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Chandigarh News: सुपरवाइजर और आपरेशन मैनेजर 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार
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चंडीगढ़। सेक्टर-17 स्थित इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) में आउटसोर्सिंग सेवा प्रदाता कंपनी वी इंस्पायरर फैसिलिटी प्राइवेट लिमिटेड गुरुग्राम के सुपरवाइजर व आपेरशन मैनेजर को विजिलेंस ने एक दर्जा चार कर्मचारी से 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है।
जानकारी के मुताबिक आईसीसीसी की ओर से आउटसोर्सिंग पर जितने भी कर्मचारी रखे जाते हैं, वे वी इंस्पायरर फैसिलिटी प्राइवेट लिमिटेड के तहत भर्ती किए जाते हैं। इसी कंपनी के माध्यम से शिकायतकर्ता चपरासी के पद नौकरी करता था, जिसे कुछ समय पहले हटा दिया गया था। इस कर्मचारी ने कंपनी के सुपरवाइजर से दोबारा नौकरी पर लगने के लिए बातचीत की। सुपरवाइजर कुलदीप कुमार ने नौकरी पर रखने की एवज में 20 हजार रुपये रिश्वत मांगे। यह भी कहा कि कंपनी के आपरेशन मैनेजर से बात कर नौकरी दिलवा देगा। इसी बीच उस व्यक्ति ने इसकी विजिलेंस को शिकायत दे दी।
तय डील के मुताबिक बुधवार सुबह सुपरवाइजर ने उक्त व्यक्ति को रिश्वत की रकम देने के लिए बुलाया। उसने जैसे ही 10 हजार रुपये सुपरवाइजर को दिए विजिलेंस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद सुपरवाइजर की निशानदेही पर विजिलेंस ने कंपनी के आपरेशन मैनेजर मोहन जांगड़ा को भी सेक्टर-17 स्थित उनके कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस ने सुपरवाइजर व आपरेशन मैनेजर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8 व 12 व आईपीसी 384,120 बी के तहत केस दर्ज कराया है।
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जांच में पता चला है कि ठेके पर कार्यरत जो कर्मचारी रिश्वत की यह रकम अपने वेतन से नहीं दे रहे थे, उन्हें कुछ दिन पहले नौकरी से निकाल दिया गया था। इन पहलुओं की भी जांच की जा रही है। इस मामले में कुछ अन्य लोगों की भूमिका हो सकती है। बताया जा रहा है कि पहले भी आउटसोर्सिंग के तहत कर्मियों को नौकरी पर रखने की एवज में रिश्वत ली गई है।
आईसीसीसी के पास शहर के सीसीटीवी कैमरों का कंट्रोल
आईसीसीसी के पास शहरभर में लगे हजारों सीसीटीवी कैमरों का कंट्रोल करने का कार्य है। इसके अलावा आईसीसीसी के पास यूटी के कई अन्य कार्य भी हैं जिनके लिए गुरुग्राम की कंपनी को आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी रखने के लिए कांट्रैक्ट दिया गया है।
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जानकारी के मुताबिक आईसीसीसी की ओर से आउटसोर्सिंग पर जितने भी कर्मचारी रखे जाते हैं, वे वी इंस्पायरर फैसिलिटी प्राइवेट लिमिटेड के तहत भर्ती किए जाते हैं। इसी कंपनी के माध्यम से शिकायतकर्ता चपरासी के पद नौकरी करता था, जिसे कुछ समय पहले हटा दिया गया था। इस कर्मचारी ने कंपनी के सुपरवाइजर से दोबारा नौकरी पर लगने के लिए बातचीत की। सुपरवाइजर कुलदीप कुमार ने नौकरी पर रखने की एवज में 20 हजार रुपये रिश्वत मांगे। यह भी कहा कि कंपनी के आपरेशन मैनेजर से बात कर नौकरी दिलवा देगा। इसी बीच उस व्यक्ति ने इसकी विजिलेंस को शिकायत दे दी।
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तय डील के मुताबिक बुधवार सुबह सुपरवाइजर ने उक्त व्यक्ति को रिश्वत की रकम देने के लिए बुलाया। उसने जैसे ही 10 हजार रुपये सुपरवाइजर को दिए विजिलेंस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद सुपरवाइजर की निशानदेही पर विजिलेंस ने कंपनी के आपरेशन मैनेजर मोहन जांगड़ा को भी सेक्टर-17 स्थित उनके कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस ने सुपरवाइजर व आपरेशन मैनेजर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8 व 12 व आईपीसी 384,120 बी के तहत केस दर्ज कराया है।
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जांच में पता चला है कि ठेके पर कार्यरत जो कर्मचारी रिश्वत की यह रकम अपने वेतन से नहीं दे रहे थे, उन्हें कुछ दिन पहले नौकरी से निकाल दिया गया था। इन पहलुओं की भी जांच की जा रही है। इस मामले में कुछ अन्य लोगों की भूमिका हो सकती है। बताया जा रहा है कि पहले भी आउटसोर्सिंग के तहत कर्मियों को नौकरी पर रखने की एवज में रिश्वत ली गई है।
आईसीसीसी के पास शहर के सीसीटीवी कैमरों का कंट्रोल
आईसीसीसी के पास शहरभर में लगे हजारों सीसीटीवी कैमरों का कंट्रोल करने का कार्य है। इसके अलावा आईसीसीसी के पास यूटी के कई अन्य कार्य भी हैं जिनके लिए गुरुग्राम की कंपनी को आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी रखने के लिए कांट्रैक्ट दिया गया है।