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अधिकारियों की संवेदनहीनताः सवारियों से भरी बस की जब्त, रात भर ठंड में ठिठुरती रहीं महिलाएं और बच्चे

Wed, 22 Jan 2020 01:33 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Wed, 22 Jan 2020 01:33 AM IST
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RTA impound private bus in Panipat of Haryana
आरटीए द्वारा जब्त की गई बस। - फोटो : अमर उजाला

आरटीए ने सोमवार रात करीब दस बजे एक स्लीपर बस को 50 सवारियों समेत ही इंपाउंड कर पानीपत डिपो की वर्कशॉप में खड़ा कर दिया। बस मालिक पर 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और मंगलवार की सुबह 10 बजे जुर्माना वसूलने के बाद बस को छोड़ा गया। इस दौरान 12 घंटे तक सवारी बस में मौजूद महिला, बुजुर्ग और बच्चा सवारी सात डिग्री सेल्सियस की ठंड में ठिठुरते रहे। 

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इसके बावजूद अधिकारियों इतनी जहमत नहीं उठाई कि उत्तर प्रदेश जा रही इन सवारियों के लिए वैकल्पिक साधन का इंतजाम किया जाए। यात्रियों ने आरटीए अधिकारियों के सामने मिन्नतें की कि बस चालक की गलती का खामियाजा वह क्यों भुगते लेकिन अधिकारियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। सुबह सवारियों ने दूसरी बस पकड़ी और फिर से टिकट लेकर और अपने गंतव्यों तक पहुंच सके। 
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अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे 
इस प्रकरण में अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे। आरटीए अधिकारियों का दो टूक जवाब था कि उनके पास चालन करने का अधिकार है। सवारियों की जिम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया। आरटीए सचिव एडीसी से संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने कॉल उठाना ही उचित नहीं समझा। परिवहन विभाग के एसीएस का कहना था कि कानून के आगे संवेदनाएं काम नहीं करती हैं।

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ओवरलोडिंग और रोड टैक्स जमा नहीं होने पर बस को पकड़ा 

आरटीए अधिकारियों ने सोमवार रात को गश्त के दौरान यूपी नंबर की एक बस जो पंजाब से वाया दिल्ली होते हुए उत्तर प्रदेश जा रही थी उसको पकड़ लिया। बस का ओवरलोडिंग और रोड टैक्स जमा न करने पर बस इंपाउंड कर दिया। बस को उसमें सवार 50 सवारियों समेत पानीपत डिपो के वर्कशॉप में खड़ा कर दिया गया। 

यात्रियों ने अधिकारियों से कई बार मिन्नत करी। उनका कहना था कि इतनी रात को वो कहां जाएंगे, क्योंकि उन्हें कोई साधन नहीं नहीं मिलेगा। ऐसे में आरटीए अधिकारी सवारियों के लिए दूसरी बस उपलब्ध करा सकते थे, जो उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं, इस बारे में आरटीए सचिव एवं एडीसी प्रीति से फोन कर संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

यह बोले अधिकारी
बस के कागजात अधूरे होने पर उसे बंद किया गया था। प्राइवेट बस चालक को ही चालान भरने या सवारियों के लिए दूसरी बस का इंतजाम करने के लिए कहा गया था। -शम्मी शर्मा, आरटीए सह सचिव

रात को ठंड में बस में बैठी सवारियां कानून के लिए कोई मायने नहीं रखती। इस बारे में ट्रांसपोर्ट कमिश्नर से बात करिए।  -एसएन रॉय, एसीएच परिवहन विभाग 


अगर बस का चालन करना था तो दूसरी बस का इंतजाम भी करना था: परिवहन मंत्री
जिन अधिकारियों ने बस में सवार सवारियों के साथ ऐसा किया है, उन्हें खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। अगर अधिकारियों को बस का चालान करना ही था तो सवारियों के लिए दूसरी बस का इंतजाम भी करना बनता है। अन्यथा बस के कागजात अपने पास रखवाकर चालान कर, सवारियों को उनके गंतव्य तक छोड़ना उनका फर्ज था। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - मूलचंद शर्मा, परिवहन मंत्री, हरियाणा सरकार।

पहले भी आरटीए कर चुका है यह कारनामा 
इससे पहले 13 जनवरी को आरटीए ने उत्तर प्रदेश नंबर की एक सवारियों से भरी बस को पकड़ा था। जिसे दोपहर पकड़ने के बाद रात आठ बजे छोड़ा था। इस बस के मालिक पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। ड्राइवर और कंडक्टर पर बगैर वर्दी होने पर 100-100 रुपये का जुर्माना लगाया गया। हालांकि दिन का वक्त होने की वजह से सवारियों को दूसरी बस मिल गई थी। सोमवार की रात भी एक बस को शाम साढ़े चार बजे पकड़कर रात साढ़े 10 बजे छोड़ा गया, इस बस पर भी पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। हालांकि इस बस में सवारियों नहीं थीं।

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