पंजाब विधानसभा चुनाव: सुखबीर बादल ने किया एलान, सरकार बनी तो सहयोगी बसपा के कोटे से होगा एक उप-मुख्यमंत्री
इस बार का चुनाव शिअद दो उप-मुख्यमंत्री के फार्मूले पर लड़ रही है। इससे पहले शिअद प्रधान एक उप-मुख्यमंत्री हिंदू बनाए जाने की घोषणा कर चुके हैं।
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दो उपमुख्यमंत्री के फार्मूले को लेकर चुनाव लड़ रहे शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने शनिवार को पंजाब में बड़ा एलान किया है। उन्होंने एलान किया है कि दूसरा उपमुख्यमंत्री उनके सहयोगी दल बसपा के कोटे से बनाया जाएगा। एक उपमुख्यमंत्री हिंदू वर्ग से बनाए जाने की शिअद प्रधान पहले ही घोषणा कर चुके हैं।
2022 के होने वाले चुनावी रण में शिरोमणि अकाली दल पहली बार भाजपा के बिना चुनाव मैदान में उतरेगा। केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के विरोध में शिअद ने अपने 24 साल पुराने राजनीतिक सहयोगी भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया था। जिसके बाद शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी।
गठबंधन के तहत सूबे की 117 विधानसभा सीटों पर शिअद 97 और बसपा 20 सीटों पर प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतार रही है। सुखबीर सिंह बादल बसपा के साथ गठबंधन कर राज्य के अनुसूचित वर्ग के वोट को साधने की कोशिश की है। इस चुनाव में शिअद ने एक हिंदू और दूसरा एससी वर्ग से उपमुख्यमंत्री बनाने की घोषणा कर दी है।
सुखबीर बादल ने तय किया है कि एक उपमुख्यमंत्री बसपा के कोटे से तय किया जाएगा। सुखबीर ने कहा है कि पंजाब में यदि गठबंधन की सरकार बनती है तो एक उपमुख्यमंत्री बसपा के कोटे से बनाया जाएगा। सुखबीर ने कहा है कि यह चेहरा कौन होगा इसका फैसला बसपा तय करेगी।
कांग्रेस भी इसी फार्मूले पर लड़ रही चुनाव
कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद कांग्रेस भी शिअद के फार्मूले पर ही चुनाव लड़ रही है। मुख्यमंत्री के साथ कांग्रेस आलाकमान ने दो उपमुख्यमंत्री लगाए हैं। राजनीतिक दल इस फार्मूले से पंजाब के जातीय समीकरण को साधने का काम कर रहे हैं।
ये है पंजाब का जातीय समीकरण
पंजाब में सबसे अधिक हिंदू वोटरों की संख्या है। सूबे में हिंदू वोटर 38.49 वोट प्रतिशत के साथ सबसे अधिक हैं। इसके बाद 31.94 प्रतिशत के साथ अनुसूचित जाति वर्ग के वोटर दूसरे नंबर पर और जट सिख 19 प्रतिशत वोट प्रतिशत के साथ तीसरे नंबर पर हैं। 10.57 प्रतिशत अन्य वर्ग हैं।
शिअद के एससी नेताओं में रोष
सुखबीर सिंह बादल के इस फैसले से पार्टी के एससी नेताओं को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कुछ एससी नेताओं में विरोध के स्वर उठने शुरू हो गए हैं। पार्टी प्लेटफार्म पर उन्होंने भले ही अपनी बात अभी नहीं रखी है लेकिन विरोध के स्वर उठने शुरू हो गए हैं।