संगरूर उपचुनाव: आप सरकार की लोकप्रियता का पहला इम्तिहान, मूसेवाला हत्याकांड, कानून-व्यवस्था के सहारे विपक्ष जीतना चाहता मैदान
आम आदमी पार्टी (आप) के लिए इस उपचुनाव में सबसे चिंता का मुद्दा गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का है, जिसे लेकर युवा वर्ग आप सरकार की ओर से मूसेवाला की सुरक्षा घटाए जाने के फैसले को जिम्मेदार मान रहा है।
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संगरूर लोकसभा उपचुनाव आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं, जिसमें आप सरकार को राज्य में अपनी उस लोकप्रियता को साबित करना होगा, जिसके दम पर पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 117 में 92 सीटें जीतते हुए प्रदेश के पारंपरिक सियासी दलों को सत्ता से बाहर कर दिया था। संगरूर लोकसभा सीट मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफा देने के कारण खाली हुई है और इस सीट पर आप सरकार के अलावा व्यक्तिगत तौर पर मुख्यमंत्री की साख भी दांव पर है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बने अभी तीन माह ही हुए हैं लेकिन इस अवधि के दौरान प्रसिद्ध गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या, तीन कबड्डी खिलाड़ियों की हत्या, पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस मुख्यालय पर हमले जैसी घटनाओं ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने का विपक्ष को मौका दे दिया है। इस दौरान गंभीर बिजली संकट भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। इसके बावजूद इस उपचुनाव में आप का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है, जिसका मुख्य कारण है कि विपक्ष के पास उपरोक्त मुद्दों के अलावा कोई सियासी मुद्दा नहीं है।
तीन माह पुरानी सरकार पर जनता से वादे पूरे न करने का आरोप भी नहीं लगाया जा सकता। प्रदेश का वार्षिक बजट जून के अंतिम सप्ताह में पेश होना है, इसलिए वित्तीय हालात भी मुद्दा नहीं बन पा रहे। ऐसी स्थिति में विपक्षी दलों ने भावनात्मक मुद्दों का सहारा लिया है, जिनके बहुत असरदार रहने की उम्मीद न के बराबर है। विपक्षी दलों के पास अपने-अपने मुद्दे तो हैं लेकिन आप सरकार के खिलाफ प्रदेश की कानून-व्यवस्था और बिजली संकट के अलावा कोई मुद्दा नहीं है।
कांग्रेस ने इस उपचुनाव में दलवीर सिंह गोल्डी को उम्मीदवार बनाया है, जिन्हें विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शिकस्त दी थी। पार्टी उम्मीद कर रही है कि भगवंत मान की अनुपस्थिति में गोल्डी यह उपचुनाव जीत जाएंगे। वहीं पार्टी ने सिद्धू मूसेवाला की हत्या को भुनाने की कोशिश करते हुए मूसेवाला के अंतिम संस्कार और उनकी समाधि के फोटो का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में शुरू कर दिया था, जिस पर सोमवार को मूसेवाला के परिजनों एतराज जता दिया है।
शिअद
दूसरी ओर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) जेलों में बंद सिंहों की रिहाई को मुद्दा बनाकर उपचुनाव में उतरा है। पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में सजा काट रहे बलवंत सिंह राजोआणा की बहन कमलदीप कौर को टिकट दिया है और चुनाव प्रचार में बलवंत सिंह राजोआणा के फोटो का इस्तेमाल शुरू किया है।
भाजपा
भाजपा ने भी उपचुनाव को अपने बूते पर लड़ने का फैसला करते हुए कांग्रेस छोड़कर पार्टी में आए केवल सिंह ढिल्लो को टिकट दिया है। हालांकि भाजपा को इसका सीधा नुकसान यह है कि टिकट का दावा करने वाले पार्टी के पुराने वफादारों को साइड लाइन किया गया है, जिससे कार्यकर्ता नाराज हैं। लेकिन भाजपा इस सीट पर जीत के बजाय अन्य विपक्षी दलों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर अगले लोकसभा चुनाव के लिए खुद को तैयार करना चाह रही है।
आप
आम आदमी पार्टी (आप) के लिए इस उपचुनाव में सबसे चिंता का मुद्दा गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का है, जिसे लेकर युवा वर्ग आप सरकार की ओर से मूसेवाला की सुरक्षा घटाए जाने के फैसले को जिम्मेदार मान रहा है। आप के लिए इस सीट पर जीत इसलिए भी प्रतिष्ठा का सवाल है, क्योंकि इस सीट से मुख्यमंत्री भगवंत मान दो बार सांसद चुने गए हैं और इस समय राज्य में आप सरकार के मुखिया भी भगवंत मान ही हैं। दूसरी ओर, पंजाब पुलिस भी मूसेवाला के हत्यारों को पकड़ने में अब तक नाकाम रही है। इसे देखते हुए आप के प्रत्याशी को कुछ नुकसान हो सकता है, हालांकि पार्टी ने छह मंत्रियों-विधायकों को आप प्रत्याशी गुरमेल सिंह की मदद के लिए मैदान में उतार दिया है।