VIDEO: अमेरिका में क्या होता है सिखों के साथ
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‘देखिए ये वीडियो, फिर शायद आपको एहसास हो कि अमेरिका में सिखों को किस तरह रोजाना नस्ली टिप्पणियों से दो-चार होना पड़ता है। मैं स्कूल बस में बैठता हूं तो उसमें सवार बाकी विद्यार्थी मुझे देखते ही टेररिस्ट, टेररिस्ट (आतंकी) चिल्लाने लगते हैं। बस में मेरे साथ कोई नहीं बैठता। इस वीडियो के माध्यम से मैं खुद की नहीं, अमेरिका के सभी सिखों की पीड़ा बता रहा हूं।’
अमेरिका के जॉर्जिया स्थित एक स्कूल में पढ़ने वाले हरसुख सिंह ने आपबीती बताते हुए यू-ट्यूब पर एक वीडियो अपलोड किया है। इस वीडियो में हरसुख सिंह स्कूल बस में है और अन्य विद्यार्थी उसे आतंकी कहते हुए चिढ़ा रहे हैं। रविवार को अपलोड किए गए इस वीडियो को सोमवार शाम तक करीब साढ़े चार लाख लोग देख चुके हैं। साथ ही हजारों लोगों ने इसे शर्मनाक बताया है।
वीडियो के अंश
-स्कूल बस में सिख छात्र हरसुख सिंह की सीट के पीछे बैठी एक लड़की उसकी ओर इशारा कर टेररिस्ट, टेररिस्ट चिल्लाती है।
-हरसुख बताता है कि वह रिकॉर्डिंग कर रहा है।
-अन्य छात्र चिल्लाता है- रिकॉर्डिंग करना बंद करो, तुम क्या कोर्ट में जाओगे?
-बाकी छात्र लगातार टेररिस्ट, टेररिस्ट, अफगान टेररिस्ट चिल्लाते रहते हैं।
हटानी पड़ी दाढ़ी और पगड़ी
अमेरिका में सिखों के प्रति भेदभाव नई बात नहीं है। 9/11 हमलों की आग में यहां के सिख आज भी झुलस रहे हैं। हालात ये हैं कि हेट क्राइम के मामले बढ़ने के कारण कई सिखों को पगड़ी और दाढ़ी हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
अवतार सिंह मक्कड़, अध्यक्ष, शिरोमणि सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने बताया कि हम इस भेदभावपूर्ण रवैये की कड़ी निंदा करते हैं। ओबामा प्रशासन सिखों के प्रति भाईचारे संबंधी प्रचार तो बहुत करता है लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। अमेरिका सरकार को स्कूली स्तर पर सख्ती से कदम उठाने चाहिए। साथ ही भारत सरकार का भी दायित्व है कि वह अपने नागरिकों के सम्मान और रक्षा के लिए इस मुद्दे को प्रमुखता से अमेरिका के समक्ष रखे।
मैं कैप्टन अमेरिका हूं
अमेरिका में नस्ली टिप्पणियों से आहत एक सिख कार्टूनिस्ट विश्वजीत सिंह ने लोगों को सिख कौम के बारे में जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। विश्वजीत ने कैप्टन अमेरिका नाम से मिसीसिपी के कॉलेजों से अभियान शुरू किया है। इसके तहत वह छात्रों को सिख और मुस्लिम के बीच फर्क समझा रहे हैं। सिंह का मानना है कि 9/11 हमलों ने सिखों से समानता का अधिकार ही छीन लिया है। अधिकतर अमेरिकी पगड़ी और दाढ़ी देख उन्हें टेररिस्ट (आतंकवादी) समझ लेते हैं। इसके चलते बेकसूर सिखों को प्रताड़नाएं झेलनी पड़ रही हैं जबकि वे भी अमेरिकी समाज का ही हिस्सा हैं।
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