कैग की रिपोर्ट में खुलासाः एससी-ओबीसी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति आवंटन में करोड़ों का घोटाला
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हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग के कैग ऑडिट में दस करोड़ रुपये से अधिक का एससी-ओबीसी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाला उजागर हुआ है। कैग की संशोधित ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार महेंद्रगढ़ के अटेली स्थित रोहतास डिग्री कॉलेज और रोहतास इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ने दस करोड़ 85 लाख रुपये की छात्रवृत्ति उच्च शिक्षा विभाग से कपट पूर्ण तरीके से हासिल की है।
ये दोनों संस्थान 2014-17 के दौरान एमडीयू रोहतक और इसके बाद इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के साथ संबद्ध हैं। इन संस्थानों के बैंक स्टेटमेंट और कुछ चेक के काउंटर स्लिप के अनुसार यह पाया गया कि 2014-18 के दौरान एससी-ओबीसी वर्ग के छात्रों के लिए दस करोड़ 85 लाख रुपये बतौर छात्रवृत्ति दिए गए। कैग ने जांच में पाया कि उच्च शिक्षा विभाग की छात्रवृत्ति शाखा ने कॉलेजों के छात्रवृत्ति दावों के वास्तविक सत्यापन के लिए कोई दस्तावेज बना ही नहीं रखा था।
यहां तक कि फाइलें भी बेतरतीब ढंग से मिली। कैग ने दोनों विश्वविद्यालयों से कॉलेजों में भर्ती सभी छात्रों का पंजीकरण डाटा प्राप्त किया। जब छात्रवृत्ति हासिल कर चुके छात्रों के साथ डाटा का मिलान किया गया तो पाया कि दोनों कॉलेजों ने धोखाधड़ी से छात्रवृत्ति पाई है। 2549 छात्रों जिनका विश्वविद्यालयों ने पंजीकरण किया ही नहीं, उन्हें और 304 सामान्य व अन्य श्रेणियों के छात्रों को 8.28 करोड़ की छात्रवृत्ति प्रदान कर दी।
जांच में 550 अन्य छात्रों को किए गए 1.77 करोड़ रुपये के भुगतान का पंजीकरण डाटा तो मिला, लेकिन इन सभी के पाठ्यक्रम अलग-अलग पाए गए। इसके अलावा विभिन्न कॉलेजों के 2425 छात्रों को 1.77 करोड़ रुपये के भरण पोषण भत्ते का भुगतान भी विफल रहा है।
प्रधान महालेखाकार की जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं
हरियाणा के प्रधान महालेखाकार लेखा परीक्षा हरियाणा ने बीते वर्ष 23 अक्टूबर को ऑडिट जांच रिपोर्ट उच्चतर शिक्षा विभाग के महानिदेशक को कार्रवाई के लिए भेज दी थी। अभी तक महानिदेशक कार्यालय ने गलत तरीके से हासिल की गई छात्रवृत्ति मामले में कार्रवाई की है या नहीं, कैग को कोई जवाब नहीं भेजा है।