पंजाब में नहीं थम रहा पराली जलाने का सिलसिला, सरकार का दावा- 60 फीसदी मामले घटे
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किसानों को धान की पराली न जलाने के प्रति जागरूक करने के पंजाब सरकार के सभी प्रयास बेअसर होते दिखाई दे रहे हैं। खेतों में पराली जलाने के मामले में इतनी अधिक बढ़ोतरी हुई है कि राज्य के हाईवे और लिंक सड़कें धुंए में गुम होकर रह गई हैं। प्रदेश का दमघोटू वातावरण आने वाले समय में प्रदेशवासियों को ही खतरनाक बीमारियों की चपेट में ले सकता है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में इस साल 23 सितंबर से 27 अक्तूबर के बीच धान की पराली जलाने के 12,027 मामले रिकॉर्ड किए गए हैं, जो पिछले साल इसी अवधि के दौरान पराली जलाने की घटनाओं से 2,427 ज्यादा हैं। हालांकि हरियाणा में भी पराली जलाने की घटनाओं में कमी नहीं आई है और इस साल 3,705 पराली जलाने के मामले रिकॉर्ड किए गए, जो पिछले साल भी इस अवधि में 3,705 दर्ज हुए थे।
अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे नई फसल बोने का समय नजदीक आता जा रहा है, किसान खेतों को तैयार करने की जल्दी में पराली को अंधाधुंध तरीके से जलाने लगे हैं। पंजाब सरकार ने राज्य के सभी जिलों में एक-एक आईएएस अधिकारी को नोडल अफसर के रूप में तैनात किया है, जिन्हें पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के काम की देखरेख करनी है।
इसके अलावा सूबे में किसानों को जागरूक करने का जिम्मा तंदरुस्त पंजाब मिशन के तहत भी चलाया जा रहा है। धान की कटाई के शुरुआती दौर में यह महसूस किया जा रहा था कि किसानों ने पराली जलाना छोड़ दिया है लेकिन जैसे-जैसे नई फसल की बुआई नजदीक आ रही है, खेतों में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी आ गई है।
पंजाब सरकार का दावा- पराली जलाने के मामलों में आई कमी
पंजाब के कृषि सचिव काहन सिंह पन्नू का दावा है कि राज्य में किसानों द्वारा धान की पराली जलाने के मामलों में लगातार कमी आ रही है। वर्ष 2016 में 1 अक्तूबर से 10 अक्तूबर तक जहां पराली को आग लगाने के 3715 मामले सामने आए थे, वह इस साल इसी अवधि में केवल 700 रह गए हैं।
उनका कहना है कि ओवरआल पंजाब के 60 फीसदी किसानों ने अब पराली जलाना छोड़ दिया है और हैपी सीडर जैसी नवीन तकनीक के जरिए खेतों में पराली का निष्पादन किया जा रहा है।
दूसरी ओर, गैर सरकारी आंकड़े दावा कर रहे हैं कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 25 फीसदी वृद्धि हुई है। राज्य सरकार ने कई सख्त कदम भी उठाए हैं और कई किसानों के खिलाफ केस भी दर्ज किए गए हैं। बीते 24 घंटों के दौरान मोगा में 14 किसानों पर जुर्माना लगाया गया। बावजूद इसके पराली जलाने की घटनाओं में कमी नहीं आई है।
Punjab: Stubble burning continues in parts of the state, visuals from Ludhiana. pic.twitter.com/qvLUDUWYlX
— ANI (@ANI) October 30, 2019
कृषि सचिव का कहना है कि पराली के निष्पादन के लिए किसानों की ओर से कृषि विभाग को 24000 हैपी सीडर मशीनों के लिए आवेदन मिले हैं, जिनमें से 15000 मशीनें दे दी गई हैं और बाकी भी जल्दी ही मुहैया करा दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि यह मशीनें सब्सिडी पर मुहैया कराई जा रही हैं। किसानों के समूहों को यह मशीनें 80 फीसदी और निजी किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी पर मशीनें दी जा रही हैं।
दिल्ली में पंजाब के कारण हवा खराब नहीं: बाजवा
पंजाब के पंचायत मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा का कहना है कि यह सही नहीं है कि पंजाब में पराली जलने से दिल्ली की हवा खराब हो रही है। अगर पंजाब में पराली जलाने से दिल्ली की हवा खराब होती तो हरियाणा पर भी इसका असर दिखता। फिर भी, पंजाब सरकार राज्य के किसानों को जागरूक कर रही है कि वे पराली न जलाएं। पंजाब सरकार जल्दी ही पराली ना जलाने का पक्का समाधान निकाल लेगी और एक दो साल में ये समस्या बिल्कुल ही खत्म हो जाएगी।
दिल्ली सरकार अपने आरोप पर कायम
दिल्ली सरकार अपने इस आरोप पर कायम है कि पंजाब में पराली जलाने के कारण देश की राजधानी में प्रदूषण बढ़ा है। बुधवार को दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रबंधन की सैटेलाइट से जारी तस्वीरों का हवाला देते हुए दावा किया कि बीते 24 घंटे के दौरान हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में इजाफा हुआ है। सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, पंजाब-हरियाणा में सोमवार को 1654 जगहों पर पराली जलती दिखाई दी जबकि मंगलवार को यह संख्या 2577 तक पहुंच गई।
तरनतारन जिले में सबसे ज्यादा जली पराली
पंजाब पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, पंजाब में बीते सप्ताह तरनतारन जिला पराली जलाने के मामले में सबसे आगे रहा और इस जिले में 705 मामले सामने आए। वहीं पराली जलाने के 500 मामलों के साथ अमृतसर दूसरे स्थान पर था जबकि 431 मामलों के साथ पटियाला जिला तीसरे स्थान पर था।
पंजाब के कृषि सचिव काहन सिंह पन्नू का कहना है कि उन्होंने एनजीटी के समक्ष यह आंकड़े पेश किए हैं, जिसके अनुसार पंजाब के 22 में से 14 जिलों में पराली जलाने के मामलों में 50 फीसदी तक कमी आ चुकी है। उन्होंने बताया कि केवल आठ जिलों- अमृतसर, लुधियाना, बरनाला, पटियाला, तरनतारन में सरकार को जागरुकता अभियान और तेज करना पड़ रहा है।