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पंजाब सरकार VS राज्यपाल: सत्यपाल जैन बोले- CM से जानकारी मांगना राज्यपाल का सांविधानिक अधिकार

Thu, 16 Feb 2023 01:01 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 16 Feb 2023 01:01 AM IST
सार

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि राज्यपाल 15 दिन बाद केंद्र को पूरे घटनाक्रम पर रिपोर्ट भेज सकते हैं, जैसा कि वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अन्य मामलों में भी करते हैं। राज्यपाल इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं, यह उनका विशेषाधिकार है।

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Satyapal Jain said it is constitutional right of Governor to seek information from CM
Punjab news - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच छिड़ा विवाद शांत होने के फिलहाल कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे। हालांकि बुधवार को राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा मंगलवार को राज्यपाल की नियुक्ति की प्रकिया पर सवाल उठाने और राज्यपाल द्वारा मांगी गई जानकारी देने से इन्कार करने के बाद सोशल मीडिया पर सांविधानिक नियमों पर चर्चा शुरू हो गई।

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एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान, राज्यों के प्रशासन संबंधी संविधान के अनुच्छेद 167 का विस्तृत ब्योरा साझा करते हुए कहा कि संविधान में राज्यपाल को असीमित शक्तियां दी गई हैं और वह संबंधित राज्य के सांविधानिक मुखिया होने के नाते मुख्यमंत्री से प्रशासन संबंधी मामलों की जानकारी मांग सकते हैं। अनुच्छेद 167 के तहत मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य बन जाता है कि वह राज्यपाल को अपनी कैबिनेट के सभी फैसलों की जानकारी मुहैया कराएं।
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मुख्यमंत्री मान और राज्यपाल पुरोहित के बीच उपजे विवाद पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि राज्यपाल ने प्रिंसिपलों की चयन प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी थी, जिसे मुहैया कराने से इन्कार की कोई जरूरत नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य में मुख्यमंत्री अपनी सरकार के फैसलों के बारे में राज्यपाल को सूचना देते हैं, जो सांविधानिक मर्यादा है। मुख्यमंत्री मान का व्यवहार संदेह बढ़ाता है कि वह जवाब देने से क्यों बच रहे हैं? विवाद को देखकर यह भी लगता है कि मुख्यमंत्री मान को अफसर गुमराह कर रहे हैं।
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राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री से 15 दिन में जवाब देने अन्यथा कानूनी राय लेकर कदम उठाने की चेतावनी दिए जाने के बारे में, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि राज्यपाल 15 दिन बाद केंद्र को पूरे घटनाक्रम पर रिपोर्ट भेज सकते हैं, जैसा कि वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अन्य मामलों में भी करते हैं। राज्यपाल इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं, यह उनका विशेषाधिकार है।

यह कहता है संविधान का अनुच्छेद 167
राज्यों के प्रशासन संबंधी संविधान के अनुच्छेद 167 में, राज्यपाल को सूचना देने आदि के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य बताए गए हैं। इसके अनुसार, प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य होगा-

  • राज्य के मामलों के प्रशासन और कानून के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों को राज्य के राज्यपाल को सूचित करना।
  • राज्य के मामलों के प्रशासन और कानून के प्रस्तावों से संबंधित ऐसी जानकारी प्रस्तुत करने के लिए जो राज्यपाल मांगे और अगर राज्यपाल को आवश्यकता हो तो किसी भी मामले को मंत्रिपरिषद के विचारार्थ प्रस्तुत करना, जिस पर किसी मंत्री द्वारा निर्णय लिया गया हो लेकिन जिस पर मंत्रिपरिषद द्वारा विचार न किया गया हो।
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