{"_id":"5e8103e38ebc3e767813f715","slug":"selling-vegetables-in-ctu-bus-at-double-price-people-expressed-opposition-then-ran-away-chandigarh-news-pkl370973635","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गवर्नर साहब! सीटीयू की बस में दोगुने दाम पर बेच रहे हैं सब्जियां-सामान, वेंडरों पर कसें लगाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गवर्नर साहब! सीटीयू की बस में दोगुने दाम पर बेच रहे हैं सब्जियां-सामान, वेंडरों पर कसें लगाम
Mon, 30 Mar 2020 02:40 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 30 Mar 2020 02:40 PM IST
विज्ञापन
सब्जी बेच रहे लोग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहरवासियों को सब्जियां और राशन यूटी प्रशासन की ओर से तय रेट पर नहीं मिल रहा है। सेक्टरों व कॉलोनियों में पुलिस के सामने ही मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। विरोध पर वेंडर्स कहते हैं कि मजबूरी है, इतने दाम में ही सब्जी मिलेगी। राशन वाले या तो फोन नहीं उठाते या मंहगे दामों पर सामान दे रहे हैं।
प्रशासन ने सीटीयू की बसों से हर सेक्टर व कॉलोनी तक सब्जियां पहुंचाने की योजना बनाई गई। उचित दाम पर लोगों को सब्जियां उपलब्ध हों इसलिए सब्जी व फल के रेट भी निर्धारित किए गए। इसका विरोध न पुलिस ने किया और न लोगों की सुनवाई हुई। यही हाल कुछ राशन के दुकानदारों का रहा। प्रशासन की सूची में जिन दुकानदारों के नाम थे, उन्होंने लोगों के फोन तक नहीं उठाए और जिन लोगों ने फोन उठाए उन्होंने सामान न होने का हवाला देकर अपनी पीछा छुड़ा लिया। कुछ दुकानदारों ने मनमाने दामों पर सामान बेचा।
एक ही परिवार के दे दिए नंबर, 11 डिजिट के भी नंबर
प्रशासन ने सब्जियां देने वालों में एक ही परिवार के कई सदस्यों को जिम्मेदारी दे दी। नंबर भी एक ही दिया गया। नंबर न लगने से कई सेक्टरों में पहले तो सब्जियां नहीं पहुंचीं। प्रशासन ने बसों से सब्जी पहुंचाने का काम शुरू किया तो वह भी निचले स्तर के कर्मचारियों की लापरवाही से फेल साबित हुआ। ज्यादातर दुकानदारों ने भी दुकान बंद रखना ही बेहतर समझा। वहीं लोगों की मदद के लिए जारी नंबर में कई नंबर 11 डिजिट के थे। इस संबंध में कुछ दुकानदारों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि लॉकडाउन होने के बाद दुकान पर सामान आना बंद हो गया। थोड़ा बहुत था लोगों ने ज्यादा-ज्यादा ले जाकर घर में स्टॉक कर लिया।
विज्ञापन
नंबर लिखा दो, राशन आ जाएगा तो पहुंचा देंगे
दड़वा निवासी सोनू कुमार ने बताया कि 112 हेल्पलाइन नंबर पर दोपहर को कॉल किया था। बताया गया कि अभी आटा व तेल उपलब्ध नहीं है। आप पता व नंबर लिखा दो, सामान घर पहुंचा देंगे। लॉकडाउन से पहले जो आटा 20 से 25 रुपये किलो मिल रहा था, अब वही 10 किलो के आटे की थैली 350 से 400 रुपये तक बेची जा रही है। धनास निवासी देवेंदर सिंह ने बताया कि दुकानदारों ने सीधे तौर पर कह दिया, शहर में सामान कम है, लेना है तो लो, नहीं तो कहीं और से देख लो। प्रशासन की ओर से सब्जियां तो लोगों तक पहुंचाई जा रहीं हैं, लेकिन राशन न मिलने से लोग काफी परेशान हैं।
विज्ञापन
प्रशासन ने सीटीयू की बसों से हर सेक्टर व कॉलोनी तक सब्जियां पहुंचाने की योजना बनाई गई। उचित दाम पर लोगों को सब्जियां उपलब्ध हों इसलिए सब्जी व फल के रेट भी निर्धारित किए गए। इसका विरोध न पुलिस ने किया और न लोगों की सुनवाई हुई। यही हाल कुछ राशन के दुकानदारों का रहा। प्रशासन की सूची में जिन दुकानदारों के नाम थे, उन्होंने लोगों के फोन तक नहीं उठाए और जिन लोगों ने फोन उठाए उन्होंने सामान न होने का हवाला देकर अपनी पीछा छुड़ा लिया। कुछ दुकानदारों ने मनमाने दामों पर सामान बेचा।
