25 सितंबर को पंजाब में अकाली दल का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री से विशेष सत्र बुलाने की मांग
- शिअद कोर कमेटी ने लिया फैसला, एक अक्तूबर से तीनों तख्तों से मोहाली तक मार्च
- सुखबीर बादल बोले- कृषि विधेयक में पक्षकार बनने के लिए सीएम माफी मांगें
- किसानों को न्याय दिलाने तक आराम से नहीं बैठेगा शिरोमणि अकाली दल
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शिरोमणि अकाली दल ने अपनी सहयोगी एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। कृषि विधेयकों के खिलाफ 25 सितंबर से राज्यव्यापी चक्का जाम का एलान किया है। शिअद कोर कमेटी की बैठक में निर्णय लिया गया है कि एक अक्तूबर से सिख धार्मिक तख्तों से मोहाली तक किसान मार्च निकाला जाएगा।
सोमवार देर रात हुई कोर कमेटी की बैठक की अध्यक्षता सुखबीर बादल ने की। बैठक में निर्णय लिया गया कि अकाली दल अध्यक्ष 26 से 29 सितंबर तक पार्टी कैडर के साथ बातचीत करने को राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा करेंगे। पार्टी प्रवक्ता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि कोर कमेटी ने 25 सितंबर को राज्य भर में चक्का जाम करने का फैसला किया है।
पार्टी नेताओं से कहा गया है कि वे किसानों, खेत मजदूरों, आढ़तियों के साथ सभी निर्वाचन क्षेत्रों में ‘चक्का जाम’ करें। इसके लिए तीन घंटे सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक का समय तय किया गया है। हालांकि पार्टी कार्यकर्ताओं को आपातकालीन सेवाओं को न रोकने को कहा गया है।
कोर कमेटी ने एक अक्तूबर को श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब और श्री केशगढ़ साहिब से किसान मार्च निकालने का निर्णय किया है। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर भी इसमें प्रतिभाग होंगी। मोहाली दशहरा ग्राउंड में मार्च का समापन होगा, जिसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल पंजाब के राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगा।
संशोधित एपीएमसी एक्ट को रद्द करने के लिए विशेष सत्र बुलाएं मुख्यमंत्री: शिअद
शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से कहा कि वे 2017 के संशोधित राज्य कृषि उत्पाद बाजार कमेटी (एपीएमसी) अधिनियम को रद्द करने के लिए तत्काल विशेष विधानसभा का सत्र बुलाएं। सुखबीर ने कहा कि मुख्यमंत्री को किसानों के साथ चलकर उनके विरुद्ध अधिनियम लागू नहीं करना चाहिए था। वे किसानों और पंजाब के खेत मजदूरों को बताएं कि राज्य एपीएमसी अधिनियम 2017 को रद्द करने से इनकार क्यों कर रहे हैं, जिसे मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने अपने ही राज्य में लागू किया है।
सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री से यह भी पूछा कि क्या वह 2019 के कांग्रेस के घोषणा पत्र से खुद को अलग करने का नैतिक साहस दिखा सकते हैं, जिसमें एपीएमसी एक्ट को हटाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि वे मोंटेक सिंह आहलुवालिया समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कृषि क्षेत्र के निगमीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों से माफी मांगें, जिसमें खाद्यान्न की खरीद को कम करने को कहा गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से कमेटी को अस्वीकार करने को कहा, जिसमें पंजाब के किसानों के लिए डेथ वारंट लिखा गया है। हम तब तक आराम से नहीं बैठेंगे जब तक अन्नदाता को न्याय मिलना सुनिश्चित नहीं हो जाता।
सुखबीर बादल ने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है, जब मुख्यमंत्री ने लोगों की पीठ में छुरा घोंपा हो। उन्होंने पहले भी पवित्र श्री गुटका साहिब और दशम पिता के नाम पर झूठे वादे किए हैं। अब भी वे किसानों को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की भलाई के लिए लड़ाई तब तक जारी रखेंगे जब तक सभी किसान संतुष्ट न हो जाएं कि उनके अधिकार सुरक्षित हैं।