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सुखना का जलस्तर बढ़ा, निगरानी के लिए एसडीओ तैनात, पंजाब को भेजा अलर्ट

Tue, 15 Jun 2021 02:27 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 02:27 AM IST
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Sukhna's water level increased, SDO deployed for monitoring, alert sent to Punjab
चंडीगढ़। बीते दिनों हुई बारिश की वजह से सुखना लेक के जल स्तर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मानसून के आगमन को देखते हुए यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने कमर कस ली है और अपने विभिन्न अधिकारियों की तैनाती कर दी है। सोमवार को जलस्तर 1156.35 फुट दर्ज किया गया। हालांकि, 1163 फुट पर पहुंचने के बाद सुखना के फ्लड गेट खोलने की नौबत आती है।
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यूटी प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने बताया कि हर साल मानसून से पहले जो तैयारियां की जाती हैं, उन्हें पूरा कर लिया गया है। लेक पर विभाग के कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। इसके अलावा 24 घंटे तीन शिफ्ट में एसडीओ भी तैनात किए गए हैं। बारिश होने के दौरान हर एक घंटे में सुखना के जल स्तर को नोट किया जाएगा और विभाग को सूचित किया जाएगा। सुखना चो के रास्ते में आने वाले अवरोधों को भी हटा दिया गया है। पंजाब को भी उनके इलाके में आने वाले सुखना चो की सफाई के लिए पत्र लिखा गया है। उन्हें अलर्ट भी कर दिया गया है। अगर बारिश ज्यादा हुई और सुखना लेक का जलस्तर 1163 फुट पर पहुंचता है तो फ्लड गेट खोलने पड़ेंगे। इसके लिए पहले से ही तैयारी कर ली गई है और गेट खोलने वाले कर्मियों की नियुक्ति हो गई है। विभागीय अधिकारियों ने झील के बढ़ते जलस्तर को लेकर कर्मचारियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
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पिछले साल खतरे के निशान पर पहुंच गया था पानी, खोलने पड़े थे फ्लड गेट
पिछले वर्ष 24 अगस्त को भारी बारिश की वजह से सुखना लेक में जल स्तर खतरे के निशान पर पहुंच गया था। इसके बाद आनन-फानन में सुखना के फ्लड गेट को खोलने का फैसला लिया गया। इससे दो साल पहले 24 सितंबर 2018 को भी सुखना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया था, जिसके बाद डैम के दोनों गेटों को खोलना पड़ा था। 2018 से 10 साल पहले भी ऐसे ही हालात हुए थे, जिसके बाद लेक के गेट खोलने पड़े थे। बता दें कि अमूमन अगस्त और सितंबर में ही गेट खोलने की अभी तक नौबत आती है। पिछले 30 साल में जब भी लेक का जलस्तर खतरे के निशान के पार जाता है, विभाग को सकेतड़ी के महेंद्र सिंह व उनके साथियों की याद आती है। पिछले कई साल से बिना कोई डिग्री के यह जिम्मेदारी सकेतड़ी के महेंद्र सिंह और उनके साथी निभा रहे हैं। विभाग भी उनके अनुभव को देखते हुए हर साल मानसून सत्र में उन्हें पूरी टीम के साथ आउटसोर्स के जरिए नियुक्त करता है। इसके लिए उन्हें अच्छी खासी रकम भी दी जाती है। हालांकि, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब कुछ कर्मचारियों को इस कार्य के लिए तैयार कर लिया गया है। उन्हें महेंद्र सिंह की देखरेख में ही कार्य कराया जा रहा है।
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