांव कंधू किलचा उताड़ के किसान तरसेम सिंह व सोहन सिंह का कहना है कि कंटीली तार पार खेतों में किसानों ने गाजर की बिजाई की थी वो पानी के अभाव में सूख गई है। बार्डर एरिया से ही गाजर की सबसे अधिक फसल होती है।
बार्डर से लगभग चार किलोमीटर पीछे सीमांत गांव बारेके, हबीब वाला में किसान आलू की फसल लगाने में जुटे हैं। किसान दर्शन सिंह, निछत्तर सिंह से पूछा कि घर छोड़कर सुरक्षित जगह पर क्यों नहीं गए तो उनका जवाब था कि खेत (जमीन) हमारी मां है, इसे छोड़कर कहां जाएंगे।
इसी के आंचल में हम सुरक्षित हैं। रिश्तेदारों और राहत कैंपों में जाएंगे तो हम बर्बाद हो जाते हैं। बार्डर पर कारगिल व सांसद पर हुए हमले के बाद भारत-पाक में तनाव हुआ था, लेकिन युद्ध नहीं। उस समय भी हम लोग बर्बाद हो गए थे। अब तो यहीं जीना और यहीं मरना है।
बार्डर से लगभग चार किलोमीटर पीछे सीमांत गांव बारेके, हबीब वाला में किसान आलू की फसल लगाने में जुटे हैं। किसान दर्शन सिंह, निछत्तर सिंह से पूछा कि घर छोड़कर सुरक्षित जगह पर क्यों नहीं गए तो उनका जवाब था कि खेत (जमीन) हमारी मां है, इसे छोड़कर कहां जाएंगे।
इसी के आंचल में हम सुरक्षित हैं। रिश्तेदारों और राहत कैंपों में जाएंगे तो हम बर्बाद हो जाते हैं। बार्डर पर कारगिल व सांसद पर हुए हमले के बाद भारत-पाक में तनाव हुआ था, लेकिन युद्ध नहीं। उस समय भी हम लोग बर्बाद हो गए थे। अब तो यहीं जीना और यहीं मरना है।