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बेअदबी मामला : पूर्व डीजीपी सैनी से एसआईटी कर सकती है पूछताछ

Fri, 23 Nov 2018 11:44 AM IST
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 23 Nov 2018 11:44 AM IST
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SIT can summon former DGP Sumedh Saini
पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी

कोटकपूरा और बहिबल कलां में पुलिस फायरिंग की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अब तक यह पता नहीं लगा सकी है कि श्रद्धालुओं पर गोली चलाने के आदेश किस अधिकारी या मंत्री ने दिए थे। इस संबंध में एसआईटी द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल से की गई। पूछताछ में कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। बेअदबी मामलों की जांच के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार द्वारा गठित जस्टिस रणजीत सिंह आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कोटकपूरा व बहिबल कलां में गोली चलाने वाले पुलिस अफसरों के नाम उजागर किए थे लेकिन उन पुलिस अफसरों को गोली चलाने के आदेश दिए किसने, इस बात को लेकर कोई स्पष्ट बात रिपोर्ट में नहीं कही गई। 

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वैसे आयोग की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि फायरिंग वाली रात तत्कालीन मुख्यमंत्री और तत्कालीन डीजीपी के बीच फोन पर संपर्क बना रहा। एसआईटी ने आयोग की रिपोर्ट में मिले इसी संकेत को आधार बनाकर प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल को पूछताछ के लिए तलब किया था। हालांकि बादल पिता-पुत्र के साथ ही फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार को भी समन किया गया था लेकिन अक्षय कुमार का मामला बेअदबी और फायरिंग की घटना से जुड़ा हुआ नहीं है।
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प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल से अलग-अलग पूछताछ करने के बाद एसआईटी यह नहीं जान सकी है कि कोटकपूरा व बहिबलकलां में पुलिस को गोली चलाने के आदेश किसने दिए। प्रकाश सिंह बादल ने जहां गोली चलाने के आदेश देने से स्पष्ट इंकार किया है, वहीं सुखबीर बादल ने यह कहकर मामले से पल्ला झाड़ लिया है कि वे घटना के समय राज्य से बाहर थे। ऐसे में एसआईटी के सामने अब केवल एक चेहरा बाकी है, जिससे यह जानकारी मिल सकती है कि पुलिस को गोली चलाने के आदेश किसने दिए। 
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सूत्रों के अनुसार एसआईटी जल्द ही तत्कालीन डीजीपी सुमेध सैनी को पूछताछ के लिए समन कर सकती है। दरअसल, घटना के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री से डीजीपी देर रात तक फोन के जरिए संपर्क में थे। पुलिस दूसरे किसी आला अफसर के आदेश के बिना लोगों पर फायरिंग जैसा फैसला नहीं ले सकती। इस संबंध में एसआईटी के अफसरों ने कुछ भी साफ कहने से बचते हुए यही संकेत दिया कि पूर्व डीजीपी इस मामले में आखिरी कड़ी हैं।

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