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कोरोना के साथ बढ़ा सांस संबंधित बीमारियों का भी खतरा, मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण सांस के मरीजों को बढ़ी परेशानी

Sun, 04 Oct 2020 12:33 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 04 Oct 2020 12:33 AM IST
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Risk respiratory diseases increased corona respiratory problems increased fluctuations in weather
चंडीगढ़। मौसम में बदलाव ने लोगों में कोरोना के साथ ही सांस संबंधी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा दिया है। ऐसी स्थिति में चिकित्सक सांस के रोगियों को समय पर दवाओं का सेवन करने व ठंड से बचाव के उपाय करने की सलाह दे रहे हैं। स्थिति यह है कि जीएमएसएच-16 के फ्लू क्लीनिक में कोरोना की आशंका पर जांच के लिए आने वाले लोगों की संख्या एक हफ्ते के दौरान काफी तेजी से बढ़ रही है।
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अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके नागपाल का कहना है कि कुछ दिन पहले तक 1 दिन में 80 से 100 लोगों की जांच की जा रही थी। वहीं अब यह संख्या 150 तक पहुंच गई है। ऐसी स्थिति में चिकित्सालय के विशेषज्ञ उन्हें लक्षणों के आधार पर वायरल व सांस संबंधी बीमारियों की आशंका बताकर एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं। डॉ. नागपाल का कहना है कि बदलते मौसम में एहतियात बरतना बेहद जरूरी है।
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अस्थमा के लक्षण सांस लेने में परेशानी होना।
खांसी की दवा, एंटीबायोटिक लेने के बाद भी खांसी रहना।
सीने से सीटी जैसी आवाज आना, सीने में कसावट।
सीढ़ियां चढ़ने या तेज चलने पर खांसी शुरू हो जाना।
मौसम बदलने में परेशानी का अनुभव होना।
ज्यादा हंसने, गुस्सा आने पर खांसी।
अस्थमा से ऐसे करें बचाव
तेज गंध, धूल, धुएं से दूर रहना चाहिए।
बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, धूम्रपान करने वालों से दूरी बनाएं।
मौसम में बदलाव के दौरान ठंड से बचाव के उपाय करके ही बाहर निकलें।
दवाओं (इन्हेलर) के प्रयोग में लापरवाही न करें। तकलीफ बढ़ने पर तत्काल डॉक्टर की सलाह लें।
तापमान कम होने के साथ ही बढ़ने लगी परेशानी
जीएमएसएच-16 के सांस रोग विशेषज्ञ व कोविड के नोडल डॉ. हनी सैनी का कहना है कि धीरे कम हो रहे तापमान से हमारे शरीर के तापमान में भी गिरावट आ जाती है जिससे जुकाम हो जाता है। ऐसी समस्या शुरू होने लगी है। ऐसे में वातावरण के अनुसार कपड़े पहनने चाहिएं। जुकाम से बचने के लिए हाथ साफ रखें जिससे वो कीटाणु नष्ट हो जाएं जो दिखाई नहीं देते। इसके साथ ही ठंडी हवाएं दमा के लक्षणों को गंभीर बना सकती हैं। जैसे सांस लेने में बहुत तकलीफ होना आदि। दमा के मरीजों को अपने साथ हमेशा दवा रखनी चाहिए।
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बच्चों और वृद्धों को ज्यादा खतरा
डॉ. हनी सैनी के बताया कि बदलते मौसम में रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी) के कारण व्यक्ति को सिरदर्द, बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ होती है। यह सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करता है लेकिन बुजुर्गों और नवजात शिशुओं के लिए यह समस्या अधिक गंभीर होती है। नवजात शिशु के लिए यह निमोनिया का कारण भी बन सकती है।
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