सतलोक आश्रम कांड: पुलिस जवानों की आपबीती
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सामने से आ रही गोलियों से हर पल मौत दिखाई दे रही थी और आश्रम पर बॉर्डर पर जंग छिड़ने जैसा माहौल था। पुलिस को तो आश्रम में मौजूद महिलाओं और बच्चों की जान की फिक्र थी, लेकिन आश्रम की तरफ के लोगों को किसी की कोई चिंता नहीं थी और अंधाधुंध गोली चलाने के साथ पत्थर फेंके जा रहे थे।
यह कहना है बरवाला के सतलोक आश्रम से रामपाल की गिरफ्तारी करने वाले जवानों का। यहां ड्यूटी पर तैनात हेड कांस्टेबल हवलदार धर्मबीर सिंह ने बताया कि वह डीएसपी शहर जितेंद्र गहलावत के साथ था।
जब वह आश्रम पर पहुंचा तो आश्रम की छतों पर चारों तरफ काले कपड़ों में कमांडो तैनात थे। वह एक बार तो घबरा गया, लेकिन अगले ही पल ड्यूटी संभाली।
'आश्रम से लगातार गोली व पत्थर की बौछार'
हेड कांस्टेबल के अनुसार वह डीएसपी के साथ लगातार आगे बढ़ रहा था। वह आश्रम के काफी नजदीक पहुंचा। इसके बाद रामपाल दास को लेकर चंडीगढ़ हाईकोर्ट और फिर हिसार कोर्ट में पेश करने ले गया। इस पूरे मामले में उसने मौत को काफी नजदीक से देखा, लेकिन वह ड्यूटी से पीछे नहीं हटा।
हेड कांस्टेबल गुलशन सतलोक आश्रम की तरफ से आई ईंट लगने में घायल हो गया। उसके हाथ पर ईंट लगी हुई है। गुलशन ने बताया कि आश्रम से लगातार गोली व पत्थर आ रहे थे। वे खुद को बचा रहे थे। कई बार उसके मन में भी गोली चलाने की आई, लेकिन अधिकारियों के आदेश न होने पर पीछे हट गया। यहां पर चली गोलियों से बॉर्डर पर छिड़ी जंग जैसा लग रहा था।
पुलिस प्रवक्ता अनिल कुमार ने बताया बरवाला आश्रम में तैनात जिला पुलिस के मुलाजिम अभी वापस नहीं आए हैं। अधिकारियों के साथ ड्यूटी पर तैनात कुछ मुलाजिम लौटे हैं। इस पूरे ऑपरेशन में पानीपत पुलिस का कोई हताहत नहीं है।