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Chandigarh News: बेटे की याद में शुरू की साइक्लिंग, अब बन गया जुनून
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चंडीगढ़। गाड़ी होने के बावजूद शहर में कई ऐसे लोग भी है जिन्हाेंने साइकिल चलाने और पर्यावरण संरक्षण करने का लक्ष्य बना लिया है। साइकिल डे पर शहर के इन हीरो ने अपनी साइकिल चलाने की यात्रा के बारे में बताया। 50 से अधिक उम्र होने के बावजूद साइकिल चलाना इनका जुनून है।
सेक्टर-40 निवासी लेक्चरर अनूप किरण (59) ने बताया कि उनका 19 साल का बेटा माउंटेन साइक्लिस्ट था। मई 2007 में एक हादसे में वह चल बसा। उन्होंने बताया कि 18 सितंबर को उसके जन्मदिन पर उसकी याद में पहली राइड मनसा देवी मंदिर के लिए की। इसके बाद यह सिलसिला थमा नहीं बल्कि जुनून बन गया। दोनों घुटने बदलने और हर्निया ऑपरेशन होने के बावजूद फिटनेस के लिए वह रोज कम से कम 30 किलोमीटर साइक्लिंग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वीकेंड पर 100-150 किलोमीटर भी साइक्लिंग करती हैं।
रोज 100 किलोमीटर चलाता हूं साइकिल ताकि युवा हों प्रेरित
स्वास्थ्य के लिए साइकिल चलाना शुरू किया था पर फिर समाज के लिए कुछ करने की ठानी। अब ज्यादा से ज्यादा युवाओं को साइकिल पर लाना मकसद है। साइकिल पर मैसेज लिखा है और ट्राइसिटी ही नहीं हरियाणा, हिमाचल और पंजाब के कई शहरों के स्कूलों में जाकर बच्चों को साइक्लिंग के लिए जागरूक कर रहा हूं। अधिकतर काम साइकिल पर जाकर ही कर आता हूं। गाड़ी महीनों तक घर पर ही खड़ी रहती है। - रूपेश कुमार बाली (52), जीरकपुर निवासी
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साइकिल जिंदगी का हिस्सा, बच्चों को नशे से बचाना मकसद
जब मैं छठी क्लास में था तो साइक्लिंग शुरू की थी। उसके बाद तो जैसे यह जिंदगी का हिस्सा ही बन गई। 37 साल से क्रिकेट अकादमी चला रहा हूं। मेरे सिखाए कई बच्चे यूटीसीए और यूनिवर्सिटी से खेल चुके हैं। सेक्टर-27 के सीनियर सेकेंडरी स्कूल और गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-20 में बच्चों को क्रिकेट की फ्री कोचिंग देता हूं। साइकिल से अकादमी आता-जाता हूंं। यहां आने वाले बच्चों को साइक्लिंग के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ नशे से भी बचने के लिए जागरूक करता हूं। यही मेरा मकसद है। - मुकेश कुमार (66), क्रिकेट कोच, सेक्टर-19डी
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सेक्टर-40 निवासी लेक्चरर अनूप किरण (59) ने बताया कि उनका 19 साल का बेटा माउंटेन साइक्लिस्ट था। मई 2007 में एक हादसे में वह चल बसा। उन्होंने बताया कि 18 सितंबर को उसके जन्मदिन पर उसकी याद में पहली राइड मनसा देवी मंदिर के लिए की। इसके बाद यह सिलसिला थमा नहीं बल्कि जुनून बन गया। दोनों घुटने बदलने और हर्निया ऑपरेशन होने के बावजूद फिटनेस के लिए वह रोज कम से कम 30 किलोमीटर साइक्लिंग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वीकेंड पर 100-150 किलोमीटर भी साइक्लिंग करती हैं।
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रोज 100 किलोमीटर चलाता हूं साइकिल ताकि युवा हों प्रेरित
स्वास्थ्य के लिए साइकिल चलाना शुरू किया था पर फिर समाज के लिए कुछ करने की ठानी। अब ज्यादा से ज्यादा युवाओं को साइकिल पर लाना मकसद है। साइकिल पर मैसेज लिखा है और ट्राइसिटी ही नहीं हरियाणा, हिमाचल और पंजाब के कई शहरों के स्कूलों में जाकर बच्चों को साइक्लिंग के लिए जागरूक कर रहा हूं। अधिकतर काम साइकिल पर जाकर ही कर आता हूं। गाड़ी महीनों तक घर पर ही खड़ी रहती है। - रूपेश कुमार बाली (52), जीरकपुर निवासी
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साइकिल जिंदगी का हिस्सा, बच्चों को नशे से बचाना मकसद
जब मैं छठी क्लास में था तो साइक्लिंग शुरू की थी। उसके बाद तो जैसे यह जिंदगी का हिस्सा ही बन गई। 37 साल से क्रिकेट अकादमी चला रहा हूं। मेरे सिखाए कई बच्चे यूटीसीए और यूनिवर्सिटी से खेल चुके हैं। सेक्टर-27 के सीनियर सेकेंडरी स्कूल और गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-20 में बच्चों को क्रिकेट की फ्री कोचिंग देता हूं। साइकिल से अकादमी आता-जाता हूंं। यहां आने वाले बच्चों को साइक्लिंग के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ नशे से भी बचने के लिए जागरूक करता हूं। यही मेरा मकसद है। - मुकेश कुमार (66), क्रिकेट कोच, सेक्टर-19डी