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Punjab: बर्खास्त एआईजी को भगोड़ा घोषित करवाने के लिए STF पहुंची कोर्ट, राजजीत भी पहुंचे अदालत
Sun, 04 Jun 2023 09:25 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 04 Jun 2023 09:25 AM IST
सार
एसटीएफ की ओर से दर्ज एफआईआर में लिखा है कि जेल में बंद बर्खास्त इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह के माध्यम से राजजीत यह सारा काम करता था। एसआईटी की रिपोर्ट में भी इसमें विस्तार से दोनों की भूमिका के बारे में बताया गया है कि कैसे वह अपना शिकार चुनते थे।
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राजजीत सिंह
- फोटो : फाइल
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विस्तार
करोड़ों रुपये के नशा तस्करी, भ्रष्टाचार व जबरन वसूली से जुड़े मामले का सामना कर रहे पंजाब के बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब इस मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक याचिका मोहाली अदालत में दायर कर आरोपी को भगोड़ा घोषित करवाने की दिशा में कदम बढ़ाया। जबकि राजजीत सिंह भी अपने वकील के माध्यम से अदालत में पहुंच गए। उन्होंने अपने खिलाफ जारी हुए अरेस्ट वारंट वापस लिए जाने की मांग की है। अदालत ने दोनों मामले की अगली सुनवाई पांच जून निश्चित की है। ऐसे में उम्मीद है कि आरोपी अधिकारी आने वाले दिनों में सरेंडर या गिरफ्तारी तक दे सकते हैं।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से गठित एसआईटी की तीनों जांच रिपोर्ट के आधार पर एसटीएफ ने इंस्पेक्टर इंद्रप्रीत सिंह व बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह के खिलाफ मार्च महीने में केस दर्ज किया था। साथ ही एआईजी को उसी समय में बर्खास्त कर दिया था। उसी दिन से एआईजी फरार चल रहा था।
यह भी पढ़ें : Wrestlers Protest: मैं तो परेशान हो लिया, घर भी नहीं आ पा रहा हूं... नाबालिग के पिता ने बयां किया अपना दर्द
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हालांकि एसटीएफ ने उसे काबू करने के लिए करीब 500 जगह पर छापे मारे, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग पाया है। इसके बाद उस पर भ्रष्टाचार और जबरन वसूली संबंधी दो केस नए दर्ज हुए। इस बीच अब उसने अदालत की शरण ली है। हालांकि पुलिस के सीनियर अधिकारी पहले ही दावा कर चुके है कि जल्दी ही आरोपी को काबू कर लिया जाएगा। इससे पहले उसने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में खुद को बर्खास्त किए जाने को चुनौती थी। हालांकि अदालत ने इस केस का निपटारा कर दिया। साथ ही उन्हें दस्तावेज सौंप दिए थे।
इस आधार पर दर्ज की है एफआईआर
एसटीएफ की ओर से दर्ज एफआईआर में लिखा है कि जेल में बंद बर्खास्त इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह के माध्यम से राजजीत यह सारा काम करता था। एसआईटी की रिपोर्ट में भी इसमें विस्तार से दोनों की भूमिका के बारे में बताया गया है कि कैसे वह अपना शिकार चुनते थे। इसके बाद लोगों को किस तरह परेशान कर जबरन वसूली करते थे। वहीं, यह बात साफ हो गई है कि मामले में राजजीत का बचना मुश्किल हो गया है। सूत्रों के अनुसार हो सकता है कि राजजीत सिंह विदेश चला गया हो।
अब केंद्रीय एजेंसियां भी केस की जांच में जुटी
नशा तस्करी से जुड़े मामले की जांच में विजिलेंस ब्यूरो, एसएटीएफ के बाद अब ईडी की भी एंट्री हो चुकी है। इडी की तरफ से कुछ दिन पहले ही विजिलेंस को एक पत्र लिखा था। साथ ही मांग की थी कि बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह पर दर्ज किए गए केस से जुड़ा रिकॉर्ड उन्हें मुहैया करवाया जाए। इसमें उन पर दर्ज एफआई आर की कॉपी, उनकी चल अचल संपत्ति का ब्योरा और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दर्ज तीनों एफआईआर का विवरण मांगा है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से गठित एसआईटी की तीनों जांच रिपोर्ट के आधार पर एसटीएफ ने इंस्पेक्टर इंद्रप्रीत सिंह व बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह के खिलाफ मार्च महीने में केस दर्ज किया था। साथ ही एआईजी को उसी समय में बर्खास्त कर दिया था। उसी दिन से एआईजी फरार चल रहा था।
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हालांकि एसटीएफ ने उसे काबू करने के लिए करीब 500 जगह पर छापे मारे, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग पाया है। इसके बाद उस पर भ्रष्टाचार और जबरन वसूली संबंधी दो केस नए दर्ज हुए। इस बीच अब उसने अदालत की शरण ली है। हालांकि पुलिस के सीनियर अधिकारी पहले ही दावा कर चुके है कि जल्दी ही आरोपी को काबू कर लिया जाएगा। इससे पहले उसने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में खुद को बर्खास्त किए जाने को चुनौती थी। हालांकि अदालत ने इस केस का निपटारा कर दिया। साथ ही उन्हें दस्तावेज सौंप दिए थे।
इस आधार पर दर्ज की है एफआईआर
एसटीएफ की ओर से दर्ज एफआईआर में लिखा है कि जेल में बंद बर्खास्त इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह के माध्यम से राजजीत यह सारा काम करता था। एसआईटी की रिपोर्ट में भी इसमें विस्तार से दोनों की भूमिका के बारे में बताया गया है कि कैसे वह अपना शिकार चुनते थे। इसके बाद लोगों को किस तरह परेशान कर जबरन वसूली करते थे। वहीं, यह बात साफ हो गई है कि मामले में राजजीत का बचना मुश्किल हो गया है। सूत्रों के अनुसार हो सकता है कि राजजीत सिंह विदेश चला गया हो।
अब केंद्रीय एजेंसियां भी केस की जांच में जुटी
नशा तस्करी से जुड़े मामले की जांच में विजिलेंस ब्यूरो, एसएटीएफ के बाद अब ईडी की भी एंट्री हो चुकी है। इडी की तरफ से कुछ दिन पहले ही विजिलेंस को एक पत्र लिखा था। साथ ही मांग की थी कि बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह पर दर्ज किए गए केस से जुड़ा रिकॉर्ड उन्हें मुहैया करवाया जाए। इसमें उन पर दर्ज एफआई आर की कॉपी, उनकी चल अचल संपत्ति का ब्योरा और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दर्ज तीनों एफआईआर का विवरण मांगा है।