चंडीगढ़ : पैराओलंपिक के टिकट की चाह में पसीना बहा रहे खिलाड़ी, कड़ी मेहनत से बनेगी बात
पंजाब के पैरा ओलंपिक खिलाड़ी वीना अरोड़ा और राजकुमार भी ओलंपिक क्वालीफाइंग राउंड जीतने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ के पैरा खिलाड़ियों की निगाहें अब 2021 पैरा ओलंपिक टिकी हैं। इसके लिए ये खिलाड़ी दिन-रात अभ्यास करने में जुटे हुए हैं। मुकेश कुमार और पूनम पति-पत्नी हैं और इंटरनेशनल लेवल के बेहतरीन पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं। दोनों देश ही नहीं विदेशों में मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। मुकेश और पूनम दोनों का एक-एक पांव खराब है, बावजूद इसके इन दोनों ने हौसला नहीं छोड़ा। अपने जज्बे के दम पर टेबल टेनिस के खेल से जुड़े। वहीं पंजाब के पैरा ओलंपिक खिलाड़ी वीना अरोड़ा और राजकुमार भी ओलंपिक क्वालीफाइंग राउंड जीतने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
पूनम और मुकेश ने 2020 में पैरा ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया था। इन दोनों ने 2019 में विभिन्न देशों में आयोजित पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप के दौरान बेहतर प्रदर्शन किया था और भारत में ओलंपिक क्वालीफाइंग के लिए हुए टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाइंग कर लिया था, लेकिन कोविड- 19 के चलते पैराओलंपिक को टाल दिया गया था।
अब ये दोनों एक बार फिर से इसी साल अगस्त में होने वाले पैरा ओलंपिक में क्वालीफाइंग करने के लिए तैयारियों में जुट गए हैं। सुबह और शाम कई घंटों अभ्यास कर रहे हैं। मुकेश और पूनम ने बातचीत के दौरान बताया कि वह देश के लिए ओलंपिक का टिकट हासिल करने में पूरा जोर लगा देंगे।
मुकेश की सफलताएं
बच्चे को बचाते हुए एक पांव खोने के बावजूद मुकेश कुमार ने हिम्मत नहीं हारी और अपने दम पर पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हुए मेडल जीतने शुरू कर दिए। यह सिलसिला आज भी जारी है। मुकेश ने नेशनल में 14 गोल्ड मेडल, 8 सिल्वर मेडल और 7 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। इसके साथ ही इंटरनेशनल स्तर पर भी मुकेश 6 गोल्ड, 10 सिल्वर, 14 ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं।
पूनम की उपलब्धियां
साल 2009 में शादी के बाद पूनम ने पति मुकेश के साथ टेबल टेनिस खेलना शुरू किया था। पोलियो बचपन में हो गया था। इस वजह से शुरुआत में दिक्कत हुई, लेकिन कुछ दिनों की मेहनत के बाद बेहतर करने लगीं। उन्होंने इंटरनेशनल स्तर पर 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर 8 गोल्ड, एक सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं।
पैरा ओलंपिक क्वालीफाउंग राउंड पास करने के लिए पसीना बहा रहे राजकुमार
सफलाएं
वर्ल्ड चैंपियनशिप 2007 में कोरिया में एक सिल्वर, एक ब्रॉन्ज, 2009 कोरिया में दो गोल्ड मेडल, 2013 जर्मनी में ब्रॉन्ज मेडल, 2015 इंग्लैंड में एक गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल, 2017 डेनमार्क में एक ब्रॉन्ज मेडल और 2019 डेनमार्क में एक ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।