विज्ञापन
एक ही परिवार के दे दिए नंबर, 11 डिजिट के भी नंबर
प्रशासन ने सब्जियां देने वालों में एक ही परिवार के कई सदस्यों को जिम्मेदारी दे दी। नंबर भी एक ही दिया गया। नंबर न लगने से कई सेक्टरों में पहले तो सब्जियां नहीं पहुंचीं। प्रशासन ने बसों से सब्जी पहुंचाने का काम शुरू किया तो वह भी निचले स्तर के कर्मचारियों की लापरवाही से फेल साबित हुआ। ज्यादातर दुकानदारों ने भी दुकान बंद रखना ही बेहतर समझा। वहीं लोगों की मदद के लिए जारी नंबर में कई नंबर 11 डिजिट के थे। इस संबंध में कुछ दुकानदारों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि लॉकडाउन होने के बाद दुकान पर सामान आना बंद हो गया। थोड़ा बहुत था लोगों ने ज्यादा-ज्यादा ले जाकर घर में स्टॉक कर लिया।
विज्ञापन
नंबर लिखा दो, राशन आ जाएगा तो पहुंचा देंगे
दड़वा निवासी सोनू कुमार ने बताया कि 112 हेल्पलाइन नंबर पर दोपहर को कॉल किया था। बताया गया कि अभी आटा व तेल उपलब्ध नहीं है। आप पता व नंबर लिखा दो, सामान घर पहुंचा देंगे। लॉकडाउन से पहले जो आटा 20 से 25 रुपये किलो मिल रहा था, अब वही 10 किलो के आटे की थैली 350 से 400 रुपये तक बेची जा रही है। धनास निवासी देवेंदर सिंह ने बताया कि दुकानदारों ने सीधे तौर पर कह दिया, शहर में सामान कम है, लेना है तो लो, नहीं तो कहीं और से देख लो। प्रशासन की ओर से सब्जियां तो लोगों तक पहुंचाई जा रहीं हैं, लेकिन राशन न मिलने से लोग काफी परेशान हैं।
लोगों ने जताया विरोध तो भाग खड़े हुए
बेशक प्रशासन शहरवासियों तक सब्जियां पहुंचाने के लिए सीटीयू बसों का सहारा ले रहा है, लेकिन इन बसों में सब्जी बेचने वाले वेंडर्स लोगों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। आलम यह है कि कर्फ्यू के बाद से शहर में सब्जियां दोगुने दाम पर बेची जा रही है। अब लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है।
सेक्टर-38 वेस्ट स्थित ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में रविवार को ऐसा ही वाक्या सामने आया। हुआ यूं कि बस पर सब्जियों के दाम की लिस्ट भी नहीं लगाई गई थी, जिस पर लोग भड़क गए और उन्होंने विरोध करना शुरू किया। विरोध बढ़ता देख वेंडर्स सब्जियों को बस में भरकर भाग गए।
दोपहर सेक्टर-38 वेस्ट स्थित ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में आई सीटीयू की बस में से सब्जी नहीं बेचा गया, बल्कि वेंडर्स बाहर एक खुली जगह पर बैठ गए और सब्जियों को फैला कर मार्केट की तरह उन्होंने स्टॉल लगाई। सब्जियों के दाम भी बहुत ज्यादा थे। बस पर सब्जियों के दाम की लिस्ट भी नहीं लगाई गई थी, जिस पर लोग भड़क गए और उन्होंने विरोध करना शुरू किया। विरोध बढ़ता देख वेंडर्स सब्जियों को बस में भरकर भाग गए।
मुनाफा कमाने के लिए बढ़ा दिए दाम
कर्फ्यू के चलते सब्जियों के दाम नहीं बढ़े नहहैं, बल्कि वेंडर्स ने खुद मुनाफा कमाने के लिए बढ़ा दिया है। शहर के विभिन्न सेक्टरों में जाकर सब्जी बेच रही सीटीयू की बसों में 20 रुपये किलो मिलने वाला आलू के 30 से 40 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। टमाटर 60 रुपये किलो तो भिंडी 100 रुपये किलो बेचा जा रहा है। लोगों के पास कोई विकल्प नहीं होने की वजह से इन वेडर्स की मानों लॉटरी लग गई है। इनकी मदद कर रहे हैं पुलिस के कर्मचारी।
सेक्टर-38 वेस्ट स्थित ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में रविवार को ऐसा ही वाक्या सामने आया। हुआ यूं कि बस पर सब्जियों के दाम की लिस्ट भी नहीं लगाई गई थी, जिस पर लोग भड़क गए और उन्होंने विरोध करना शुरू किया। विरोध बढ़ता देख वेंडर्स सब्जियों को बस में भरकर भाग गए।
