Punjab: हाईकोर्ट में जांच अधिकारी को बुलाने की प्रथा समाप्त हो, एजी ने डीजीपी को लिखा पत्र, बताया ये कारण
बड़ी संख्या में नियमित जमानत याचिकाएं, अग्रिम जमानत याचिकाएं, केस खारिज करने वाली याचिकाएं और संबंधित मामले हर दिन हाईकोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध होते हैं। ऐसे मामलों के तथ्यों के बारे में कानून अधिकारियों की सहायता के लिए बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी पंजाब के विभिन्न हिस्सों से हाईकोर्ट में आते हैं।
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पंजाब के एडवोकेट जनरल ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आपराधिक मामलों में जांच अधिकारियों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पेश होने की प्रथा पर रोक लगाने के लिए डीजीपी को पत्र लिखा है। इसके लिए एजी कार्यालय ने एक नया तंत्र भी विकसित किया है। इस कदम से हाईकोर्ट में अनावश्यक भीड़ को कम करने में भी सहायता मिलेगी। पंजाब के एजी विनोद घई ने 26 अगस्त को पंजाब के डीजीपी गौरव यादव को नई व्यवस्था लागू करने के लिए पत्र भेजा था।
बड़ी संख्या में नियमित जमानत याचिकाएं, अग्रिम जमानत याचिकाएं, केस खारिज करने वाली याचिकाएं और संबंधित मामले हर दिन हाईकोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध होते हैं। ऐसे मामलों के तथ्यों के बारे में कानून अधिकारियों की सहायता के लिए बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी पंजाब के विभिन्न हिस्सों से हाईकोर्ट में आते हैं। लंबी दूरी की यात्रा करने से न उनको केवल असुविधा होती है बल्कि हाईकोर्ट में कोर्ट रूम व बाहर गलियारों में भी भीड़ होती है।
24 अगस्त को हाईकोर्ट द्वारा परमजीत सिंह उर्फ पम्मा बनाम पंजाब राज्य नामक एक मामले में कहा गया था कि जो पुलिस अधिकारी मौजूद हैं उनके पास बड़ी फाइलें हैं, लेकिन फिर भी वो कानून अधिकारियों की सहायता करने में असमर्थ हैं।
दो दिन पहले भरना होगा प्रोफार्मा
एजी के अनुसार, जांच अधिकारी को उस प्रोफार्मा को हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख से कम से कम दो दिन पहले भरना होगा। संबंधित दस्तावेजों के साथ भरे हुए प्रोफार्मा प्रत्येक जिले के लिए नियुक्त पैरवी अधिकारियों को ईमेल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक मोड के माध्यम से भेजे जाने चाहिए और ऐसे पैरवी अधिकारी फिर एक प्रिंट आउट लेंगे और उसे एजी कार्यालय में अधिकारियों को सौंप देंगे। यह न केवल न्याय के बेहतर प्रशासन में मदद करेगा, क्योंकि पुलिस अधिकारी हाई कोर्ट की यात्रा करने में अपना समय और ऊर्जा बर्बाद नहीं करेंगे बल्कि कानून अधिकारियों को मामलों के बारे में पहले से जानकारी प्राप्त करने में भी मदद करेंगे। इससे हाई कोर्ट को बेहतर सहायता मिलेगी।