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समझौता ब्लास्ट केस में 14 मार्च को सुनाया जाएगा फैसला, असीमानंद समेत चारों आरोपी हुए पेश

Mon, 11 Mar 2019 05:00 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत/पंचकूला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत/पंचकूला Published by: ajay kumar Updated Mon, 11 Mar 2019 05:00 PM IST
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Samjhauta Express Blast Verdict, Samjhauta Express Bombings, Aseemanand
समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट

बारह साल पहले पानीपत के पास समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में हुए बम धमाके में सोमवार को फैसला आना था। ऐन वक्त पर पाकिस्तान से आई एक मेल के बाद पंचकूला की विशेष एनआईए अदालत ने फैसला टाल दिया। अदालत ने इस संबंध में एनआईए को नोटिस देकर जवाब मांगा है। अब इस मामले की सुनवाई 14 मार्च को होगी। 

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इससे पहले मुख्य आरोपी असीमानंद के साथ अन्य तीनों आरोपियों लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी और कमल चौहान को अदालत में शाम चार बजे पेश किया गया। इसके बाद पानीपत के एडवोकेट मोमिन मलिक ने कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की। पाकिस्तान की महिला एडवोकेट रोहिला ने मेल भेज कर अपनी अर्जी एडवोकेट मलिक के माध्यम से विशेष अदालत में लगाई है।
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 इस अर्जी में रोहिला ने कहा है कि समझौता ब्लास्ट में उनके पिता की भी मौत हुई थी। उनके पिता के साथ उनके कुछ दोस्त भी ट्रेन में सफर कर रहे थे, जो बच गए। वह सीआरपीसी की सेक्शन-311 के तहत गवाही और आरोपियों की पहचान कराना चाहती हैं। अर्जी में यह भी कहा गया है कि केस को लेकर उन्हें अब तक किसी तरह का कोई समन नहीं मिला है। इस अर्जी पर करीब ढाई घंटे बहस हुई। 
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बचाव पक्ष ने दी दलील, दूतावास के जरिये भेजे थे समन 
एनआईए कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील की ओर से दलील दी गई कि इस स्टेज में आकर यह बात सामने आ रही है जबकि पहले भी मीडिया और दूतावास के जरिए गवाहों को समन भेजे गए थे। इसके बाद भी कोई पाकिस्तानी नागरिक गवाही देने के लिए कोर्ट के समक्ष पेश नहीं हुआ। 

गवाहों को बुलाने पर 14 मार्च को होगा फैसला 

एडवोकेट मलिक ने बताया कि सीआरपीसी-311 के तहत गवाहों को गवाही के लिए समन जारी कर बुलाया जाता है। समझौता ब्लास्ट मामले में सुनवाई के लिए इन गवाहों को बुलाया जाएगा या नहीं, इसका फैसला 14 मार्च को हो सकता है। 

68 यात्री मारे गए थे 
समझौता ब्लास्ट में 68 यात्री मारे गए थे, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए थे। मारे गए लोगों में अधिकतर पाकिस्तान के रहने वाले थे।

कोर्ट परिसर के बाहर दिनभर रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था 
समझौता ब्लास्ट मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। सोमवार को विशेष एनआईए अदालत में समझौता ब्लास्ट के मुख्य आरोपी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजेंद्र चौधरी को पेश किया गया। मामले में सोमवार को फैसला आने की उम्मीद के चलते पुलिस का कड़ा पहरा रहा। 

वहीं कोर्ट परिसर में सीआईडी भी सादी वर्दी में तैनात रही। आलाधिकारियों को कोर्ट के बाहर की जानकारी दी गई। कोर्ट के बाहर कमांडो के अलावा पुलिस बल के जवान तैनात रहे। कोर्ट परिसर में बिना चेकिंग के किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया। कोर्ट का फैसला चार बजे आने की उम्मीद थी लेकिन पाकिस्तान से मेल आने के बाद सुनवाई टल गई।

पंचकूला में कोर्ट परिसर के बाहर वकीलों और आम लोगों में चर्चाओं का बाजार दिनभर गर्म रहा। कुछ वकील फैसले का कयास लगाते नजर आए। कुछ बोले की सभी आरोपी बरी होंगे तो कुछ ने सजा होने की बात कही। कोर्ट में आने वाले सुरक्षा कर्मी सहित सभी लोग फैसले पर चर्चा करते रहे। 

यह था मामला 

बता दें कि भारत-पाकिस्तान के बीच सप्ताह में दो दिन चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 में बम धमाका हुआ था। हादसे में 68 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में 16 बच्चे भी शामिल थे। हादसा इतना भीषण था 19 मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई। ट्रेन दिल्ली से लाहौर जा रही थी। धमाके में जान गंवाने वालों में अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक थे। 

एनआईए ने मामले की जांच में 8 लोगों को आरोपी बनाया। इनमें स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी व कमल चौहान के खिलाफ यह मुकदमा एनआईए कोर्ट में चल रहा है, जबकि तीन आरोपी पहले ही भगोड़े करार दिए जा चुके हैं। वहीं, एक आरोपी की मौत हो चुकी है। विस्फोट हरियाणा के पानीपत जिले में चांदनी बाग थाने के अंतर्गत सिवाह गांव के दीवाना स्टेशन के नजदीक हुआ था। 

मामले में कब क्या हुआ 

- भारत-पाकिस्तान के बीच एक सप्ताह में दो दिन चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 में बम धमाका हुआ था।
- 20 फरवरी 2007 को इस मामले की जांच के लिए हरियाणा पुलिस की ओर से एसआईटी का गठन किया गया था। 
- 26 जुलाई 2010 को  मामला एनआईए को सौंपा दिया गया था ।
- एनआईए ने 26 जून 2011 को पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
- चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले में 224 गवाहों के बयान दर्ज हुए थे। इसमें कुल 302 गवाह बनाए गए थे। 

मैं स्पेशल एनआईए कोर्ट को सैल्यूट करता हूं। पाकिस्तान की सरकार को यहां से भेजे गए समन नहीं मिले हैं। मुझे लगता है जो पकड़े गए हैं वो बेकसूर भी हो सकते हैं इसलिए गवाही जरूरी है। मुझे किसी तरह का कोई खतरा नहीं। मैंने कोई सुरक्षा नहीं ली है। -मोमिन खान, अर्जी लगाने वाले वकील

अदालत ने इस अर्जी पर सुनवाई करने के लिए 14 मार्च का दिन मुकर्रर किया है। अब 14 मार्च को तय होगा कि आखिर पाकिस्तान के इन गवाहों को गवाही का मौका मिलेगा या फिर अदालत अब तक की चली सुनवाई के आधार पर अपना फैसला सुनाएगी। -एससी शर्मा, वकील, बचाव पक्ष

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