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जज नोट कांड के मुख्य आरोपी संजीव बंसल का निधन

Tue, 13 Dec 2016 01:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 13 Dec 2016 01:55 AM IST
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Sanjeev Bansal death in Judge cash case
शव - फोटो : Demo Pic

आठ वर्ष पुराने चर्चित जज नोट कांड मामले में मुख्य आरोपी और हरियाणा के एडीशनल एडवोकेट जनरल रहे संजीव बंसल का सोमवार देर शाम निधन हो गया। 

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वह काफी समय से ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित थे, जिसका इलाज भी चल रहा था। बीमारी के कारण बंसल कुछ महीनों से कोर्ट भी नहीं आ पा रहे थे। कुछ समय पहले ही बंसल का ऑपरेशन भी हुआ था।
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देश की न्याय प्रणाली को हिला देने वाले इस हाई-प्रोफाइल जज नोट कांड केस की सुनवाई सीबीआई की विशेष अदालत में चल रही है। अदालत में केस ट्रायल की प्रक्रिया पर चल रहा है। 
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केस की सुनवाई भी बंसल के अस्वस्थ होने की वजह से सुबह के वक्त अगली तिथि 30 जनवरी के लिए टल गई थी। इसमें अभियोजन पक्ष की ओर से गवाही दी जानी थी। मामले में जनवरी 2014 में आरोप तय किए गए थे।

आरोप तय किए जाने के बाद ही मामले का ट्रायल शुरू हुआ था। यह केस पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की महिला जज रही निर्मला यादव के इसमें सह आरोपी होने की वजह से भी सुर्खियों में रहा।

जानिए क्या था आरोप

Sanjeev Bansal death in Judge cash case
कोर्ट - फोटो : file photo

पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक 13 अगस्त, 2008 की रात को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील संजीव बंसल जो उस समय हरियाणा एडिशनल एडवोकेट जनरल के पद पर कार्यरत थे, ने अपने मुंशी को न्यायाधीश यादव के यहां 15 लाख रुपये देने के लिए भेजा था, लेकिन मुंशी ने गलती से यह रकम अन्य न्यायाधीश निर्मल जीत कौर के यहां दे दी थी। 

इस पर चंडीगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर संजीव बंसल, मुंशी प्रकाशराम, राजीव और निर्मल सिंह को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि चार्जशीट में प्रकाशराम का नाम हटा दिया गया था।  

न्यायाधीश यादव का नाम आने पर मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई ने मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति न मिलने की सूरत में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी, लेकिन सीबीआई अदालत ने जांच एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए मामले की जांच जारी रखने के निर्देश दिए थे।

बाद में सीबीआई ने 4 मार्च, 2011 को यानी ठीक उसी दिन चार्जशीट दायर की थी, जिस दिन यादव उत्तराखंड हाईकोर्ट से सेवानिवृत हुई थी। सीबीआई का आरोप था कि15 लाख रुपये की राशि सोलन लैंड डील के लिए नहीं थी, बल्कि यह वह कथित बेनाम पैसा था, जिसका इस्तेमाल 11 मार्च, 2008 को जस्टिस यादव के पंचकूला के सेक्टर-16 की एक प्रॉपर्टी के हक में फैसले देने के लिए था।

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