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पीजीआई में पहली बार हृदय की सफल रोबोटिक सर्जरी
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चंडीगढ़। पीजीआई में पहली बार हृदय के मरीज की सफल रोबोटिक सर्जरी की गई। पीजीआई के एडवांस कार्डियक सेंटर के प्रमुख प्रोफेसर यशपाल शर्मा का दावा है कि पीजीआई देश का पहला केंद्र है, जहां रोबोट असिस्टेड पीसीआई की गई है। बताया कि इस सर्जरी से मरीज को जहां बेहतर इलाज मिलेगा, वहीं डॉक्टरों पर विकिरण के दुष्प्रभाव का खतरा भी बेहद कम हो गया है।
प्रोफेसर यशपाल ने बताया कि रोबोटिक पीसीआई का प्रशिक्षण पहले भी किया जा चुका है लेकिन इस तकनीक से पहली बार 47 वर्ष के एक कोरोनरी संबंधी हृदय रोगी की सर्जरी की गई है। उन्होंने बताया कि रोबोटिक पीसीआई सर्जरी में उच्च स्तर के चिकित्सकीय परिणाम के साथ ही कैथ लैब में विकिरण के दुष्प्रभाव का खतरा भी बेहद कम हो जाता है। वहीं, इस सर्जरी में प्रयोग किए गए बायो ऑब्जर्वल स्टेंट भी 2 से 3 साल के अंदर मरीज के शरीर में पूरी तरह घुल जाता है। उन्होंने बताया कि यह सर्जरी कोरोनरी सिंड्रोम वाले मरीजों में मृत्यु दर को कम करने में मील का पत्थर साबित होगी।
बॉक्स
अब तक ऐसे होती थी सर्जरी
प्रोफेसर यशपाल ने बताया कि कोरोनरी सिंड्रोम से ग्रस्त मरीजों की सर्जरी करने के लिए कैथ लैब में जाकर डॉक्टर को सर्जरी करनी पढ़ती थी। इसके कारण कैथ लैब में डॉक्टरों और मरीज को घंटों एक्स रे से निकलने वाले विकिरण के संपर्क में रहना पड़ता था लेकिन रोबोटिक तकनीक के कारण अब इस स्थिति से बचा जा सकता है। इसमें सिर्फ मरीज का कैथ लैब के अंदर रहना जरूरी है। डॉक्टर कैथ लैब के बाहर से कंप्यूटर और रोबोटिक तकनीक के जरिए सर्जरी कर सकते हैं।
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प्रोफेसर यशपाल ने बताया कि रोबोटिक पीसीआई का प्रशिक्षण पहले भी किया जा चुका है लेकिन इस तकनीक से पहली बार 47 वर्ष के एक कोरोनरी संबंधी हृदय रोगी की सर्जरी की गई है। उन्होंने बताया कि रोबोटिक पीसीआई सर्जरी में उच्च स्तर के चिकित्सकीय परिणाम के साथ ही कैथ लैब में विकिरण के दुष्प्रभाव का खतरा भी बेहद कम हो जाता है। वहीं, इस सर्जरी में प्रयोग किए गए बायो ऑब्जर्वल स्टेंट भी 2 से 3 साल के अंदर मरीज के शरीर में पूरी तरह घुल जाता है। उन्होंने बताया कि यह सर्जरी कोरोनरी सिंड्रोम वाले मरीजों में मृत्यु दर को कम करने में मील का पत्थर साबित होगी।
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अब तक ऐसे होती थी सर्जरी
प्रोफेसर यशपाल ने बताया कि कोरोनरी सिंड्रोम से ग्रस्त मरीजों की सर्जरी करने के लिए कैथ लैब में जाकर डॉक्टर को सर्जरी करनी पढ़ती थी। इसके कारण कैथ लैब में डॉक्टरों और मरीज को घंटों एक्स रे से निकलने वाले विकिरण के संपर्क में रहना पड़ता था लेकिन रोबोटिक तकनीक के कारण अब इस स्थिति से बचा जा सकता है। इसमें सिर्फ मरीज का कैथ लैब के अंदर रहना जरूरी है। डॉक्टर कैथ लैब के बाहर से कंप्यूटर और रोबोटिक तकनीक के जरिए सर्जरी कर सकते हैं।
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