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मातृ दिवस विशेष: जिगर के टुकड़े का किया अंगदान और दूसरों की बचाई जान... मां तुझे सलाम  

Sun, 08 May 2022 08:37 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ 
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़  Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 08 May 2022 08:37 AM IST
सार

कालका निवासी नीलम ने बेटे अमित कपूर के अंगदान का निर्णय लेकर कई परिवारों की अंधेरी दुनिया में रोशनी बिखेरी। वे कहती हैं कि मैंने अपना 27 साल का बेटा खोया है। इसका दु:ख सिर्फ मैं ही समझ सकती हूं पर मैंने अपने बेटे को राख होने से बचा लिया। 

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Special stories of mothers who donate their dead children organs
नीलम और उनका बेटा अमित। - फोटो : फाइल

विस्तार

जिगर के टुकड़े को अपनी आंखों के सामने दम तोड़ते देखना आसान नहीं होता। यह मां का कलेजा ही है, जो यह सितम झेल जाता है। और इतना बड़ा दुख सहते हुए भी दूसरों को नई जिंदगी देने की बात केवल एक मां ही सोच सकती है। मदर्स डे पर आज हम आपको उन माताओं से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी संतान खोकर भी दूसरे परिवारों के चिराग बुझने से बचा लिए। अपने बच्चों के अंगदान से कई जिंदगियां बचाईं। ऐसी माताओं को हमारा सलाम।   

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मैं अपने बेटे को मिट्टी में मिलता नहीं देखना चाहती थी : सुनीता

चंडीगढ़ सेक्टर-48बी की सुनीता गांधी आज भी छह मार्च 2013 का काला दिन याद कर कांप उठती हैं। सुनीता ने बताया कि अपने जिगर के टुकड़े पार्थ (21) को बड़े नाजों से पाला था। उसमें हमारे परिवार की जान बसती थी। छह मार्च 2013 को वह एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ और हम सबको छोड़कर चला गया। देखते-देखते घर की खुशियां लुट गईं। बार-बार मन में यही ख्याल आ रहा था कि अब मेरे बेटे का शरीर मिट्टी में मिल जाएगा। मैं ऐसा नहीं होने देना चाहती थी इसलिए मैंने अपने पति संजय गांधी के साथ मिलकर पार्थ के अंगदान का निर्णय लिया। मेरी आत्मा को अब इस बात का सुकून है कि मेरा पार्थ अब भी अपनी आंखों से दुनिया देख रहा है। उसका दिल किसी के सीने में धड़क रहा है। उसकी बदौलत कई परिवारों की खुशियां फिर लौट आईं।  

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स्मृति की मेरी ‘मुस्कान’ अब भी बरकरार है 

24 मार्च 2022 को सोलन (हिमाचल प्रदेश) की 13 वर्षीय की मुस्कान घर के बाहर साइकिल चलाते वक्त गिरकर चोटिल हो गई। दो अप्रैल को पीजीआई में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। मां स्मृति की हालत इतनी खराब थी कि वह मुस्कान के दुनिया में न होने की खबर को सच मानने की हिम्मत नहीं कर पा रहीं थीं। फिर भी स्मृति ने समय गंवाए बिना तय किया कि मुस्कान को दुनिया में रखना है, उसके लिए चाहे जो करना पड़े। उन्होंने मुस्कान के अंगदान का निर्णय लिया। स्मृति का कहना है कि मेरी मुस्कान ईश्वर के बेहद करीब थी। शायद इसीलिए भगवान ने उसे दूसरों की जिंदगी के लिए वरदान बना दिया। एक मां होने के नाते अपने कलेजे के टुकड़े का दुनिया से जाना मेरे लिए असहनीय दु:ख था लेकिन उस दु:ख के बीच अंगदान का निर्णय इस बात का सुकून दे गया कि मेरी बच्ची सात लोगों की जिंदगी बचा गई।  

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पता होता नैना नहीं लौटेगी तो उसे कभी जाने नहीं देती : सोनिया

‘एक मां के लिए उसके बच्चे का रोना सबसे ज्यादा पीड़ादायक होता है। जरा सोचिए मैंने तो अपनी नैना को खो दिया। वह मेरी आंखों के सामने मुझसे दूर जा रही थी लेकिन मैं उसे रोक नहीं पाई।’ 11 साल की बेटी नैना का अंगदान करने वाली हिमाचल प्रदेश की सोनिया ठाकुर यह कहते हुए भावुक हो गईं। सोनिया ने बताया कि उस दिन वह बहुत खुश थी। मामा के साथ अपनी छोटी बहन को लेकर गांव जा रही थी। जाने से पहले मुझे कसकर गले लगाया और बोली मम्मी आप परेशान मत होना, मैं जल्दी आऊंगी। मैंने सोचा भी नहीं था कि अब वह लौटकर कभी नहीं आएगी, वरना उसे अपने आंचल में छिपाकर रख लेती हमेशा के लिए। एक मां होने के नाते आज भी जब नैना की बातें, मुस्कान, छोटी-छोटी आदतें याद आती हैं तो दिल रो पड़ता है लेकिन इन सबके बावजूद मैं इस बात से खुश हूं कि मेरी बेटी आज भी किसी न किसी रूप में दुनिया में मौजूद है। नैना का अंगदान सात मार्च को पीजीआई में हुआ। 

मैंने अपने बेटे को राख होने से बचा लिया : नीलम

‘मैंने अपना 27 साल का बेटा खोया है। इसका दु:ख सिर्फ मैं ही समझ सकती हूं लेकिन आज इस बात की खुशी है कि मेरे बेटे ने दुनिया से जाते हुए कई लोगों को नई जिंदगी दी। मैंने अपने बेटे को राख होने से बचा लिया।’ यह कहना है कालका निवासी नीलम का, जिन्होंने बेटे अमित कपूर के अंगदान का निर्णय लेकर कई परिवारों की अंधेरी दुनिया में रोशनी बिखेरी। बेटी तरूना ने बताया कि मां हम तीनों भाई बहनों में सबसे ज्यादा अमित के करीब थी। अमित भी उसके साथ ही सबसे ज्यादा खुश रहता था लेकिन उसके जाने के बाद मां अकेली हो गई है। वह अपना दु:ख बयां नहीं करती लेकिन छिप छिपकर रोती है। वहीं बेटे चिराग का कहना है कि मां ने अपने बेटे के अंगदान से यह साबित कर दिया है कि एक मां इस दुनिया में सब पर ममता लुटाती है, अपने और गैर का फर्क नहीं करती। अमित का अंगदान 10 अप्रैल 2021 को पीजीआई में कराया गया था।

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