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हरियाणा: ग्रामीण सफाई कर्मचारियों का बड़ा एलान, 17-18 जुलाई को दुष्यंत चौटाला के आवास पर करेंगे प्रदर्शन
Tue, 13 Jul 2021 01:44 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 13 Jul 2021 01:44 AM IST
सार
ग्रामीण सफाई कर्मचारी हरियाणा के सिरसा स्थित उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के आवास पर 17-18 जुलाई को प्रदर्शन करेंगे। ये कर्मचारी बेगार प्रथा को लादने और मांगें न मानने से नाराज हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर महापड़ाव के बाद भी सरकार चेती नहीं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
विस्तार
बेगार प्रथा लादने और मांगें न मानने से खफा ग्रामीण सफाई कर्मचारी 17-18 जुलाई को उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के सिरसा आवास पर महापड़ाव डालेंगे। सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने महापड़ाव डालने के फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने दुष्यंत चौटाला से मानी हुई मांगों के पत्र जारी करने और बेगार प्रथा लादने का पत्र वापस लेने की मांग की है। साथ ही ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की लंबित मांगों का शीघ्र बातचीत से समाधान करने का आग्रह किया है।
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ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन हरियाणा (सीटू) के प्रदेश अध्यक्ष देवीराम, महासचिव विनोद कुमार, कोषाध्यक्ष मनोज कुमार व उप महासचिव बसाऊराम ने कहा कि 2007 में लगे कर्मियों को पक्का करना तो दूर, अब सरकारी बेगार लेने की तैयारी की जा रही है। 13 मई, 2021 को विभाग के निदेशक ने पत्र जारी कर गली, नाले, पार्क, शौचालय, सरकारी स्कूल, सभी सरकारी भवनों की साफ-सफाई का कार्य लेने के आदेश जारी किया है।
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यूनियन नेताओं ने कहा कि शहरों में 400 की आबादी पर एक कर्मचारी काम करता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में 2000 पर एक और 5000 पर दो कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। कर्मचारियों पर काम का बोझ पहले ही ज्यादा था। अब सरकार ने सरकारी बेगार लादकर और ज्यादा अन्याय और शोषण करने की तैयारी कर ली है।
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ग्रामीण सफाई कर्मियों की मांगों को लेकर 20 फरवरी, 2021 को दुष्यंत चौटाला के साथ वार्ता हुई थी। उसके बाद 24 फरवरी को विकास एवं पंचायत विभाग के महानिदेशक रमेश चंद्र बिढान के साथ बातचीत में अनेक मांगों पर सहमति बनी थी। मगर, सरकार ने उनका आज तक कोई समाधान नहीं किया है। बीते 25 जून को पुन: पत्र लिखते हुए 10 जुलाई तक वार्ता कर मांगों का समाधान करने की मांग की गई थी। आज तक उन्हें समय नहीं दिया गया। महापड़ाव के बाद भी सरकार नहीं चेती तो आंदोलन तेज करने पर मजबूर होंगे।