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देश में सबसे पहले: चंडीगढ़ में बंद होगा स्मार्ट सिटी लिमिटेड, 20 मार्च आखिरी दिन; कर्मियों को नोटिस
Thu, 20 Feb 2025 01:33 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 20 Feb 2025 01:33 AM IST
सार
सीएससीएल ने अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम करने वाले करीब 90 कर्मचारियों को 31 मार्च को नौकरी से निकालने का अल्टीमेटम दे दिया है। 24 घंटे पानी की परियोजना पर करीब 44 कर्मचारी कार्यरत हैं।
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मनीमाजरा का 24 घंटे पानी सप्लाई का केंद्र
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्र सरकार से फंड न मिलने के बाद चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) को 20 मार्च को बंद करने का फैसला लिया गया है। सीएससीएल में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को 31 मार्च तक नौकरी से निकालने का नोटिस भी दे दिया गया है। सभी प्रोजेक्ट्स को निगम और प्रशासन को सौंपने का पूरा खाका तैयार हो चुका है। इस फैसले के साथ ही चंडीगढ़ पहला शहर बन गया है जहां का स्मार्ट सिटी लिमिटेड बंद होने जा रहा है।
मुख्य सचिव राजीव वर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक हुई। इसमें सीएससीएल के विभिन्न परियोजनाओं, उनकी स्थिति, लंबित परियोजनाएं और सीएससीएल के बंद होने के बाद उन्हें किन-किन विभागों को सौंपा जाएगा, इस पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में अधिकारियों को बताया गया कि कुल 36 परियोजनाओं पर कुल 853 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और 53 करोड़ रुपये परिचालन व्यय के रूप में अभी भी उनके पास लंबित हैं। 853 करोड़ में से लगभग 304 करोड़ रुपये सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजना की स्थापना पर खर्च किए गए। 334 करोड़ रुपये से आईसीसीसी व स्काडा, 20 करोड़ रुपये से पब्लिक बाइक शेयरिंग, स्कूलों को स्मार्ट बनाने पर करीब 9 करोड़, 24 घंटे पानी की परियोजना पर करीब 166 करोड़ और बाकी राशि कई सहायक परियोजनाओं पर खर्च की गई।
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मुख्य सचिव राजीव वर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक हुई। इसमें सीएससीएल के विभिन्न परियोजनाओं, उनकी स्थिति, लंबित परियोजनाएं और सीएससीएल के बंद होने के बाद उन्हें किन-किन विभागों को सौंपा जाएगा, इस पर विस्तार से चर्चा हुई।
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बैठक में अधिकारियों को बताया गया कि कुल 36 परियोजनाओं पर कुल 853 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और 53 करोड़ रुपये परिचालन व्यय के रूप में अभी भी उनके पास लंबित हैं। 853 करोड़ में से लगभग 304 करोड़ रुपये सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजना की स्थापना पर खर्च किए गए। 334 करोड़ रुपये से आईसीसीसी व स्काडा, 20 करोड़ रुपये से पब्लिक बाइक शेयरिंग, स्कूलों को स्मार्ट बनाने पर करीब 9 करोड़, 24 घंटे पानी की परियोजना पर करीब 166 करोड़ और बाकी राशि कई सहायक परियोजनाओं पर खर्च की गई।
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