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Hindi News ›   Chandigarh ›   Set Up of E-Sampark Kendra were Planning of Former Administrator of Chandigarh, General SF Rodrigues

यादें: पूर्व प्रशासक जनरल रोड्रिग्स ने ही दिलाई थी चंडीगढ़ के लोगों को लंबी कतारों से मुक्ति, आज हर सेक्टर में हैं ई-संपर्क केंद्र

Sat, 05 Mar 2022 10:15 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 05 Mar 2022 10:15 AM IST
सार

पूर्व मनोनीत पार्षद व आर्किटेक्ट पल्लव मुखर्जी ने बताया कि रोड्रिग्स के अंदर एक अच्छे प्रशासक के गुण थे। किसी भी विषय को त्वरित समझने में वह माहिर थे।

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Set Up of E-Sampark Kendra were Planning of Former Administrator of Chandigarh, General SF Rodrigues
चंडीगढ़ के पूर्व प्रशासक जनरल एसएफ रोड्रिग्स। - फोटो : फाइल

विस्तार

लोगों की लंबी कतारें देखकर चंडीगढ़ के तत्कालीन प्रशासक जनरल एसएफ रोड्रिग्स के दिमाग में ई-संपर्क केंद्र बनाने की योजना आई थी। उनका मानना था कि छोटे-छोटे काम के लिए भी अगर लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़े तो फिर व्यवस्था में परिवर्तन की जरूरत है। आज लोगों को अपने ही सेक्टर में ई-संपर्क केंद्र की सुविधा मिलती है, जिसका श्रेय जनरल एसएफ रोड्रिग्स को जाता है। 

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पूर्व मनोनीत पार्षद व आर्किटेक्ट पल्लव मुखर्जी ने बताया कि रोड्रिग्स के अंदर एक अच्छे प्रशासक के गुण थे। किसी भी विषय को त्वरित समझने में वह माहिर थे। 2004 में चंडीगढ़ में आने के साथ ही उन्होंने अपने विचारों से अधिकारियों को परिचित करना शुरू कर दिया था। पल्लव ने बताया कि उन्हें रोड्रिग्स की सलाहकार समिति में शामिल होने का मौका मिला तो लोगों के लिए बेहतर योजनाओं पर काम शुरू किया। बुनियादी सेवाओं जैसे आवेदन जमा करना, बिजली, टेलीफोन या अन्य बिल का भुगतान में लोगों को राहत देने के लिए संपर्क केंद्र की योजना जारी की। सरकार की प्रणालियों को सरलीकरण करने में भी उनका काफी योगदान रहा। जैसे गाड़ी का आरसी नंबर जारी करवाना, प्रशिक्षण स्कूल में प्रशिक्षित होने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस जारी करवाना आदि

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सेक्टर-42 की लेक के निर्माण में भी योगदान

पल्लव मुखर्जी ने बताया कि शहर के सौंदर्यीकरण के साथ ही पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए भी उनकी काफी योजनाएं थीं। सेक्टर-42 की झील का निर्माण, वर्षा के जल के संरक्षण के लिए उसका भंडारण करना, मजदूरों के के लिए आवास की व्यवस्था कराने में उनका बड़ा योगदान था। उनका एक सुझाव था कि विभिन्न विभागों में लंबित फाइलों पर मासिक चर्चा करने के लिए लोक अदालत जैसे व्यवस्था होनी चाहिए, हालांकि वह योजना पूरी नहीं हो सकी।

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