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Punjab: राज्य में घट रही एडेड स्कूलों की संख्या; आर्थिक संकट से जूझ रहा स्टाफ, टेकओवर करने की मांग

Wed, 20 Aug 2025 12:22 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Wed, 20 Aug 2025 12:22 PM IST
सार

 पुरानी पेंशन योजना को बरकरार रखने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह प्रस्ताव आर्थिक तंगी से जूझ रहे पंजाब राज्य सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी संघ ने तैयार किया है।

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Staff of aided schools are demanding old pension
गुरमीत सिंह और शरणजीत सिंह, कर्मचारी संघ के पदाधिकारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के एडेड स्कूलों के स्टाफ को टेकओवर करने और पुरानी पेंशन योजना को बरकरार रखने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह प्रस्ताव आर्थिक तंगी से जूझ रहे पंजाब राज्य सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी संघ ने तैयार किया है। संघ चाहता है कि पंजाब सरकार भी राजस्थान, हिमाचल और हरियाणा सरकार की तर्ज पर एडेड स्कूलों के स्वीकृत स्टाफ को टेकओवर कर उन्हें सरकारी स्कूलों में मर्ज कर ले।

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इसके साथ ही 01 जनवरी 2004 से पहले नियुक्त स्टाफ को पुरानी पेंशन योजना का ही लाभ दिया जाए। संघ की ओर से तैयार यह प्रस्ताव पंजाब सरकार की कैबिनेट सब कमेटी को सौंपकर कमेटी के अध्यक्ष एवं वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा से मुलाकात कर इस पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बताते चलें कि पंजाब के 512 एडेड स्कूलों के लिए 9468 स्वीकृत पदों का प्रावधान किया गया था। इन एडेड स्कूलों को 95 प्रतिशत अनुदान सरकार की ओर से दिया जाता है जबकि पांच प्रतिशत खर्च संबंधित स्कूल प्रबंधन समिति वहन करती है। 

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पंजाब राज्य सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष गुरमीत सिंह मदनीपुर ने बताया कि साल 2003 से इन स्कूलों में नई भर्ती बंद है जबकि स्टाफ लगातार रिटायर हो रहा है। विभिन्न जिलों में 31 एडेड स्कूल तो ऐसे हैं, जिनका पूरा स्वीकृत स्टाफ ही रिटायर्ड हो चुका है, इन स्कूलों में छात्रों की संख्या भी अपेक्षाकृत कम हो गई है। आज कई एडेड स्कूल बंद तो हो चुके हैं।

प्रदेशाध्यक्ष मदनीपुर बताते हैं कि एडेड स्कूलों की संख्या भी घटकर 512 से 441 रह गई है। स्वीकृत स्टाफ की संख्या भी 9468 से घटकर 1600 रह गई है, जिनमें करीब 60 फीसदी टीचिंग व 40 फीसदी नॉन टीचिंग स्टाफ है। प्रदेशाध्यक्ष के अनुसार कई बड़ी हस्तियां इन एडेड स्कूलों से पढ़कर निकली हैं, लिहाजा संघ चाहता है कि या तो सरकार इन स्कूलों को मजबूती दे या फिर स्वीकृत स्टाफ को अन्य सूबों की तरह टेकओवर कर ले, क्योंकि पिछले कई महीनों से वेतन न मिलने की वजह से इन स्कूलों के स्टाफ आर्थिक तंगी व मानसिक परेशानी से जूझ रहे हैं।

सरकार से बंधी उम्मीद
दूसरी ओर, पंजाब सरकार का सूबे में शिक्षा के क्षेत्र में खासा जोर है। लिहाजा एडेड स्कूलों के स्टाफ को भी अब आप सरकार से उम्मीद बंधी है कि सरकार उन्हें राहत दे सकती है। दरअसल, एडेड स्कूलों की जो वर्तमान स्थिति है, उससे उबर पाना संबंधित स्कूलों की प्रबंधन समितियों के लिए बहुत मुश्किल है। इसके लिए संघ ने स्टाफ को टेकओवर करने की मांग उठाई है। प्रस्ताव में संघ का मानना है कि एडेड स्कूल का स्टाफ बहुत ज्यादा अनुभवी है, यदि इन्हें सरकारी स्कूलों में मर्ज किया जाता है, तो ये कर्मचारी सूबे में शिक्षा का स्तर और बेहतर करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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