दोपहर सेक्टर-38 वेस्ट स्थित ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में आई सीटीयू की बस में से सब्जी नहीं बेचा गया, बल्कि वेंडर्स बाहर एक खुली जगह पर बैठ गए और सब्जियों को फैला कर मार्केट की तरह उन्होंने स्टॉल लगाई। सब्जियों के दाम भी बहुत ज्यादा थे। बस पर सब्जियों के दाम की लिस्ट भी नहीं लगाई गई थी, जिस पर लोग भड़क गए और उन्होंने विरोध करना शुरू किया। विरोध बढ़ता देख वेंडर्स सब्जियों को बस में भरकर भाग गए।
मुनाफा कमाने के लिए बढ़ा दिए दाम
कर्फ्यू के चलते सब्जियों के दाम नहीं बढ़े नहहैं, बल्कि वेंडर्स ने खुद मुनाफा कमाने के लिए बढ़ा दिया है। शहर के विभिन्न सेक्टरों में जाकर सब्जी बेच रही सीटीयू की बसों में 20 रुपये किलो मिलने वाला आलू के 30 से 40 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। टमाटर 60 रुपये किलो तो भिंडी 100 रुपये किलो बेचा जा रहा है। लोगों के पास कोई विकल्प नहीं होने की वजह से इन वेडर्स की मानों लॉटरी लग गई है। इनकी मदद कर रहे हैं पुलिस के कर्मचारी।
क्या कहते हैं लोग
सीटीयू की बसों से सब्जी बेच कर लोगों को लूटा जा रहा है। जो रेहड़ी वाला सस्ती सब्जी बेच रहा है, उसे पुलिस वालों ने मार कर भगा दिया। इससे ही साफ जाहिर होता है कि सभी मिले हुए हैं और जनता को लूटा जा रहा है।
- हीरालाल, स्मॉल फ्लैट निवासी
प्रशासन का कोई कंट्रोल नहीं
400 रुपये का राशन का थैला 750 रुपये में बेचा जा रहा है। गरीब जनता कहां से खरीदेगी। अफसर यही सोच कर खुश हैं कि लोगों तक राशन पहुंच रहा है, लेकिन किस दाम पर पहुंच रहा है, इसकी कोई जांच नहीं की जा रही है। प्रशासन का इस पर कोई कंट्रोल नहीं हैं।
- संग्राम यादव, स्मॉल फ्लैट निवासी
जनता किससे करे शिकायत
एक तरफ लोग महामारी को रोकने के लिए घरों में बंद हैं। जो आदमी रोज कमाता- खाता हैं। सब्जियों के रेट 100 रुपये किलो सुनकर सिहर जाता हैं। दूसरी तरफ किरयाना वाले अपने मनमाने दाम वसूल रहे हैं। जनता आखिर अपनी सुनवाई किस के पास करें।
- जीवाराज, महासचिव, रिहेब्लीटेशन कॉलोनी वेलफेयर
- हीरालाल, स्मॉल फ्लैट निवासी
प्रशासन का कोई कंट्रोल नहीं
400 रुपये का राशन का थैला 750 रुपये में बेचा जा रहा है। गरीब जनता कहां से खरीदेगी। अफसर यही सोच कर खुश हैं कि लोगों तक राशन पहुंच रहा है, लेकिन किस दाम पर पहुंच रहा है, इसकी कोई जांच नहीं की जा रही है। प्रशासन का इस पर कोई कंट्रोल नहीं हैं।
- संग्राम यादव, स्मॉल फ्लैट निवासी
जनता किससे करे शिकायत
एक तरफ लोग महामारी को रोकने के लिए घरों में बंद हैं। जो आदमी रोज कमाता- खाता हैं। सब्जियों के रेट 100 रुपये किलो सुनकर सिहर जाता हैं। दूसरी तरफ किरयाना वाले अपने मनमाने दाम वसूल रहे हैं। जनता आखिर अपनी सुनवाई किस के पास करें।
- जीवाराज, महासचिव, रिहेब्लीटेशन कॉलोनी वेलफेयर
लाइसेंसी वेंडर्स का आरोप- चहेतों को जारी किए ‘पास’
सरकारी बसों में सब्जियों और राशन की होने वाली सप्लाई के लिए लाइसेंसी वेंडरों के बजाय चहेतों लोगों के पास बना दिए गए हैं। लाइसेंसी बेंडरों ने यह आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की है। वेंडरों ने आरोप लगाया कि सब्जियों और राशन की कालाबाजारी को लेकर पास में खेल किया गया है। आक्रोशित वेंडरों ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से करने की बात कही है।
बता दें कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लोगों के घरों में ही प्रशासन की ओर से राशन और सब्जियों की सप्लाई किए जाने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए सीटीयू की लगभग 100 बसें और वेंडरों के पास बनाए गए थे। सब्जियों और राशन की आपूर्ति के लिए बनने वाले पास में नगर निगम और मार्केट कमेटी के अधिकारियों ने चहेतों के ही पास बना दिए। लाइसेंसी वेेंडरों ने बताया कि जिनके पास बनाए गए हैं, वह प्रशासन की ओर से तय किए गए सब्जियों और राशन के रेटों पर लोगों को सामान नहीं दे रहे हैं।
