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फोर्टिस अस्पताल में स्टेट लेवल एथलीट की मौत, 30 घंटे बाद शव सौंपा, हंगामा

Thu, 17 Nov 2016 12:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली Updated Thu, 17 Nov 2016 12:54 AM IST
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state-level athlete death in Fortis hospital, Charged with negligent treatment
30 घंटे बाद पीड़ित परिजनों को सौंपा शव - फोटो : अमर उजाला
15 वर्षीय स्टेट लेवल लॉन्ग जंप खिलाड़ी की इलाज के दौरान फोर्टिस अस्पताल में मौत हो गई। उसके परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया, उन्होंने आरोप लगाया कि सवा लाख रुपये नहीं जमा करने के कारण अस्पताल प्रबंधन ने 30 घंटे तक बेटी का शव नहीं दिया।
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इस दौरान शिरोमणि अकाली दल (मान) ग्रुप के सदस्य भी फोर्टिज पहुंच गए। उन्होंने परिजनों के संग अस्पताल के बाहर के बाहर प्रदर्शन किया। हंगामे की सूचना पर डीएसपी गगनदीप सिंह भुल्लर और थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। डीएसपी ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने का प्रयास किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और प्लेयर के परिजनों का अस्पताल प्रबंधन से कई बार झड़प हुई। 
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फतेहगढ़ साहिब के गांव डुबाली निवासी मृतका एथलीट जसप्रीत कौर के पिता कुलदीप सिंह ने कहा कि पीलिया की शिकायत पर 8 नवंबर को बेटी जसप्रीत कौर को फोर्टिस में भर्ती करवाया था। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर तक उनकी बेटी एकदम ठीक थी। 14 नवंबर को उन्हें बताया गया है कि उनकी बेटी की स्थिति नाजुक है और उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ेगा। इसके बाद रात को करीब नौ बजे वह अपनी बेटी से मिले थे। 15 नवंबर को तड़के उन्हें सूचना मिली की उनकी बेटी लगभग 99  प्रतिशत डेड हो चुकी है। यह सुनते ही वह सकते में आ गए। इसके बाद उनके परिवार के सदस्य व रिश्तेदार अस्पताल पहुंचे। अस्पताल उन्हें शव देने के लिए सवा लाख रुपये की डिमांड करने लगा।
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आरोप- शव देने से पहले अस्पताल प्रबंधन मांग रहा सवा लाख रुपये

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लापरवाही से इलाज का आरोप - फोटो : अमर उजाला
कुलदीप सिंह ने बताया कि करीब पांच लाख रुपये वह इलाज के लिए पहले ही अस्पताल प्रबंधन को दे चुके थे। पीड़ित पिता ने कहा कि 16 नवंबर को सुबह तक शव नहीं दिए जाने के कारण उन्हें फोर्टिज अस्पताल के गेट पर धरने पर बैठना पड़ा। वहीं, शिरोमणि अकाली दल (सिमरजीत सिंह मान) के प्रदेशाध्यक्ष एवं ट्राइसिटी प्रमुख गोपाल सिंह ने आरोप लगाया कि शव सौंपे जाने से पहले मेडिकल रिपोर्ट मांगे जाने पर अस्पताल के डायरेक्टर ने रिपोर्ट देने के एवज में 60 रुपये प्रति पेज चार्ज किया।

एडवोकेट सिमरनजीत सिंह ने कहा कि अस्पताल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाई हैं। अस्पतालों में इस तरह की घटनाएं ना हों, इसलिए वह जनहित याचिका दायर करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन है कि पैसों  की वजह से अस्पतालों में शव देने से इंकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वीरवार को अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

फोर्टिस अस्पताल ने आरोपों को नकारा
फोर्टिस अस्पताल के प्रवक्ता ने विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि जसप्रीत के इलाज में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है। उसे श्रेष्ठ मेडिकल सेवाएं दी गईं थीं। साथ ही कहा गया कि जसप्रीत की मौत 15 नवंबर को सुबह छह बजे नहीं, बल्कि दोपहर एक बजकर 55 मिनट पर हुई। साथ ही यह भी बताया गया है कि एथलीट जसप्रीत पीलिया नहीं था, बल्कि जहरीली वस्तु खाने की वजह से उसे अस्पताल में दाखिल कराया गया था।
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