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दंपति से सुनिए, मौत का आंखों-देखा खौफनाक मंजर

Wed, 29 Apr 2015 05:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद Updated Wed, 29 Apr 2015 05:04 PM IST
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sensational story of couple returned from nepal, saved after earthquake

मौत को मात देकर लौटे दंपति ने नेपाल में भूकंप के दौरान का आंखों देखा खौफनाक मंजर सुनाया तो सभी की रूह कांप उठी। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की ओर से अहिंसा यात्रा के अंतर्गत प्रेक्षा ध्यान योग शिविर में काठमांडू गए संजय जैन व उनकी पत्नी मंजू जैन मौत के मुंह से निकलकर फतेहाबाद पहुंच गए।

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भूकंप के बाद शिविर में भाग ले रहे लगभग 10 लोगों पर पेड़ गिर गया, उसमें मंजू जैन भी शामिल थी। पेड़ के नीचे दबने से उनकी पसलियां टूट गई हैं। जो कि नेपाल में प्राथमिक उपचार करवाने के बाद फ्लाइट से दिल्ली पहुंची और उसके बाद मंगलवार दोपहर अपने घर नहर कलोनी पहुंच गए हैं। मंगलवार को रिश्तेदारों व पड़ोसियों के मिलने का तांता लगा रहा।
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अचानक धरती हिलने लगी और पेड़ गिर गए

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फतेहाबाद में पराग प्रोपर्टी के नाम से व्यवसाय कर रहे संजय जैन ने बताया कि काठमांडू के बाल मंदिर में तेरापंथ धर्मसंघ के 11 वीं आचार्य श्रीमहाश्रमण अहिंसा यात्रा के अंतर्गत प्रेक्षा ध्यान योग शिविर का आयोजन था। जिसमें योगगुरु रामदेव तथा आयार्य बालकृष्ण आए हुए थे।

उसमें भाग लेने के लिए 24 अप्रैल को अपनी पत्नी मंजू जैन के साथ गए थे। जैन ने बताया कि 25 अप्रैल को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर जैसे ही शिविर का समापन हुआ तो धरती हिलने लगी और भगदड़ मच गई।

उन्होंने बताया कि धरती हिलने से अचानक पेड़ गिर गया और उसके नीचे 10 के लगभग महिलाएं दब गई। जिसमें उनकी पत्नी मंजू भी शामिल थी। जिनकी पसलियों में चोट आई है। उपचार के बाद 27 अप्रैल को रात 12 बजे काठमांडू से चले और सुबह दिल्ली पहुंचे और उसके बाद गाड़ी से घर लौटे हैं।

नहीं पहुंच रही सरकारी मदद, मची है लूट

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संजय जैन ने बताया कि पुराना काठमांडू पूरी तरह से तबाह हो गया है। वहां पर चारों तरफ लाशों के ही ढेर लगे हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी राहत कार्य के लिए जो वायुयान लगाए गए हैं उनमें लोगों को बुरी तरह से भरा जा रहा है। उन्होंने भी सरकारी मदद के लिए कहा लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था। उन्होंने इंडिगो फ्लाइट की 40 हजार रुपये की टिकट खरीदी और यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की ओर से 11 लाख रुपये का अनुदान भेजा गया है।

बच्चों का था बुरा हाल
तबाही के मंजर से निकलकर आए अपने मां-बाप को देखकर बच्चे फूले नहीं समा रहे थे। जिस समय भूकंप आया उसके बाद टीवी पर जब तबाही का मंजर दिखने लगा तो बच्चों का सोच-सोचकर बुरा हाल था। वहां बिजली के कनेक्शन बंद हो गए थे। मोबाइल भी स्विच ऑफ थे। अपनों से बात करने का कनेक्शन टूट गया। जिसके चलते फतेहाबाद में मौजूद बच्चों व रिश्तेदार भी परेशान थे।

नेपाल गए लोगों की जानकारी प्रशासन को दें

उपायुक्त एनके सोलंकी ने बताया कि नेपाल में आई आपदा में जिला से संबंधित किसी के परिवार का कोई सदस्य नेपाल गया हुआ है और अभी तक वापिस नहीं लौटा है तो इसकी जानकारी उपायुक्त कार्यालय को दें। इसके अलावा लोग मदद के लिए 01667-230030, 230018 फोन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।

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