इससे लोगों को अधिक दामों पर सामान मिल रहा है। वेंडरों ने आरोप लगाया कि पैसे वसूली के विषय में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को जानकारी है, लेकिन अभी तक किसी भी वेंडर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वेंडरों ने कहा कि वह चहेतों को बनाए पास की जांच होनी चाहिए। उन्होंने उच्चाधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है।
बता दें कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लोगों के घरों में ही प्रशासन की ओर से राशन और सब्जियों की सप्लाई किए जाने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए सीटीयू की लगभग 100 बसें और वेंडरों के पास बनाए गए थे। सब्जियों और राशन की आपूर्ति के लिए बनने वाले पास में नगर निगम और मार्केट कमेटी के अधिकारियों ने चहेतों के ही पास बना दिए। लाइसेंसी वेेंडरों ने बताया कि जिनके पास बनाए गए हैं, वह प्रशासन की ओर से तय किए गए सब्जियों और राशन के रेटों पर लोगों को सामान नहीं दे रहे हैं।
इससे लोगों को अधिक दामों पर सामान मिल रहा है। वेंडरों ने आरोप लगाया कि पैसे वसूली के विषय में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को जानकारी है, लेकिन अभी तक किसी भी वेंडर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वेंडरों ने कहा कि वह चहेतों को बनाए पास की जांच होनी चाहिए। उन्होंने उच्चाधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है।
ग्रेन मार्केट में चुनिंदा आढ़तियों से ही ले रहे सामान
जिन वेंडरों के लिए लाइसेंस बनाए गए हैं, वह ग्रेन मार्केट में कुछ चुनिंदा आढ़तियों से ही सामान ले रहे हैं। अन्य व्यापारियों के द्वारा जब इसका विरोध किया गया तो उन्होंने बताया कि वह जिस आढ़ती ने उनका लाइसेंस बनवाया है, वह उसी के यहां से ही सामान लेंगे, जबकि ग्रेन मार्केट के सभी आढ़तियों से यूटी प्रशासन ने दुकान खोलने की अपील की है, जिससे सामान की किसी प्रकार से कोई किल्लत न हो सके।
25 रुपये का प्याज 40 में बिका
सीटीयू की 90 से अधिक बसों में ग्रेन मार्केट में एक ही आढ़ती से आलू प्याज की खरीद की गई। इसके पीछे मार्केट कमेटी के कुछ सूत्रों ने बताया कि आलू प्याज के लगभग 2500-3000 बोरों की खरीद हुई। इसमें जो प्याज 25 रुपये प्रति किलो का था, उसके लिए 40 रुपये प्रति किलो में बेचा गया। अन्य आढ़तियों में इसको लेकर खासा रोष है। वह अब दुकानों को बंद करने की योजना बना रहे हैं।
पास बनाए जाने में किसी प्रकार का कोई पक्षपात नहीं किया गया है। जो वेंडर पहले आ गए थे, उनके पास बना दिए गए। साथ ही ग्रेन मार्केट के सभी आढ़तियों के साथ मार्केट कमेटी की ओर से समान व्यवहार किया जा रहा है।
-जरनैल सिंह मावी, सचिव, ग्रेन मार्केट, चंडीगढ़
25 रुपये का प्याज 40 में बिका
सीटीयू की 90 से अधिक बसों में ग्रेन मार्केट में एक ही आढ़ती से आलू प्याज की खरीद की गई। इसके पीछे मार्केट कमेटी के कुछ सूत्रों ने बताया कि आलू प्याज के लगभग 2500-3000 बोरों की खरीद हुई। इसमें जो प्याज 25 रुपये प्रति किलो का था, उसके लिए 40 रुपये प्रति किलो में बेचा गया। अन्य आढ़तियों में इसको लेकर खासा रोष है। वह अब दुकानों को बंद करने की योजना बना रहे हैं।
पास बनाए जाने में किसी प्रकार का कोई पक्षपात नहीं किया गया है। जो वेंडर पहले आ गए थे, उनके पास बना दिए गए। साथ ही ग्रेन मार्केट के सभी आढ़तियों के साथ मार्केट कमेटी की ओर से समान व्यवहार किया जा रहा है।
-जरनैल सिंह मावी, सचिव, ग्रेन मार्केट, चंडीगढ़