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किसानों के लिए अच्छी खबर: एक सॉफ्टवेयर की मदद से पता लगा सकेंगे अपने चावल की गुणवत्ता, खुद तय करेंगे दाम
Sat, 12 Jun 2021 12:30 PM IST
निवेदिता वर्मा
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 12 Jun 2021 12:30 PM IST
सार
केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन की तकनीकी अधिकारी डॉ. ममता शर्मा ने यह सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इससे चावल की फोटो स्कैन होते ही दाने-दाने की गुणवत्ता सामने होगी।
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चावल की गुणवत्ता बताएगा साॅफ्टवेयर।
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
विस्तार
किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। अब वह खुद अपनी फसल का मूल्य निर्धारित कर सकेंगे। उन्हें पता होगा कि उनकी फसल का दाना-दाना कितना मजबूत है। इसके लिए केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ) ने एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसके जरिए चावल के हर दाने की गुणवत्ता का पता लगाया गया है। इस पर प्रयोग सफल रहा। यह सॉफ्टवेयर जल्द बाजार में आएगा। इसके लिए आठ कंपनियों से करार हो गया है।
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सीएसआईओ की तकनीकी अधिकारी डॉ. ममता शर्मा ने इस पर दो साल तक शोध किया और राइस ग्रेन एनालिसिस सॉफ्टवेयर तैयार किया। इस सॉफ्टवेयर के जरिए पता लगाया गया कि चावल का हर दाना कितना मजबूत है। इस पर सफलता मिली है। सॉफ्टवेयर कंप्यूटर से संचालित है।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक राइस की एक बेहतर फोटो स्कैन होगी और उसके बाद सॉफ्टवेयर फोटो के जरिए हर दाने का विश्लेषण करेगा। चावल कितना ठोस है, कितने चावल टूटे हुए हैं और कितने खोखले हैं। इन सभी का पता लग जाएगा। जैसे ही चावल की गुणवत्ता का पता लग जाएगा तो उसका मूल्य निर्धारण कर लिया जाएगा। बेहतर चावल होने पर अच्छे पैसे मिलेंगे और कुछ गुणवत्ता खराब होने पर अलग रेट मिलेंगे। राइस मिल संचालकों के लिए यह अधिक कारगर होगा।
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जल्द बाजार में आएगा सॉफ्टवेयर
सीएसआईओ की तकनीकी अधिकारी ममता शर्मा का कहना है कि जल्द ही सॉफ्टवेयर बाजार में आएगा। किसानों के लिए भी यह लाभदायक होगा। अगला शोध अन्य फसलों की गुणवत्ता पता लगाने के लिए होगा। उस पर काम शुरू करेंगे। मालूम हो कि देश में चावल का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। विदेशों को भी चावल भिजवाया जाता है। ऐसे में बाहर चावल बेहतर जाए और उसका मूल्य किसानों या राइस मिल संचालकों को मिले, उसके लिए सॉफ्टवेयर अधिक कारगर होगा। सीएसआईओ को लगातार सफलता मिल रही है। इससे पहले खाद्य तेलों में मिलावट का पता लगाने के लिए उपकरण बनाया और कोरोना बचाव के लिए विशेष मास्क तैयार किए गए। कई अन्य अध्ययन भी चल रहे हैं जो जल्द सामने आएंगे।