Punjab: पद्मश्री संत सीचेवाल पर लगे जमीन कब्जाने के आरोप, सुखपाल खैरा ने सीएम मान को लिखा पत्र
सुखपाल खैरा ने आरोप लगाया कि संत सीचेवाल के सुल्तानपुर लोधी के दो गांव जामेवाल में 56 कनाल 7 एकड़ व फतेहवाला में 112 कनाल 14 एकड़ जमीन पर कब्जा कर रखा है। राजस्व विभाग में इस जमीन की मालकियत पंजाब सरकार की है।
विस्तार
अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के अध्यक्ष व भुलत्थ विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने लवली प्रोफेशन यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के चांसलर व आप के राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल के बाद आप के दूसरे राज्यसभा सदस्य पर्यावरणविद् पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल पर एकओंकार चैरिटेबल ट्रस्ट निर्मल कुटिया सीचेवाल के नाम पर जमीन कब्जाने के आरोप जड़े हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि संत सीचेवाल के सुल्तानपुर लोधी के दो गांव जामेवाल में 56 कनाल 7 एकड़ व फतेहवाला में 112 कनाल 14 एकड़ जमीन पर कब्जा कर रखा है। राजस्व विभाग में इस जमीन की मालकियत पंजाब सरकार की है। खैरा ने संत सीचेवाल से इन दोनों गांवों में ट्रस्ट के जरिये अवैध कब्जा करके रखी सरकारी जमीन को छुड़वाने के लिए सीएम भगवंत मान को पत्र लिखा है। इसकी एक प्रति उन्होंने बाकायदा पंचायत मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल को भी प्रेषित की है, साथ ही उन्होंने राजस्व विभाग की प्रतियां भी संलग्न की हैं।
विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने सीएम व पंचायत मंत्री को लिखे पत्र में कहा कि चूंकि ‘आप’ की सरकार पंचायत/प्रांतीय भूमि पर शक्तिशाली राजनेताओं, अधिकारियों और भू-माफियाओं की ओर से अवैध अतिक्रमण से छुटकारा दिलाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। इस पत्र के माध्यम से बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल के स्वामित्व वाले ट्रस्ट की ओर से कपूरथला जिले में इस तरह के अवैध कब्जे का मामला उनके संज्ञान में लाना चाहता हूं।
यह सरकारी भूमि तहसील सुल्तानपुर लोधी के गांव जामेवाल और फतेहवाला के दो गांवों के अधीन हैं। पत्र के साथ लगे 2018-19 राजस्व विभाग की जमा राशि के अनुसार उक्त ट्रस्ट नंबर 4 कब्जाकार हैं, जबकि नंबर 3 मालिक में प्रांतीय सरकार है। आप के सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल के स्वामित्व वाले उक्त ट्रस्ट का गांव जामेवाल में 56 कनाल या 7 एकड़, जबकि गांव फतेहवाला में 112 कनाल या 14 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है।
खैरा ने कहा कि पंचायत मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल अक्सर अवैध अतिक्रमण से छुटकारा पाने के लिए ऐसे गांवों का दौरा करते हैं और इसी तरह आप भी हाल ही में 2828 एकड़ जमीन पर दावा करने के लिए छोटी बद्दी नागल गांव पहुंचे, भले ही आपके दावे विवादित हों लेकिन उक्त सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का यह मामला राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार पूरी तरह से स्पष्ट है।
कब्जाधारियों की ओर से अवैध खेती रिकॉर्ड के बॉक्स नंबर 2 में स्पष्ट रूप से लिखी गई है। यह भी एक तथ्य है कि उक्त ट्रस्ट की ओर से दशकों से इस भूमि का उपयोग कृषि के लिए किया जा रहा है लेकिन ट्रस्ट ने कभी भी संबंधित पंचायतों के पास कोई आय जमा नहीं की, जो उन्हें सरकार का डिफाल्टर बनाती है। खैरा ने कहा कि आपकी पार्टी के राज्यसभा सांसद बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल जैसे शक्तिशाली हस्तियों की ओर से ऐसी भूमि पर अवैध कब्जे का इससे बड़ा मामला नहीं हो सकता।
इन अवैध व्यवसायों से छुटकारा पाने के लिए आपके पास एक उदाहरण स्थापित करने का एक सुनहरा अवसर है, क्योंकि यदि आप अभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते हैं तो यह माना जाएगा कि आपका अभियान आपके विरोधियों जैसे सांसद सिमरनजीत सिंह मान के खिलाफ है और राजनीति से प्रेरित है। उन्हें उम्मीद है कि आप इस मामले में जल्द न्याय करेंगे।
उन्होंने कहा कि वह यह भी बताना चाहते हैं कि उन्होंने (सीएम) सांसद अशोक मित्तल के स्वामित्व वाली एलपीयू के खिलाफ उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की है, जिन्होंने नानक नगर की पंचायत को सहमति दी है, जिसकी ग्राम चहेड़ू की पंचायत भूमि में 39 फीसदी हिस्सेदारी है। चहेरू गांव की 13.25 एकड़ जमीन 100 करोड़ रुपये की अदला-बदली से हड़प ली गई।
एलपीयू की ओर से हस्तांतरण में दी गई भूमि बंजर है और इसकी कीमत केवल 15 लाख रुपये प्रति एकड़ है। उक्त गलत स्थानांतरण को पंचायत मंत्री के हस्ताक्षर से निरस्त किया जा सकता है। अब यह परखने का समय है कि आप अपनी ही पार्टी के शक्तिशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की क्षमता रखती है अथवा नहीं।
राज्यसभा सदस्य पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने माना कि जमीन सरकारी है लेकिन उन्होंने यह तत्कालीन चेयरमैन हरजिंदर सिंह खरीदी है। बाकायदा भुगतान किया गया है। वहीं सरकार को भी दो-तीन किस्त अदा की गई है लेकिन उसके बाद सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करके कब्जाकारों के नाम कर दी। इस भूमि पर गोशाला हैं, गायों के खाने के लिए चारा बीजा जाता है।
वहीं यहां पर पहले कूड़े के ढेर लगते थे, जिन्हें हटाकर उन्होंने कारसेवा के जरिये यहां पौधे लगवाकर हरा-भरा बनाया। सुखपाल खैरा की ओर से सीएम को लिखे पत्र की बात करें तो सीएम मान, पंचायत मंत्री धालीवाल व खुद सुखपाल खैरा आए और यहां का संचालन अपने हाथ में लें, गोशाला की गायों की सेवा करें, उन्हें बेहद खुशी होगी। जब चाहें सरकार इसे अपने संचालन में ले सकती हैं, वह तत्काल यहां से हट जाएंगे।