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Hindi News ›   Chandigarh ›   Second wave of Corona has affect people below age of 45 

संकट : 45 से कम उम्र के लोगों को चपेट में ले रहा कोरोना, ऑक्सीजन की कमी बनी बड़ी मुसीबत 

Mon, 19 Apr 2021 10:03 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 19 Apr 2021 10:03 AM IST
सार

अस्पताल में भर्ती 244 मरीजों में से 80 प्रतिशत से ज्यादा मरीज 45 वर्ष से कम उम्र के हैं। उनमें से 90 प्रतिशत मरीज शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घटने की समस्या से जूझ रहे हैं।

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Second wave of Corona has affect people below age of 45 
चंडीगढ़ के सेक्टर आठ में टीका लगवाते दिव्यांग कर्मचारी महेंद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर में 45 वर्ष से कम उम्र के लोग भी तेजी से संक्रमित हो रहे हैं। पॉजिटिव होने वाले 90 प्रतिशत मरीजों के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने की समस्या आ रही है, जो चिंता का विषय है। चंडीगढ़ की स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कंग का कहना है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन के प्रबंधन के लिए समुचित व्यवस्था की गई है। ऐसे में जरूरी है कि मरीज स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करें और संक्रमित होने के बाद स्थिति बिगड़ने पर घर में रहने की बजाय तत्काल अस्पताल में भर्ती हो जाएं।
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पीजीआई में कोविड अस्पताल के प्रभारी प्रो. जीडी पुरी ने बताया कि अस्पताल में भर्ती 244 मरीजों में से 80 प्रतिशत से ज्यादा मरीज 45 वर्ष से कम उम्र के हैं। उनमें से 90 प्रतिशत मरीज शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घटने की समस्या से जूझ रहे हैं। प्रो. पुरी का कहना है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि कोरोना की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा युवा संक्रमण की चपेट में हैं। ऑक्सीजन की कमी के चलते मृत्यु दर तेजी से बढ़ रही है।
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पीजीआई के आईसीयू में केवल एक बेड खाली

प्रो. जीडी पुरी ने बताया कि मौजूदा समय में पीजीआई कोविड-19 अस्पताल के आईसीयू वार्ड में महज एक बेड खाली है। 53 में से 52 बेड पर कोरोना के गंभीर मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। वहीं, ऑक्सीजन वाले 200 बेड में से 192 पर मरीज भर्ती हैं। ऑक्सीजन वाले सिर्फ 8 बेड खाली हैं। प्रो. पुरी का कहना है कि स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। 
 
इसका रखें ध्यान
डॉ. कंग ने बताया कि बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के ऑक्सीजन के स्तर में कमी हो जाती है। ऐसे में इनके कोरोना पॉजिटिव होने पर उन्हें तत्काल डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति में यह 90 से 100 मिलीमीटर के बीच रहता है। शरीर में ऑक्सीजन के एक खास स्तर की जरूरत होती है ताकि वह अच्छी तरह अपना काम कर सके। ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर फेफड़ों पर दबाव बढ़ने लगता है। इससे स्थिति गंभीर हो जाती है। 

कहीं आपको ये तकलीफ तो नहीं

शरीर में ऑक्सीजन का स्तर 90 से 100 मिलीमीटर होना चाहिए। जब उसका स्तर इससे नीचे जाता है, तब शरीर की नियिमत क्रियाएं बाधित होती हैं, जिसका सबसे पहला असर थकान के रूप में दिखाई देने लगता है। सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। कुछ लोगों की सांस फूलने लगती है। शरीर में रक्त का प्रवाह धीमा पड़ जाता है, जिसकी वजह से बेचैनी और घबराहट बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में दिल की धड़कन असामान्य रूप से बढ़ जाती है। तेज सिरदर्द, सीने में दर्द, देखने में समस्या, सिर चकराना, शरीर का लड़खड़ाना जैसे कई दूसरे लक्षण भी ऑक्सीजन की कमी की ओर इशारा करते हैं। 

ऑक्सीजन की कमी का ये भी है कारण
रक्त में ऑक्सीजन का स्तर अचानक कम हो जाना हवा में ऑक्सीजन कम होने के चलते भी हो सकता है। अगर फेफड़े ठीक तरह से काम नहीं करते तो भी यह समस्या हो सकती है। यदि फेफड़ों तक रक्त का संचार ठीक तरह नहीं हो पाता तो भी शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। जो लोग शारीरिक रूप से क्रियाशील नहीं रहते उनके शरीर में भी ऑक्सीजन का स्तर कम होता है। इसकी कमी का संबंध हमारे खानपान से भी है। 

बचाव के लिए ये है जरूरी
नेशनल आयुष मिशन के नोडल ऑफिसर डॉ राजीव कपिला ने बताया कि फेफड़ों को मजबूत रखने के लिए प्रतिदिन 10 से 15 मिनट अनुलोम-विलोम अवश्य करें। इसके अलावा सभी प्राणायाम पांच-पांच मिनट करना भी फेफड़े के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके साथ ही हल्दी, गिलोय, काली मिर्च, दालचीनी, तुलसी और मुनक्के का सेवन भी फेफड़े को मजबूती प्रदान करता है।
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