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स्पेशल चांस की परीक्षाएं करवाने के लिए छात्र अड़े, कई ने चांसलर को भेजे पत्र
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माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के विज्ञान संकाय के 100 से अधिक विद्यार्थियों को स्पेशल चांस के तहत परीक्षा देने का अधिकार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने चांसलर को पत्र लिखकर कहा है कि उनकी परीक्षाएं आयोजित की जाएं ताकि उन्हें एमएससी में दाखिला मिल सके।
लॉकडाउन से पहले विज्ञान वर्ग के 100 से अधिक विद्यार्थियों को स्पेशल चांस दिया गया था। उसके तहत परीक्षाएं होनी चाहिए थी। उसी से छात्रों के अंक बढ़ते लेकिन कोरोना के कारण परीक्षाएं नहीं हो पाईं। उसके बाद विद्यार्थियों ने एमएससी में दाखिले के लिए आवेदन किए तो उनके दाखिले नहीं हो पाए। उनकी मेरिट पुराने अंकों के आधार पर कम थी। छात्रों का सपना धूमिल होता जा रहा था। इसको लेकर एनएसयूआई ने अधिकारियों को ज्ञापन दिया। अब बीएससी के कई छात्रों ने चांसलर को पत्र लिखा है। कहा है कि उनका भविष्य खतरे में है। वह इस प्रकरण में दखल दें और उनकी परीक्षाएं आयोजित करवाकर उन्हें अगली कक्षाओं में दाखिला दिलाएं ताकि वह पढ़ सकें। यदि परीक्षाएं नहीं हुई तो उनकी मेरिट कम रहेगी और उन्हें आगे तक पिछड़ना पड़ेगा। उन्होंने कई अन्य तर्क भी चांसलर को भेजे पत्र में दिए हैं। पीयू की ओर से इस प्रकरण को गंभीरता से न लेने की बात भी कही है।
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के विज्ञान संकाय के 100 से अधिक विद्यार्थियों को स्पेशल चांस के तहत परीक्षा देने का अधिकार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने चांसलर को पत्र लिखकर कहा है कि उनकी परीक्षाएं आयोजित की जाएं ताकि उन्हें एमएससी में दाखिला मिल सके।
लॉकडाउन से पहले विज्ञान वर्ग के 100 से अधिक विद्यार्थियों को स्पेशल चांस दिया गया था। उसके तहत परीक्षाएं होनी चाहिए थी। उसी से छात्रों के अंक बढ़ते लेकिन कोरोना के कारण परीक्षाएं नहीं हो पाईं। उसके बाद विद्यार्थियों ने एमएससी में दाखिले के लिए आवेदन किए तो उनके दाखिले नहीं हो पाए। उनकी मेरिट पुराने अंकों के आधार पर कम थी। छात्रों का सपना धूमिल होता जा रहा था। इसको लेकर एनएसयूआई ने अधिकारियों को ज्ञापन दिया। अब बीएससी के कई छात्रों ने चांसलर को पत्र लिखा है। कहा है कि उनका भविष्य खतरे में है। वह इस प्रकरण में दखल दें और उनकी परीक्षाएं आयोजित करवाकर उन्हें अगली कक्षाओं में दाखिला दिलाएं ताकि वह पढ़ सकें। यदि परीक्षाएं नहीं हुई तो उनकी मेरिट कम रहेगी और उन्हें आगे तक पिछड़ना पड़ेगा। उन्होंने कई अन्य तर्क भी चांसलर को भेजे पत्र में दिए हैं। पीयू की ओर से इस प्रकरण को गंभीरता से न लेने की बात भी कही है।
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