मुसीबतः 10 राज्यों में थम गए 4100 रोडवेज बसों के पहिये, रहेगा दो दिवसीय चक्का जाम
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हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों को साधने में परिवहन विभाग नाकाम रहा है। बीते 22 सितंबर को दो दिवसीय हड़ताल की घोषणा के बावजूद उच्च अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। रोडवेज कर्मचारी तो पहले ही किलोमीटर स्कीम के तहत 700 बसें चलाने को लेकर आंदोलनरत हैं, सरकार के तेवर भी बिल्कुल नरम नहीं पड़़े।
इसके फलस्वरूप 16-17 अक्टूबर को रोडवेज का चक्का जाम होने जा रहा है। सोमवार रात 12 बजे के बाद दस राज्यों में रोडवेज की लगभग 4100 बसों के पहिये थम जाएंगे। हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल, जम्मू, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश व चंडीगढ़ के रूटों पर बसें नहीं चलेंगी।
सोमवार रात 12 बजे से पहले रूट पर निकली बसें गंतव्य स्थल पर पहुंचकर खड़ी हो जाएंगी, जबकि पहले से लंबे रूट पर पहुंच चुकीं बसें वहीं पर रुकी रहेंगी। रोडवेज की दो दिवसीय हड़ताल से प्रतिदिन लगभग साढ़े तेरह लाख यात्री प्रभावित होंगे। परिवहन विभाग को रोजाना लगभग चार करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान होगा। हरियाणा में परिवहन व्यवस्था के पूरी तरह चरमराने की संभावना है। चूंकि, रोडवेज प्रदेश की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ है। प्राइवेट बसें लाखों यात्रियों को ढोने में सक्षम नहीं हैं।
सरकार फिर एस्मा के तहत चलाएगी डंडा
उधर, हरियाणा सरकार व परिवहन विभाग के लिए इस बार राह बीते पांच सितंबर की हड़ताल जैसी आसान नहीं है। उस समय रोडवेज की यूनियनें दोफाड़ थीं। धनखड़, सरबत पूनिया व बधाना हड़ताल हड़ताल का समर्थन नहीं कर रहा था, इसलिए सरकार बसें चलाने में सफल रही थी। इस बार सभी यूनियनें हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के बैनर तले एकजुट हैं। सरकार समर्थित यूनियन भारतीय मजदूर संघ तटस्थ है। वैसे भी रोडवेज में इसके उतने सदस्य नहीं हैं कि अन्य 11 यूनियनों की हड़ताल को बेअसर कर सकें। सरकार और कर्मचारियों के रुख को देखते हुए साफ है कि इस बार भी टकराव तय है।
हरियाणा रोडवेज की हड़ताल को विफल बनाने के लिए सरकार व परिवहन विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी है। डिपुओं में सोमवार शाम से धारा-144 लागू कर दी जाएगी। इसके साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस बल, एसडीएम व सिटी मजिस्ट्रेट तैनात किए जाएंगे। हड़ताली कर्मियों पर सरकार एस्मा के तहत कार्रवाई कर बसें चलाने का पूरा प्रयास करेगी। सरकार के कड़े रुख को देखते हुए तय है कि पुलिस इस बार भी कर्मचारियों पर लाठियां भांजने से गुरेज नहीं करेगी। ऐसे में कर्मचारियों और पुलिस में झड़प होने के आसार हैं।
हड़ताल जायज नहीं, जनता से मांगा सहयोग : धनपत
परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव धनपत सिंह का कहना है कि रोडवेज कर्मचारियों की आए दिन हड़ताल जायज नहीं है। कर्मचारियों की अनेक मांगों को माना जा चुका है। 700 बसें निजी ऑपरेटरों की चलाने से रोडवेज का निजीकरण नहीं होगा। जनता से हड़ताल के दौरान सहयोग की अपील की गई है। कर्मचारियों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की तो एस्मा के तहत कार्रवाई के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।