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एक ऐसा गुरुद्वारा, जहां जाना अभी खतरे से खाली नहीं

Fri, 21 Aug 2015 08:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संगरूर/कुल्लू
ब्यूरो/अमर उजाला, संगरूर/कुल्लू Updated Fri, 21 Aug 2015 08:15 AM IST
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Rocks may wreak havoc in Manikaran gurudwara kullu

क्या आप जानते हैं कि हिमाचल में जिस गुरुद्वारा साहिब में इन दिनों हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती थी, वहां जाना खतरे से खाली नहीं। बात हो रही है कुल्लू स्थित मणिकर्ण गुरुद्वारा की। मणिकर्ण गुरुद्वारा और सराय भवन पर अभी खतरा टला नहीं है। पहाड़ी पर अभी भी विशालकाय चट्टानें तबाही मचाने के लिए तैयार हैं। ये चट्टानें कभी भी गुरुद्वारा पर गिर सकती हैं। इस खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने गुरुद्वारा परिसर को सील कर दिया है।

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संभावित खतरे से निपटने के लिए टेक्निकल कमेटी को बुलाया जा रहा है। यह मौके पर पहुंचकर चट्टानों को तोड़ेगी। आने वाले खतरे का खुलासा तब हुआ, जब बुधवार सुबह पहाड़ी पर खतरे को भांपने एसएसबी, एनडीआरएफ के जवान और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने पाया कि दो चट्टानें पहाड़ी से अलग हो चुकी हैं।
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बता दें कि मणिकर्ण गुरुद्वारा में सोमवार को चट्टानों ने भारी तबाही मचाई थी। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई थी, जो पंजाब के गांव रोगला के रहने वाले थे।
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सदमे में मृतकों के परिवार, नहीं जले चूल्हे

Rocks may wreak havoc in Manikaran gurudwara kullu

मणिकर्ण हादसे में मारे गए पंजाब के गांव रोगला के सात नौजवानों के परिवार सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। हादसे ने गांव को इस कदर गम में डूबो दिया है कि दो दिन से गांव में किसी घर का चूल्हा तक नहीं जला है। पूरा गांव गमगीन है। पीड़ित परिवारों की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है, मानो उनपर दुखों का पहाड़ आ गिरा हो।

प्रशासनिक अधिकारी भी गांव में मौजूद हैं और पीड़ित परिवारों का दर्द बंटाने में अपनी तरफ से पूरा सहयोग कर रहे हैं। प्रशासन ने गांव में एक एंबुलेंस और मेडिकल टीम तैनात कर दी है, ताकि मृतकों के पारिवारिक सदस्यों की सहायता की जा सके।

दूसरी तरफ मृतकों के शव लाने के लिए भी गांव से लोग मंगलवार शाम को ही कुल्लू की तरफ रवाना हो गए थे, जिनके बुधवार देर रात वापस आने की उम्मीद है, ताकि मृतकों का वीरवार सुबह गांव के ही श्मशानघाट में संस्कार किया जा सके।

हर साल लोग जाते थे मन्नत मांगने मणिकर्ण

Rocks may wreak havoc in Manikaran gurudwara kullu

गौरतलब है कि गांव रोगला से हर साल की तरह इस साल भी गांव के करीब अठारह नौजवान चार दिन पहले मोटरसाइकिलों पर मणिकर्ण साहिब की यात्रा पर निकले थे। लेकिन मंगलवार को अचानक दोपहर के समय जिस सराय में वे ठहरे थे उसपर चट्टान गिर पड़ी।

इससे गांव रोगला के सात नौजवानों यादविंदर सिंह पुत्र सुखविंदर सिंह, लाडी पुत्र हरी सिंह, सोनी राम पुत्र मांगा राम, गुरदीप सिंह पुत्र हरदेव सिंह, गोपाल पुत्र हरी राम, रघुवीर पुत्र बालकृष्ण, काका सिंह पुत्र हरदयाल सिंह की मौत हो गई थी। कई के घायल होने की खबर गांव में पहुंची तो पूरा गांव शोक में डूब गया।

आलम यह है कि गांव की हर गली और हर घर में सन्नाटा पसरा है। गांव निवासी कांग्रेसी नेता गोगी चौधरी ने फोन पर बताया कि गांव के लिए यह हादसा बेहद दुखद है। गांव के सात नौजवानों की मौत को सहन कर पाना परिवारों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे गांव के लिए असंभव है। पीड़ित परिवारों का दुख देखा नहीं जा रहा और महिलाओं का तो रो-रोकर बुरा हाल है।

उन्होंने कहा कि प्रशासन ग्रामीणों को अपनी तरफ से पूर्ण सहयोग दे रहा है। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी गांव में अपनी पूरी जिम्मेवारी के साथ ड्यूटी निभा रहे हैं। डिप्टी कमिश्नर अर्शदीप सिंह थिंद भी पीड़ित परिवारों के साथ दुख साझा करने पहुंचे और उन्होंने प्रशासन की तरफ से हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।

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