सुप्रीम कोर्ट: पढ़े-लिखे लोग ही लड़ पाएंगे चुनाव
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पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला हरियाणा सरकार के हक में आया है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि राज्य में पढ़े-लिखे लोग ही पंचायत का चुनाव लड़ सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्य सरकार के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिका के संदर्भ में आया है जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। फैसला राज्य सरकार के पक्ष में आया है।
कोर्ट ने राज्य की मनोहर लाल खट्टर सरकार को राहत देते हुए सरकार द्वारा किए गए सभी बदलावों और शर्तों को मान लिया। राज्य सरकार के नए नियमों के मुताबिक, जनरल के लिए दसवीं पास, दलित और महिला के लिए आठवीं पास होना जरूरी है।
इसके अलावा बिजली बिल के बकाया ना होने, बैंक का लोन न चुकाने वाले और गंभीर अपराधों में चार्जशीट होने वाले लोग भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
पहले सितंबर में होने थे चुनाव
गौरतलब है कि हरियाणा में पंचायतों का कार्यकाल 25 जुलाई 2015 को खत्म हो गया था। हरियाणा सरकार ने 11 अगस्त को नियमों में बदलाव कर पंचायत चुनाव में नियमों में बदलाव कर दिया था।
इसमें 4 मुख्य शर्तें जोड़ी गईं। इसके तहत चुनाव लड़ने के लिए दसवीं पास होना जरूरी किया गया, जबकि दलित और महिलाओं के लिए ये आठवीं किया गया।
इसके अलावा घर में टॉयलेट और बिजली बिल बकाया ना होने जैसी शर्तें जोड़ी गई। याचिकाकर्ता प्रीत सिंह ने एक पटीशन के जरिए सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसके चलते सितंबर में होने वाले पंचायत चुनाव टाल दिए गए थे। अब फैसला आने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पटीशन दायर करने वाले याचिकाकर्ता प्रीत सिंह का कहना है कि सरकार ने कोर्ट ने झूठे तथ्य पेश किए हैं। वह बड़ी बेंच में फैसले को चुनौती देंगे।