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डेराबस्सी: कांग्रेस के लिए चुनौती होगा शिअद का किला तोड़ना, 30 साल से सियासी जमीन की तलाश

Sat, 01 Jan 2022 04:36 PM IST
निवेदिता वर्मा अश्वनी कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
अश्वनी कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 01 Jan 2022 04:36 PM IST
सार

पंजाब और हरियाणा के विभाजन के बाद विधानसभा क्षेत्र को पंजाब में रखा गया और 1972 में यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी जीत से हलके में आगाज किया और जीत का यह सिलसिला अगले विधानसभा चुनाव 1977 में भी बरकरार रहा।

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Shiromani Akali Dal has ruled for the longest time in Derabassi Assembly area
सुखबीर बादल - फोटो : File Photo

विस्तार

विधानसभा हलका डेराबस्सी (परिसीमन से पहले बनूड़) में कांग्रेस पिछले 30 साल से राजनीतिक जमीन तलाश रही है, जो आज तक नसीब नहीं हुई। नतीजा यह है कि अब तक के हुए विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा समय तक शिरोमणि अकाली दल ने शासन किया है। जिसने कुल सात बार इस सीट को जीतकर अपने किले को मजबूत रखकर रिकार्ड कायम किया है। कांग्रेस को 1992 में आखिरी बार यहां जीत मिली थी। इसके बाद से अब तक हुए छह बार के चुनाव में कांग्रेस को हमेशा हार का ही मुंह देखना पड़ा है। हालांकि परिसीमन से पहले कांग्रेस जरूर जीत दर्ज करने में कामयाब रही, लेकिन परिसीमन के बाद हुए दो बार के चुनाव में कांग्रेस हार गई। 

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चौथी बार सांसद बनीं, पर विधानसभा में हारीं कैप्टन की पत्नी

2002 और 2017 में पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पूर्ण बहुमत के साथ सूबे में सरकार बनाई। लेकिन कांग्रेस की इतनी हवा होने के बावजूद 2002 और 2017 में शिअद के उम्मीदवार जीत दर्ज करने में नाकामयाब रहे। डेराबस्सी हलका कांग्रेस पार्टी के लिए इसलिए भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर खुद लोकसभा पटियाला हलका से चौथी बार सांसद बन चुकी हैं। बावजूद इसके कांग्रेस विधानसभा हलका डेराबस्सी में शिअद के किले में सेंध लगाने में कामयाब नहीं हो पाईं और एक के बाद एक लगातार छह बार हार का सामना करना पड़ा।

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कांग्रेस ने जीत से किया था आगाज

पंजाब और हरियाणा के विभाजन के बाद इस क्षेत्र को पंजाब में रखा गया और 1972 में यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी जीत से हलके में आगाज किया और जीत का यह सिलसिला अगले विधानसभा चुनाव 1977 में भी बरकरार रहा। लेकिन दो बार की जीत के बाद अचानक ऐसा समय आ गया कि कांग्रेस अपनी जीत को हैट्रिक में तब्दील न कर सकीं और 1980 में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस को 1992 में जीत नसीब हुई। 

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1985 में शिअद की एंट्री अब तक बरकरार

1985 में हुए विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल की एंट्री हुई थी, जिसने पहली बार जीत दर्ज की और इसके बाद अपनी जीत के इस रथ को शिअद ने कभी रुकने नहीं दिया और अब तक बरकरार है। लेकिन वर्ष 1992 के शिअद के बायकॉट के चलते हार मिली। लेकिन इसके बाद 1997, 2002, 2007, 2009, 2012, 2017 तक हुए विधानसभा चुनाव में शिअद ने कांग्रेस के उम्मीदवार को अपने सामने टिकने नहीं दिया, जिसने लगातार छह बार कांग्रेस को हराकर अपने किले को मजबूत रखते हुए रिकॉर्ड कायम किया।

साल         पार्टी      विजेता का नाम

1972                कांग्रेस                 हंसराज
1977                कांग्रेस                हंसराज शर्मा
1980               निर्दलीय               विनोद शर्मा
1985                शिअद          स्व. कैप्टन कंवलजीत सिंह
1992                कांग्रेस              मोहिंदर सिंह गिल
1997                शिअद            कैप्टन कंवलजीत सिंह
2002                शिअद            कैप्टन कंवलजीत सिंह
2007                शिअद            कैप्टन कंवलजीत सिंह
2009                शिअद              जसजीत सिंह बन्नी
2012                शिअद                  एनके शर्मा
2017                 शिअद                 एनके शर्मा

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