सरेंडर को क्यों मजबूर हुए रामपाल, 3 कारण
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पिछले पंद्रह दिनों से समर्थकों के बल पर 30 हजार जवानों से टक्कर ले रहे रामपाल आखिरकार सरेंडर करने को क्यों मजबूर हो गए, इसके पीछे मुख्य 3 कारण हैं। पहला मुख्य कारण ये था कि उनके अपने ही समर्थक दो फाड़ हो गए। पुलिस महकमे की एक दिन की कार्रवाई ने ही उनके हौसलों को तोड़ दिया और हालात यह हो गए कि वह आश्रम के अंदर आपस में भिड़ गए।
दो धड़ों में बंटे संत के समर्थकों में एक धड़ा बाबा के समर्पण के पक्ष में आया तो दूसरा विरोध में खड़ा हो गया। संत के समर्पण का विरोध करने वाले कट्टर समर्थकों ने दूसरे धड़े के लोगों के बाहर निकलने का भी विरोध किया। यही नहीं उन्हें एनकाउंटर तक की धमकी दी गई और असलहे के बल पर रोका गया।
कुछ अनपढ़ समर्थकों को तो यह भी बताया गया कि बाहर धारा 144 लगी है पुलिस तुम्हारा एनकाउंटर कर देगी। लेकिन आश्रम में लगातार बढ़ती जा रही परेशानियों और पुलिसिया कार्रवाई के डर ने समर्थकों को तोड़ दिया। इसी एकता को कमजोर होता देख बाबा का बेटा, भाई और प्रवक्ता भी बाहर आ गए, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
कट्टर समर्थक पुलिस से मोर्चा ले रहे थे
दूसरा कारण ये पता चला कि आश्रम में संत के कुछ कट्टर समर्थक हैं जो पुलिस से सीधा मोर्चा लेने को तैयार थे। आश्रम के अंदर तैयारी भी कुछ इसी तरह की गई थी।
उन्होंने वहां भारी मात्रा में पेट्रोल बम, बंदूक, राइफल, रिवॉल्वर और बोरियों में कारतूस भरकर रखे थे। हजारों की संख्या में देशी असलहे भी मौजूद थे। लेकिन कुछ समर्थकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
इस पर उन्हें डराया और धमकाया गया और यहां तक कहा गया कि यदि आप बाबा का साथ नहीं देंगे तो नरक में जाएंगे और बाबा के लिए जान दोगे तो स्वर्ग मिलेगा। लेकिन दूसरे धड़े के समर्थकों ने इस बात का विरोध किया।
समर्थकों को पुलिस से बदला लेने को उकासाया
तीसरा मुख्य कारण आश्रम से बाहर निकले यूपी के खेकड़ा के रहने वाले राजकुमार ने अमर उजाला को बताया। राजकुमार ने कहा कि वह छह दिन पहले बाबा के दर्शन करने आए थे।
आज तक बाबा के दर्शन तो नहीं हुए, लेकिन आश्रम में मौजूद समर्थकों ने बाबा के लिए पुलिस से बदला लेने के लिए उकसाया। उन्होंने कहा कि पूरा-पूरा दिन बाबा के भजन सुनाकर उनकी बातें बताकर लोगों को उकसाया जाता था।
साथ पुलिस को बहुत ही खौफनाक बताया जाता था। यह भी कहा जाता था कि पुलिस संत और उनके समर्थकों के खिलाफ साजिश रच रही है। लेकिन हजारों लोग इसके विरोध में उतर आए और आपस में मारपीट शुरू हो गई। इसके बाद ही कुछ लोगों आश्रम के मुख्य द्वार का ताला तोड़ दिया और लोग धड़ाधड़ बाहर निकलने लगे।