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खतरे में पंजाब यूनिवर्सिटी की सुरक्षा: भर्ती नहीं किए जा रहे सुरक्षाकर्मी, चार-चार बिल्डिंग एक के हवाले
Tue, 25 Mar 2025 12:25 PM IST
निवेदिता वर्मा
मोनिका नागर, संवाद, चंडीगढ़
मोनिका नागर, संवाद, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 25 Mar 2025 12:25 PM IST
सार
चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में केवल 250 सुरक्षाकर्मी हैं। इनके जिम्मे 20 हजार से अधिक लोगों की सुरक्षा है।
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पंजाब यूनिवर्सिटी की इमारत, जिसका जिम्मा एक सुरक्षाकर्मी पर है।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी की सुरक्षा रामभरोसे चल रही है। 2014 में यहां करीब 400 सिक्योरिटी गार्ड तैनात थे, लेकिन इनकी संख्या घटकर अब लगभग 250 रह गई है।
कैंपस में विद्यार्थी, प्रोफेसर और नॉन टीचिंग स्टाफ की सुरक्षा दांव पर लगी है। इनकी संख्या करीब 20 हजार है। यहां हमेशा अनहोनी की आंशका बनी रहती है। बावजूद इसके रेगुलर भर्ती नहीं की जा रही है। एक सुरक्षाकर्मी चार-चार बिल्डिंग में ड्यूटी दे रहा है।
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कैंपस में विद्यार्थी, प्रोफेसर और नॉन टीचिंग स्टाफ की सुरक्षा दांव पर लगी है। इनकी संख्या करीब 20 हजार है। यहां हमेशा अनहोनी की आंशका बनी रहती है। बावजूद इसके रेगुलर भर्ती नहीं की जा रही है। एक सुरक्षाकर्मी चार-चार बिल्डिंग में ड्यूटी दे रहा है।
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सुरक्षाकर्मी भी परेशान
संख्या कम होने के कारण केवल विद्यार्थियों की सुरक्षा ही खतरे में नहीं है बल्कि सुरक्षाकर्मियों को भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कैंपस में कहीं भी जाने पर पूछताछ नहीं है। बॉयज हॉस्टल में कोई भी आ जा सकता है। कहीं एंट्री तक नहीं की जाती।यह भी पढ़ें: कर्नल से मारपीट का मामला पहुंचा हाईकोर्ट: सीबीआई जांच की मांग, पंजाब डीजीपी बोले-इसे सेना बनाम पुलिस न बनाएं
चार माह पहले नशे की ओवरडोज से हुई थी छात्र की माैत
चार महीने पहले यहां एक छात्र की नशे की ओवरडोज से मौत हो गई थी, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए थे कि बाहरी लोग पीयू परिसर में कैसे दाखिल हुए। चार महीने बाद भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने में कोई सुधार नहीं किया गया। यहां विद्यार्थियों के वाहन भी चोरी हो चुके हैं। डेंटल विभाग में भी पाइपों की चोरी हो चुकी है। सुरक्षाकर्मियों को न तो वीकली ऑफ मिल पाता है और न ही आराम। ओवरटाइम कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक होता है, लेकिन पीयू में यह अनिवार्य है।मानसिक रूप से परेशान होकर एक कर्मी ने की थी आत्महत्या
गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को अजीब समस्या झेलनी पड़ रही है। यदि बाहरी लोग गेट पर आते हैं और उन्हें रोकने के दौरान अगर मामला बढ़ता तो यूनिवर्सिटी इसकी जिम्मेदारी नहीं लेती। सुरक्षाकर्मियों को थाने के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई साल पहले मानसिक रूप से परेशान होकर एक कर्मचारी ने आत्महत्या तक कर ली थी।लाखों रुपये का कर्मचारियों को लगाया जा रहा चूना
पीयू नियमों के अनुसार यदि कोई कर्मचारी आठ घंटे से ज्यादा काम करता है तो प्रति घंटे के हिसाब से अतिरिक्त भुगतान किया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि नॉर्मल उन्हें 112 रुपये प्रति घंटा मिलते हैं। ओवरटाइम के उन्हें 224 प्रति घंटा के हिसाब से 4 घंटे के 896 रुपये मिलने चाहिए, लेकिन 45 रुपये के हिसाब से उन्हें केवल 180 रुपये दिए जा रहे हैं। एक कर्मी को एक दिन के 716 रुपये नहीं दिए जा रहे हैं। यदि 250 कर्मचारियों की बात करें तो यह एक दिन के 1,79,000 रुपये होते हैं। एक महीने में यह आंकड़ा 53.70 लाख रुपये पहुंच जाता है। लंबे समय से नौकरी करने के वजह से अब उनको पास कहीं दूसरी जगह काम करने का विकल्प नहीं है। ऐसे में कर्मी यहां काम करने को मजबूर हैं।विद्यार्थियों की सुरक्षा करने के लिए पीयू प्रतिबद्ध है। सुरक्षाकर्मियों की नई भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही नए कर्मियों की भर्ती की जाएगी। -डॉ. युजवेंद्रपाल वर्मा, पीयू रजिस्ट्रार