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Hindi News ›   Chandigarh ›   Sukhdev Dhindsa expelled from Akali Dal

अकाली दल में बढ़ रही रार: सुखदेव ढींडसा शिअद से बर्खास्त, बागी नेताओं की बैठक में खुद को बताया था सरपरस्त

Fri, 02 Aug 2024 11:05 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 02 Aug 2024 11:05 AM IST
सार

सुखदेव ढींडसा अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। उन्होंने पहले अकाली दल को छोड़कर अपनी अलग पार्टी बनाई थी लेकिन बाद में वे फिर अकाली दल में लौट आए थे।

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Sukhdev Dhindsa expelled from Akali Dal
सुखदेव ढींडसा - फोटो : अमर उजाला/फाइल

विस्तार

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखदेव सिंह ढींडसा को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया है। ढींडसा ने बुधवार को चंडीगढ़ में हुई बागी गुट के नेताओं की बैठक में खुद को पार्टी का सरपरस्त बताया था। अगले ही दिन शिरोमणि अकाली दल की अनुशासन समिति के चेयरमैन बलविंदर सिंह भूंदड़ ने ढींडसा को पार्टी से बर्खास्त कर दिया।

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इस बीच पंजाब में अब नई सियासी हलचल शुरू हो गई है। जिस कदर महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच शिवसेना को लेकर सियासी हलचल देखने को मिली थी। अब वही परिस्थितियां पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच पनप चुकी हैं। खुद शिअद के वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह भूंदड़ और महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल ने इसका दावा किया है।
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पंजाब में इसे ''ऑपरेशन नागपुर'' नाम दिया गया है। इसके तहत दिल्ली के इशारे पर जल्द ही शिरोमणि अकाली दल के पार्टी कार्यालय और चुनाव चिन्ह ''तकड़ी'' पर बागी गुट के नेता दावा पेश करने को तैयार हैं। इसको लेकर शिअद की अनुशासन समिति के चेयरमैन भूंदड़ और महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल ने खुलासा किया। भूंदड़ ने कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ही ऑपरेशन नागपुर की साजिशें शुरू हो गई थीं। लोकसभा चुनाव से पहले शिअद और भाजपा के दोबारा गठबंधन होने की अटकलों के बीच जब तक यह स्पष्ट नहीं हो गया था कि दोनों दल एकजुट होकर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे, तब तक ऑपरेशन नागपुर की सियासी बिसात को पर्दे के पीछे रखा गया था।

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ऐसे शुरू हुआ ऑपरेशन नागपुर

महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल ने कहा कि एनएसए के तहत डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह का चुनाव लड़ने का फैसला भी इस ऑपरेशन नागपुर का एक मुख्य अंश है। जब तक शिअद और भाजपा के बीच दोबारा गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय सामने नहीं आया था, तब तक खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की मां, खुद अमृतपाल और उनके परिवार से कभी भी लोकसभा चुनाव लड़ने की सावर्जनिक तौर पर हामी नहीं भरी थी, लेकिन शिअद और भाजपा के बीच गठबंधन न होने का जैसे ही फैसला सामने आया, उसी के बाद अमृतपाल सिंह ने चुनाव लड़ने की घोषणा की।

गठबंधन के लिए भाजपा ने रखी थीं ये दो शर्तें

ग्रेवाल ने कहा लोकसभा चुनाव से पहले शिअद और भाजपा के बीच गठबंधन को लेकर जब चर्चा चल रही थी, तब दिल्ली के नेताओं ने शिअद के समक्ष दो शर्ते रखी थीं। पहली शर्त यह कि पंजाब में लोकसभा चुनाव बराबर सीटों पर लड़ा जाएगा। इसके अलावा भाजपा ने शिअद से बंदी सिंहों और किसानों के मुद्दों पर चुप रहने के लिए कहा था। यही कारण है कि शिअद ने गठबंधन के लिए इंकार कर दिया था।

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