Haryana News: अब 19 कार्य ही करा सकेंगी ग्राम पंचायतें, अधिकार छिनने से नाराज सरपंच फिर आंदोलन को तैयार
हरियाणा सरकार की ओर से पंचायतों को लेकर लगातार लिए जा रहे नए फैसलों को लेकर सरपंच एक बार फिर उखड़ गए हैं। सरपंच एसोसिएशन ने एक बार फिर बड़े आंदोलन के लिए नौ जुलाई को पानीपत के समालखा में प्रदेशस्तरीय बैठक बुलाई है।
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हरियाणा सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं को लेकर एक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषदों को अलग-अलग विकास कार्य आवंटित कर दिए हैं। सरपंचों के अधिकारों पर और शिकंजा कसते हुए ग्राम पंचायतों को अब केवल 19 कार्य कराने तक सीमित कर दिया गया है। साथ ही पंचायत समिति को 7 और जिला परिषद को 13 विकास कार्य कराने के लिए अधिकृत किया गया है। इस संबंध में विकास एवं पंचायत विभाग के महानिदेशक ने पत्र जारी किया है।
नए फैसले के अनुसार अब ग्राम पंचायतें अपने पास उपलब्ध फंड से मर्जी के अनुसार विकास कार्य नहीं करा सकेंगी। सिर्फ निर्धारित 19 विकास कार्यों में से ही कार्य कराए जा सकेंगे। खास बात ये है कि इन 19 कार्यों में अधिकतर कार्य मरम्मत और देखरेख के हैं। इससे पहले ग्राम पंचायतें अपनी जरूरत के अनुसार सभी प्रकार के विकास कार्य करा सकती थीं।
विकास कार्यों में विधायकों और सरकार का भी होगा दखल
एक दिन पहले ही प्रदेश सरकार के मंत्रिमडल ने पंचायत राज एक्ट 1995 में संशोधन किया है। इसके तहत अब पंचायतों में विधायकों का भी दखल होगा। विकास कार्यों के लिए दी गई सहायता राशि से सरकार की सिफारिश के अनुसार कार्य कराने होंगे। इसमें भी पंचायत अपनी मर्जी नहीं चला सकेगी। इसके अलावा सरकार ने गांव के आम व्यक्ति को भी सिफारिश करने का हक दिया है। इसके लिए वह सरकार से विकास कार्य के लिए सिफारिश कर सकेगा। अगर सरकार को लगता है कि प्रस्तावित विकास कार्य सार्वजनिक हित का है तो सरकार पंचायत को सिफारिश भेजेगी और वह कार्य पंचायत को कराना होगा।
सरपंच एसोसिएशन फिर करेगी आंदोलन, नौ जुलाई को बुलाई बैठक
हरियाणा सरकार की ओर से पंचायतों को लेकर लगातार लिए जा रहे नए फैसलों को लेकर सरपंच एक बार फिर उखड़ गए हैं। सरपंच एसोसिएशन ने एक बार फिर बड़े आंदोलन के लिए नौ जुलाई को पानीपत के समालखा में प्रदेशस्तरीय बैठक बुलाई है। बैठक में सभी ब्लॉक और जिला अध्यक्षों के साथ-साथ सरपंच एसोसिएशन के प्रदेश कार्यकरिणी के पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। बैठक में ई टेंडरिंग समेत पंचायतों से जुड़े सरकार के सभी फैसलों की समीक्षा की जाएगी और विधायकों को पंचायत निधि से विकास कार्य कराने का अधिकार देने की खिलाफ आंदोलन के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।
पंचायतें करा सकेंगी केवल 19 कार्य
गली, नाली, गऊ घाट और स्वागत द्वार का निर्माण, ड्रेन, ग्राम सचिवालय, चौपाल की मरम्मच, श्मशान भूमि का रखरखाव, पानी सप्लाई के ट्यूबवेल की देखरेख, तालाबों की खोदाई व उनका रखरखाव, कूड़ा उठवाना, ड्रेन की सफाई, सरकारी संपत्ति का रखरखाव, सार्वजनिक शौचालयों की सफाई, गलियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट रखरखाव, कंडम भवनों को गिरवाना, फिरनियों की मरम्मत और पंचायत संपत्तियों की देखरेख।
पंचायत समिति ये कार्य करा सकेंगी
योगशाला, पार्क व व्यायामशालाओं की देखरेख, बायोगैस प्लांट का संचालन, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का प्रबंधन, पार्क रखरखाव व पौधरोपण, लिक्विड वेस्ट प्रोजेक्ट का रखरखाव, सड़क निर्माण और फर्नीचर खरीद।
जिला परिषद के कार्य
पीएचसी व सब हेल्थ सेंटर की मरम्मत, आंगनबाड़ी का निर्माण व रखरखाव, हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड से ट्रांसफर 5 करम की रोड की मरम्मत, ग्राम पंचायत में स्ट्रीट लाइट लगवाना, ई-लाइब्रेरी, महिला संस्कृति केंद्र, इंडोर जिम की स्थापना, गांवों में बस क्यू सेल्टर निर्माण व देखरेख, चौपाल निर्माण, 2.5 एकड़ तक के तालाब का विकास, खेल स्टेडियम, नाला, ड्रेन निर्माण व ड्रेन ढकने का काम।
यह पंचायतों को खत्म करने की साजिश है। एक-एक करके पंचायतों के अधिकार छीने जा रहे हैं। पंचायतों में विधायकों के सीधे दखल से राजनीति और गुटबाजी बढ़ेगी। गांवों का भाईचारा खराब होने की आशंका है। सरकार तुरंत प्रभाव से इस फैसले को वापस ले। नौ जुलाई को प्रदेशस्तरीय बैठक में आगामी रणनीति को लेकर मंथन किया जाएगा। रणबीर सिंह समैण, प्रदेशाध्यक्ष, सरपंच एसोसिएशन।